cough syrup smugglers are involved in liquor business and other network Vikas Narve revealing secrets कफ सिरप तस्करों के कई और नेटवर्क, शराब व्यवसाय में भी लगायी रकम; विकास नरवे ने खोले राज, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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कफ सिरप तस्करों के कई और नेटवर्क, शराब व्यवसाय में भी लगायी रकम; विकास नरवे ने खोले राज

कोडीन युक्त कफ सिरप की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई अब शराब सिंडिकेट की तरफ मुड़ गई है। मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के करीबी विकास नरवे के बयानों ने इस काले कारोबार के कई पहलुओं को उजागर किया है।

Mon, 2 Feb 2026 07:25 AMYogesh Yadav लखनऊ, विशेष संवाददाता
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कफ सिरप तस्करों के कई और नेटवर्क, शराब व्यवसाय में भी लगायी रकम; विकास नरवे ने खोले राज

कोडीन युक्त कफ सिरप के तस्करों के कई और नेटवर्क सामने आ रहे हैं। तस्करी के मुख्य आरोपियों विभोर राणा, विशाल और विकास ने शराब व्यवसाय में भी भारी रकम लगाई थी। मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के बेहद करीबी विकास नरवे ने गिरफ्तारी के बाद यह राज खोला है। पूछताछ के दौरान उसने कई ऐसे साक्ष्य दिए, जिसके बाद बैंक खातों की जांच में शराब ठेकेदारों के साथ संदिग्ध लेन-देन की पुष्टि हुई है। आरोपियों ने विशेष रूप से वाराणसी और गाजियाबाद के शराब व्यवसायों में निवेश किया था। इस इनपुट के आधार पर ईडी ने शनिवार को चार बड़े शराब ठेकेदारों को मुख्यालय बुलाकर घंटों पूछताछ की।

कफ सिरप तस्करी से अर्जित काली कमाई को खपाने के लिए इस गिरोह ने एक सुनियोजित नेटवर्क तैयार किया था। विकास नरवे ने खुलासा किया कि तस्करी से मिलने वाले मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट और शराब के व्यापार में लगाया जा रहा था। जब ईडी ने बैंक स्टेटमेंट खंगाले, तो गिरोह के सदस्यों और शराब ठेकेदारों के बीच करोड़ों के ट्रांजैक्शन मिले। हालांकि, पूछताछ में ठेकेदारों ने पहले इन पैसों को 'व्यक्तिगत उधार' बताकर बचने की कोशिश की, लेकिन ईडी के कड़े रुख और दस्तावेजी सबूतों के सामने उनकी दलीलें टिक नहीं सकीं।

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शेल कंपनियों और बेनामी निवेश की जांच तेज

ईडी की जांच का दायरा अब उन शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) की ओर बढ़ गया है, जिनका इस्तेमाल इस तस्करी के पैसे को घुमाने के लिए किया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, विकास नरवे ने कुछ ऐसे नामों का भी खुलासा किया है जो सीधे तौर पर राजनीति और रसूखदार व्यवसायों से जुड़े हैं। ईडी को संदेह है कि वाराणसी और गाजियाबाद के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी मॉडल पर निवेश किया गया है। अब जांच एजेंसी उन संपत्तियों की पहचान कर रही है जो इन तस्करों ने बेनामी नामों से खरीदी थीं। आने वाले दिनों में कुछ और शराब कारोबारियों को समन जारी किया जा सकता है, जिससे इस सिंडिकेट की कमर टूटना तय माना जा रहा है।

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