way clear for collection of property tax at new rates High Court upheld decision Municipal Commissioner नई दरों पर प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त के फैसले को माना सही, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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नई दरों पर प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त के फैसले को माना सही

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद नगर निगम क्षेत्र के निवासियों के लिए प्रॉपर्टी टैक्स की नई दरों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज़ कर दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में टैक्स बढ़ोत्तरी को सही और नियमानुसार करार दिया है।

Wed, 25 Feb 2026 11:09 PMDinesh Rathour प्रयागराज, विधि संवाददाता
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नई दरों पर प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त के फैसले को माना सही

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद नगर निगम क्षेत्र के निवासियों के लिए प्रॉपर्टी टैक्स की नई दरों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज़ कर दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में टैक्स बढ़ोत्तरी को सही और नियमानुसार करार दिया है। जनहित याचिका कुछ पूर्व पार्षदों ने दाखिल की थी। इस पर मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने सुनवाई की।

इस फैसले के बाद अब गाजियाबाद में 1 अप्रैल 2025 से लागू की गई नई और बढ़ी हुई दरों पर प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह याचिका गाजियाबाद के वर्तमान पार्षद राजेंद्र त्यागी और अन्य पूर्व पार्षदों द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने नगर निगम द्वारा संपत्तियों के नए वर्गीकरण और 'न्यूनतम मासिक किराया दर' में की गई वृद्धि को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि नगर आयुक्त ने बोर्ड की सहमति के बिना मनमाने ढंग से टैक्स की दरों में भारी इजाफा किया है और पुरानी छूट को खत्म कर दिया है, जिससे जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

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नगर आयुक्त को किराया तय करने का पूर्ण अधिकार

हाईकोर्ट ने अपने 77 पन्नों के विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 174 के तहत नगर आयुक्त को संपत्तियों का वार्षिक मूल्य निर्धारित करने और किराया दरें तय करने का पूर्ण वैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि नगर निगम ने पूरे शहर को सड़कों की चौड़ाई और विकास के आधार पर तीन श्रेणियों (ए , बी और सी) में बांटकर टैक्स का जो निर्धारण किया है, वह पूरी तरह तर्कसंगत और पारदर्शी है। अदालत ने यह भी कहा कि नई दरें लागू करने से पहले निगम ने सार्वजनिक सूचना जारी कर आपत्तियां मांगी थीं। लगभग 318 आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद ही अंतिम फैसला लिया गया।

कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ताओं ने जनहित के बजाय राजनीतिक हिसाब बराबर करने के उद्देश्य से यह मामला दायर किया था। मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जब नगर निगम बोर्ड और प्रशासन के बीच टैक्स वृद्धि को लेकर गतिरोध पैदा हुआ, तब राज्य सरकार ने धारा 116 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग किया। सरकार ने नगर आयुक्त को निर्देश दिया था कि वह कानून के दायरे में रहकर जनता के हितों और निगम के राजस्व के बीच संतुलन बनाते हुए निर्णय लें। हाईकोर्ट ने सरकार के इस हस्तक्षेप को भी पूरी तरह से कानूनी ठहराया है।

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वाद का स्वरूप न बदले तो देरी के आधार पर संशोधन अर्जी खारिज नहीं: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी वाद में प्रस्तावित संशोधन से मुकदमे की मूल प्रकृति या स्वरूप में कोई बदलाव नहीं आता है, तो केवल समय की देरी के आधार पर संशोधन आवेदन को निरस्त नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने गोरखपुर के एक दीवानी मामले में ट्रायल अदालत और पुनरीक्षण अदालत द्वारा संशोधन अर्जी खारिज करने के आदेशों को त्रुटिपूर्ण मानते हुए उन्हें रद्द कर दिया है। कोर्ट ने संशोधन आवेदन को स्वीकार कर लिया और ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है।

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