us dusht ki badi bhool thi khud ko badshah kahta tha cm yogi said about aurangzeb on shaheedi diwas उस दुष्ट की बड़ी भूल थी, खुद को बादशाह कहता था; शहीदी दिवस पर औरंगजेब पर बोले योगी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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उस दुष्ट की बड़ी भूल थी, खुद को बादशाह कहता था; शहीदी दिवस पर औरंगजेब पर बोले योगी

वीर बाल दिवस के अवसर पर शबद पाठ और कीर्तन समागम का आयोजन मुख्यमंत्री आवास पर हुआ। सीएम योगी ने गुरु ग्रंथ साहिब को माथे लगाकर प्रणाम किया। उन्होंने शबद कीर्तन और साहिबज़ादों के अमर बलिदान की गाथा को सुना। सीएम ने कहा कि कहा कि इतिहास उन्हीं का बनता है जिनके मन में त्याग और बलिदान का भाव हो।

Sat, 27 Dec 2025 09:32 AMAjay Singh संवाददाता, लखनऊ
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उस दुष्ट की बड़ी भूल थी, खुद को बादशाह कहता था; शहीदी दिवस पर औरंगजेब पर बोले योगी

धर्म रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले गुरु गोबिंद सिंह के सुपुत्रों की स्मृति में वीर बाल दिवस और गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष पर शुक्रवार को आयोजित कीर्तन समागम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतिहास उन्हीं का बनता है जिनके मन में त्याग और बलिदान का भाव हो। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने स्वदेश और स्वधर्म के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की जो परंपरा स्थापित की, वही हमारी प्रगति का मार्ग है। सीएम योगी ने कहा कि जहांगीर ने गुरु अर्जुनदेव पर बर्बरता की लेकिन गुरु तेगबहादुर के तेज के सामने वह चल नहीं पाया। औरंगजेब खुद को हिंदुस्तान का बादशाह कहता था लेकिन उसकी कब्र कहां है कोई पूछने वाला नहीं है। दुष्ट औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर को चुनौती देकर भूल की थी। आज इस देश में औरंगजेब का नाम लेने वाला कोई नहीं है। सीएम योगी ने कहा कि आज 140 करोड़ वाला हिदुस्तान इन गुरुओं के प्रति कृतज्ञता जाहिर कर रहा है। सिख गुरुओं का इतिहास भारत के अंदर भक्ति और शक्ति का एक अदभुत तेज का इतिहास है।

वीर बाल दिवस के अवसर पर शबद पाठ और कीर्तन समागम का आयोजन मुख्यमंत्री आवास, 5 कालिदास मार्ग पर हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम की शुरुआत में गुरु ग्रंथ साहिब को माथे लगाकर प्रणाम किया। इसके बाद उन्होंने शबद कीर्तन और साहिबज़ादों के अमर बलिदान की गाथा को सुना। कीर्तन पाठ करने वाले बच्चों को पटका पहनाकर और पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। उन्होंने ‘छोटे साहिबज़ादे’ नाम की पुस्तिका का विमोचन भी किया।

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उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबज़ादों बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के शहीदी दिवस को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाना, उनके स्वधर्म और स्वदेश के प्रति अमर बलिदान को नमन करने का अवसर है। उन्होंने प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद दिया कि उन्होंने देशभर के सिख समाज की भावना को स्वीकार करते हुए इस दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं का इतिहास भारत में भक्ति और शक्ति का इतिहास है। गुरु नानक देव जी ने सिख धर्म की जो अलख जगाई, उसके प्रचार-प्रसार के लिए देश के कोने-कोने में गए। गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने त्याग और बलिदान से इसे अनुकरणीय बनाया।

शबद कीर्तन समागम में मुख्यमंत्री ने सिख गुरुओं की परंपरा, उनके त्याग और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस का 350वां वर्ष मनाया जा रहा है और मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे कई बार उनके शहीदी दिवस के कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिला। यह विशेष संयोग था कि जिस समय हम गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में कार्यक्रम का आयोजन कर रहे थे, उसी दिन 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश के हर स्कूल, कॉलेज और कार्यालय में वीर बाल दिवस के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं तथा साहिबज़ादों की गाथाएं पाठ्यक्रम में शामिल की गई हैं, ताकि नई पीढ़ी को बलिदान की प्रेरणा मिल सके। उन्होंने कहा कि इतिहास उन्हीं का बनता है जिनके मन में त्याग और बलिदान का भाव होता है। सिख धर्म की लंगर परंपरा सामाजिक समरसता का उदाहरण है, जहाँ किसी की जाति या धर्म नहीं पूछा जाता। गुरु गोबिंद सिंह जी ने समाज को एकता के सूत्र में बांधने का काम किया।

मुख्यमंत्री ने गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज, माता गुजरी देवी, बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की स्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस प्रत्येक भारतीय युवा के लिए प्रेरणा का दिन है। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष के आयोजनों में डबल इंजन सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के अंत में आनंद साहिब का पाठ और अरदास हुई। इसके बाद वह मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ एवं असीम अरुण के साथ लंगर में भी शामिल हुए।

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