Is Shankaracharya afraid of arrest? Swami Avimukteshwarananda filed a petition in High Court seeking anticipatory bail शंकराचार्य को गिरफ्तारी का डर? अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंचे स्वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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शंकराचार्य को गिरफ्तारी का डर? अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंचे स्वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद

यौन शोषण मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। उन्हें डर है कि पुलिस उनकी गिरफ्तारी कर सकती है।

Tue, 24 Feb 2026 05:16 PMDeep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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शंकराचार्य को गिरफ्तारी का डर? अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंचे स्वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद

शंकराचार्य स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद पर दर्ज यौन शोषण का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मंगलवार को शंकराचार्य ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। उन्हें डर है कि पुलिस उनको गिरफ्तार कर सकती है। सीनियर एडवोकेट दिलीप गुप्ता ने बतौर वकील जमानत की याचिका दाखिल की है। याचिका का संज्ञान लेकर शासकीय अधिवक्ता को नोटिस जारी किया गया है। इस याचिका पर जल्‍द सुनवाई हो सकती है। इस बीच, प्रयागराज पुलिस शंकराचार्य से इस मामले में पूछताछ भी कर सकती है। स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद के खिलाफ दर्ज मुकदमे में आरोप है कि नाबालिगों के साथ यौन शोषण हुआ था। शाकुंभरी पीठाधीश्‍वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की याचिका पर लोअर कोर्ट ने शंकराचार्य पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।

इससे पहले ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंगलवार को पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी नाबालिग ने आरोप लगाया था तो पुलिस ने पहले पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि 18 फरवरी को मौनी अमावस्या के दिन उन्हें संगम नोज पर रोका गया था। उसी दिन शाम को एक तथाकथित महाराज ने उनके खिलाफ मुकदमा दायर किया और आरोप लगाया कि उनके शिष्य मुकुंदानंद ने उन्हें पटककर गला दबाया। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या जैसे पर्व पर, जब भारी भीड़ होती है, ऐसे गंभीर आरोप लगाना संदेह पैदा करता है। दूसरा आरोप यह लगाया गया कि उन्होंने पालकी से कोई वजनदार वस्तु फेंकी, जिससे बड़ी घटना हो सकती थी।

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स्वामी ने कहा कि वे दिनभर मीडिया कैमरों के सामने मौजूद थे और कोई साक्ष्य नहीं मिलने के कारण पुलिस ने प्रारंभ में मामला दर्ज नहीं किया। बाद में नया मामला यौन उत्पीड़न का सामने लाया गया। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि कोई लड़का आरोप लगा रहा था तो उसी दिन पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं कराया गया। उनका कहना था कि अदालत के आदेश के बाद ही प्राथमिकी दर्ज की गई।

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अजय राय ने की निष्पक्ष जांच की मांग

उधर, अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच किसी स्वतंत्र या केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए। अजय राय ने पत्र में लिखा कि यदि किसी शीर्ष धर्माचार्य के विरुद्ध ऐसी परस्थितिियां बनती हैं, जिससे शासन और आध्यात्मिक परंपरा के बीच टकराव की धारणा बने, तो व्यापक धार्मिक समाज में असंतोष उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि आस्था, संवैधानिक अधिकार और शासन की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है।

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