UP Weather: मार्च में कोहरा या कुछ और? यूपी के कई जिलों में छाई धुंध, वैज्ञानिकों ने बताई वजह
उत्तर-पश्चिमी तेज हवाओं ने मंगलवार को मेरठ सहित वेस्ट यूपी एवं उत्तर भारत के अनेक हिस्सों में सुबह की फिजा बदल दी। मंगलवार सुबह आसमान में सर्दियों जैसी धुंध की चादर में लिपटी हुई आई। लोगों ने इसे कोहरा समझते हुए मार्च महीने में अप्रत्याशित घटना बताया।

कई दिनों से तेज धूप और शुष्क मौसम के बीच चली उत्तर-पश्चिमी तेज हवाओं ने मंगलवार को मेरठ सहित वेस्ट यूपी एवं उत्तर भारत के अनेक हिस्सों में सुबह की फिजा बदल दी। 10 मार्च की सुबह आसमान में सर्दियों जैसी धुंध की चादर में लिपटी हुई आई। बाहरी हिस्सों में धुंध की चादर से द़ृश्यता 200 मीटर तक सिमट गई। लोगों ने इसे कोहरा समझते हुए मार्च महीने में अप्रत्याशित घटना बताया। हालांकि उत्तर भारत में धुंध की इस चादर के पीछे बलूचिस्तान, मध्य पाकिस्तान और थार रेगिस्तान की धूल रही। इन क्षेत्रों से तेज उत्तर-पश्चिमी हवाओं के साथ वायु मंडल के ऊपरी हिस्से में धूल पहुंची। मौसमी स्थितियों के चलते मंगलवार को यह धुंध में बदल गई।
निजी एजेंसी स्काईमेट वेदर के अनुसार धूल की इस चादर से दिल्ली सहित अनेक हिस्सों में दृश्यता कम हो गई। अधिकांश हिस्सों में धूल दिखाई दी। स्काईमेट वेदर के अनुसार इसके पीछे मुख्य कारण पांच से सात मार्च तक चली उत्तर-पश्चिमी तेज हवाएं थी। ये हवाएं थार मरुस्थल, मध्य पाकिस्तान और बलूचिस्तान की धूल दिल्ली सहित आसपास के हिस्सों तक लेकर आईं। इसी बीच बीते 48 घंटों में हवा की गति बेहद कम हो गई। इससे यह धूल वातावरण में बैठ गई।
हालांकि कुल लोगों द्वारा इस धूल के पीछे ईरान के रिफाइनरी में लगी आग और इसे धुएं के उत्तर भारत में पहुंचने के दावों से स्काईमेट वेदर ने इनकार किया है। स्काईमेट वेदर के अनुसार यह सत्य नहीं है। हवा की जो स्थिति है वह ईरान से उठ रहे धुएं को दिल्ली की ओर लाने के अनुकूल नहीं है। स्काईमेट वेदर के अनुसार दक्षिण-पश्चिम से हवाएं अत्यधिक ऊंचाई तक चलने से ईरान से धुआं चीन और रूस की ओर जा सकता है।
यह मौसम की सामान्य घटना
मेरठ कॉलेज के भूगोल विभाग से बतौर एचओडी सेवानिवृत्त एवं मौसम वैज्ञानिक डॉ. कंचन सिंह के अनसुार यह मौसम की सामान्य घटना है। सर्दी का सीजन खत्म होने और गर्मी की शुरुआत होने पर ऊपरी वातावरण में वायु राशियां धीरे-धीरे उत्तर की ओर आती हैं। इन वायु राशियों में जलवाष्प भी होती हैं। वर्तमान में धरती की सतह पर तापमान सामान्य से अधिक हैं जबकि ऊपरी वातावरण में अपेक्षाकृत तापमान बहुत कम।
इस स्थिति में वायु राशियों में मौजूद जलवाष्प और धूल कणों में संघनन (धीरे-धीरे जमने की प्रक्रिया) प्रक्रिया शुरू हो जाती है। डॉ. कंचन सिंह के अनुसार चूंकि ऊपर वायु ठंडी है और जल वाष्प कण एवं धूल संघनित होकर नीचे आने की कोशिश करते हैं, जबकि नीचे तापमान अधिक होने से वायु ऊपर उठती है। ऐसे में ऊपर से ठंडी हवा और नीचे से गर्म हवा के मिलने के स्थान पर ये धूल और जलवाष्प के कण फंस जाते हैं। यही कण धुंध के रूप में दिखाई दिए। डॉ. कंचन सिंह के अनुसार यह मौसम की सामान्य घटना है और सर्दी से गर्मी के सीजन की शिफ्ट होने पर यह स्थिति बनती है। अगले कुछ दिनों तक यह स्थिति बनी रह सकती है।
धुंध की चादर से प्रदूषण का ग्राफ बढ़ा, हवा खराब
धुंध की चादर से मंगलवार को मेरठ सहित आसपास के शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब हो गई। मेरठ का एक्यूआई 250 दर्ज जो खराब श्रेणी में है। मुजफ्फरनगर में एक्यूआई 253, बागपत में 264, बुलंदशहर में 193, गाजियाबाद में 329, ग्रेटर नोएडा में 340, हापुड़ में 252 और नोएडा में 288 दर्ज हुआ।
फिसल गया दिन-रात का पारा
मंगलवार को मेरठ में दिन-रात का तापमान क्रमश: 32.4 एवं 18.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ जो सामान्य से 5.7 डिग्री सेल्सियस अधिक है। सोमवार के सापेक्ष दिन में 2.2 एवं रात में 0.6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हुई। हवा की रफ्तार चार किमी प्रतिघंटा रही। उत्तर-पूर्वी हवा चलने से मेरठ में आद्रता का अधिकतम स्तर 98 फीसदी दर्ज हुआ। इससे दिन में उमस जैसी स्थिति बनी रही।




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