कफ सिरप तस्करी में शुभम जायसवाल का करीबी मनोज यादव भी गिरफ्तार, करोड़ों की संपत्ति बनाई
वाराणसी की कोतवाली पुलिस ने करोड़ों के नशीले Cough Syrup तस्करी सिंडिकेट के अहम सदस्य मनोज यादव और उसके बेटे लक्ष्य को गिरफ्तार किया है। मनोज, सरगना शुभम जायसवाल के लिए हवाला नेटवर्क चलाता था और बोगस फर्मों के जरिए काले धन को सफेद करता था।

cough syrup smuggling: वाराणसी पुलिस ने नशीली कफ सिरप (Cough Syrup) की तस्करी के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के खिलाफ एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। कोतवाली पुलिस ने गिरोह के सरगना शुभम जायसवाल के सबसे भरोसेमंद और खास सहयोगी मनोज यादव और उसके बेटे लक्ष्य को टेंगरा मोड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया। मनोज यादव न केवल दवाओं के अवैध कारोबार में लिप्त था, बल्कि तस्करी से होने वाली काली कमाई को सफेद करने (Money Laundering) का मुख्य रणनीतिकार भी माना जा रहा है।
ई-बिल और बोगस फर्मों का मायाजाल
एडीसीपी काशी वैभव बांगर और एसीपी विजय प्रताप सिंह ने चेतगंज स्थित कार्यालय में इस पूरे खेल का खुलासा किया। जांच में पता चला कि औसानगंज (जैतपुरा) निवासी मनोज यादव पिछले 25 वर्षों से दवा के कारोबार से जुड़ा था। मनोज ने शुभम जायसवाल की फर्म 'शैली ट्रेडर्स' के माध्यम से कागजों पर करीब 2 करोड़ रुपये की कफ सिरप की खरीद और बिक्री दिखाई।
हैरानी की बात यह है कि यह माल कभी भौतिक रूप से वाराणसी आया ही नहीं। मनोज केवल ई-बिल (E-Bill) के जरिए ट्रांजैक्शन दिखाता था ताकि कागजों पर कारोबार असली लगे। असल में यह सिंडिकेट नशीली दवाओं को सीधे तस्करी के रास्तों से सप्लाई करता था और मनोज का काम केवल उन रुपयों को अपनी बोगस फर्मों—जैसे 'एलएमएस इंफ्रा प्रा. लि.' और 'सिंडिकेट एंटरप्राइजेज'—के माध्यम से बैंकिंग सिस्टम में लाकर 'क्लीन' करना था।
12.53 करोड़ की संपत्ति फ्रीज, ससुर-दामाद का कनेक्शन
पुलिस की इस कार्रवाई से पहले ही सफेमा (SAFEMA) ट्रिब्यूनल के आदेश पर मनोज यादव की 12.53 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति फ्रीज की जा चुकी है। इसमें 1 करोड़ रुपये से अधिक के वे दो प्लॉट भी शामिल हैं, जिनके संयुक्त मालिक मनोज यादव और शुभम के पिता भोला प्रसाद हैं। यह सिंडिकेट इतना मजबूत था कि शुभम के हवाला के करोड़ों रुपये मनोज अपनी विभिन्न कंपनियों में जमा कराता था। मनोज पर पहले से भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जो उसकी पुरानी आपराधिक पृष्ठभूमि की ओर इशारा करते हैं।
फरारी और गिरफ्तारी का नाट्य रूपांतरण
बीते 15 नवंबर को कोतवाली थाने में दर्ज मुकदमे और 9 दिसंबर को सूजाबाद में मिले अवैध सिरप भंडारण के मामले में मनोज और उसका बेटा वांछित चल रहे थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों कोलकाता में छिपकर रह रहे थे। पुलिस के अनुसार, दोनों अपने कानूनी मामलों के सिलसिले में पैरवी के लिए वाराणसी लौट रहे थे, तभी सटीक सूचना पर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक दयाशंकर सिंह की टीम ने उन्हें दबोच लिया। शुक्रवार को दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।




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