उन्हें एक कप चाय के लिए पूछिए, कड़ाके की ठंड में क्या आपने पढ़ी योगी की ये पाती?
सीएम योगी ने लिखा- आसपास के घरों में देखिए, घरों में काम करने वाले सहयोगी, स्वच्छाग्रही, चौकीदार या अन्य लोगों से एक बार अवश्य पूछें कि क्या उनके पास शीतलहर से बचाव का इंतजाम है। उन्हें एक कप चाय के लिए पूछिए। असहायों को सरकार द्वारा संचालित रैन बसेरों तक पहुंचाएं।

उत्तर प्रदेश इस समय कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चपेट में है। सर्दी का यह मौसम गरीबों पर बहुत भारी गुजरता है। जरा सोचिए जब हम अपने घरों में गर्म रजाइयों तमाम इंतजामों के बाद भी ठंड से परेशानी महसूस कर रहे होते हैं तो इस मौसम में उन लोगों पर क्या गुजरती होगी जिनके पास न घर है न रजाइयां, न कंबल औेर न कोई और इंतजाम। ऐसे में शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के नागरिकों के नाम एक पाती लिख उनसे अपने आसपास रहने वाले सहयोगी, स्वच्छाग्रही, चौकीदार या अन्य जरूरतमंद लोगों को शीतलहर से बचाने के सद्प्रयास में भागीदार बनने की अपील की है। इस पाती में सीएम योगी ने लिखा कि इन लोगों से एक बार जरूर पूछें कि क्या उनके पास शीतलहर से बचाव का पर्याप्त प्रबंध है। उन्हें एक कप चाय के लिए पूछिए।
सीएम योगी ने पाती में लिखा कि शीतलहर से बचाव के लिए सरकार पूरी संवेदनशीलता और तत्परता से काम कर रही है। अधिकारियों को मानवीय और अति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया गया है। पूरे प्रदेश में रैन बसेरों को पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जा रहा है। रैन बसेरों में रजाई, कंबल, पेयजल, अलाव और हीटर की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। दूसरे स्थानों से आए परीक्षार्थियों और रोगियों के परिवारीजनों को भी अपने यहां आसरा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए हर व्यक्ति का जीवन अमूल्य है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेश के नगरीय निकायों और तहसीलों के जरिए जरूरतमंदों को ऊनी वस्त्र और कंबल वितरित किए जा रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। कंपकंपाती ठंड में एक भी अभावग्रस्त व्यक्ति असहाय नहीं रहेगा। गोशालाओं में विशेष कंबल और अलाव का प्रबंध किया जा रहा है। कोहरे में सुरक्षित यात्रा के लिए मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
मानवीय मूल्यों और संवेदना की परख का समय
सीएम योगी ने कहा कि हर नागरिक इस सद्प्रयास में भागीदार बन सकता है। आप, अपने आसपास के देखिए, घरों में काम करने वाले सहयोगी, स्वच्छाग्रही, चौकीदार या अन्य लोगों से एक बार अवश्य पूछें कि क्या उनके पास शीतलहर से बचाव का पर्याप्त इंतजाम है। उन्हें एक कप चाय के लिए पूछिए। असहायों को सरकार द्वारा संचालित रैन बसेरों तक पहुंचाएं। उन्होंने लिखा कि मानवीय मूल्यों और संवेदना की परख ऐसे समय में ही होती है। परोपकार हमारी परंपरा है।




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