Wasting court time in matters of mutual consent and love affair is not appropriate, High Court remarked आपसी सहमति और प्रेम प्रसंग के मामलों में अदालती समय नष्ट करना उचित नहीं, हाईकोर्ट की टिप्पणी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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आपसी सहमति और प्रेम प्रसंग के मामलों में अदालती समय नष्ट करना उचित नहीं, हाईकोर्ट की टिप्पणी

आपसी सहमति और प्रेम प्रसंग के मामलों में अदालती समय नष्ट करना उचित नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने एक्सिस बैंक मैनेजर ऋषभ पांडेय की याचिका पर उनके अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय और सरकारी वकील को सुनकर दिया है।

Fri, 29 May 2026 09:57 PMDeep Pandey प्रयागराज, विधि संवाददाता
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आपसी सहमति और प्रेम प्रसंग के मामलों में अदालती समय नष्ट करना उचित नहीं, हाईकोर्ट की टिप्पणी

High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि लंबे समय से प्रेम संबंध रहे हों और बाद में दोनों आपस में विवाद सुलझा लेते हैं तो ऐसी आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना न्यायालय के कीमती समय की बर्बादी है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने एक्सिस बैंक मैनेजर ऋषभ पांडेय की याचिका पर उनके अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय और सरकारी वकील को सुनकर दिया है। कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए याची के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी, चार्जशीट और संज्ञान आदेश सहित पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है।

​फर्रुखाबाद जिले की फतेहगढ़ कोतवाली में ऋषभ पांडेय के खिलाफ बीएनएस की धारा 64(2)(एम) व 351(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। याची के अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि याची और पीड़िता के बीच दिसंबर 2023 से मई 2025 तक प्रेम संबंध थे। जब इन संबंधों में खटास आई तो पीड़िता ने गुस्से में आकर प्राथमिकी दर्ज करा दी। जांच के दौरान मकान मालकिन और अन्य गवाहों ने भी यह स्वीकार किया कि यह शिकायत केवल शादी का दबाव बनाने के लिए की गई थी।

​मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़िता ने कोर्ट में संक्षिप्त जवाबी हलफनामा दाखिल कर स्वीकार किया कि दोनों आपसी सहमति से रिश्ते में थे और उसने गुस्से में आकर यह मामला दर्ज कराया था। अब उनके बीच का विवाद पूरी तरह सुलझ चुका है। पीड़िता ने जांच अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी शपथपत्र देकर कार्रवाई न करने का अनुरोध किया था और वह अब आरोपी के खिलाफ कोई कानूनी मुकदमा नहीं चलाना चाहती है।

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​सरकारी वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में समझौते के आधार पर कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब पीड़िता खुद आरोपी के खिलाफ गवाही नहीं देना चाहती और मुकर जाने का इरादा जता चुकी है तो मुकदमे को आगे बढ़ाने से सजा मिलने की गुंजाइश नहीं बचती। ऐसे मामलों में मुकदमा चलाना अदालतों पर बोझ बढ़ाना और समय को व्यर्थ गंवाना है। कोर्ट ने कहा कि यह दो वयस्कों के बीच का निजी विवाद था, इसे आगे बढ़ाने से समाज का कोई भला नहीं होने वाला है। साथ ही मामले की संवेदनशीलता और दोनों पक्षों के बीच समझौते को ध्यान में रखते हुए सीजेएम फर्रुखाबाद की अदालत में लंबित मुकदमा राज्य बनाम ऋषभ पांडेय की पूरी कार्यवाही तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी।

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