छोटे शहरों में विकास को मिलेगी रफ्तार, ग्रुप हाउसिंग के अब बन सकेंगे अपार्टमेंट
यूपी सरकार ने छोटे शहरों में ग्रुप हाउसिंग और बहुमंजिला इमारतों के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है। अब जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली 'जिला स्तरीय टाउन प्लानिंग कमेटी' 15 मीटर से ऊंचे भवनों और बड़े व्यावसायिक नक्शों को मंजूरी देगी। इससे छोटे जिलों में टाउनशिप विकास को बढ़ावा मिलेगा।

यूपी की योगी सरकार छोटे शहरों में ग्रुप हाउसिंग के फ्लैट बनाने की सुविधा देने जा रही है। इसके लिए छोटे जिलों में भी ग्रुप हाउसिंग के आवासीय और व्यावसायिक नक्शे पास किए जाएंगे। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में इसके लिए कमेटी बनाई जाएगी। इसका नाम होगा ‘जिला स्तरीय टाउन प्लानिंग कमेटी’। शहरी क्षेत्र में नक्शा पास करने में अधिशासी अधिकारी और ग्रामीण क्षेत्रों में अपर मुख्य अधिकारी बतौर सदस्य सचिव इसमें शामिल होंगे।
जिला स्तरीय टाउन प्लानिंग कमेटी 15 मीटर से अधिक ऊंचाई के भवनों, ग्रुप हाउसिंग, ले-आउट, विशेष प्रकृति के भवनों, 500 वर्ग मीटर से अधिक और 100 वर्ग मीटर से अधिक व्यावसायिक भवनों का नक्शा पास करने पर विचार करेगी। उच्च स्तर पर इसको लेकर सहमति बन गई है। आवास विभाग के नियंत्रणाधीन विनियमिति क्षेत्रों और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के नक्शों को भी ‘जिला स्तरीय टाउन प्लानिंग कमेटी’ के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उसकी अनुशंसा पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा नक्शा पास किया जाएगा।
टाउन प्लानिंग कमेटी में जिलाधिकारी अध्यक्ष होगा। यह कमेटी शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के लिए अलग-अलग होगी। शहरी में डीएम अध्यक्ष होगा। अपर जिलाधिकारी (एलबी) उपाध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी सदस्य सचिव, जिल नगर नियोजक, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, अग्निशमन अधिकारी और विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष का प्रतिनिधि सदस्य होगा। जिला पंचायत यानी ग्रामीण क्षेत्र के लिए डीएम अध्यक्ष, मुख्य विकास अधिकारी उपाध्यक्ष, जिला पंचायत का अपर मुख्य अधिकारी सदस्य सचिव होगा। इसके अलावा सभी सदस्य वही होंगे।
यूपी के बड़े शहरों में नक्शा पास करने को लेकर तो स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और आवास आयुक्त की अनुमति से नक्शे पास किए जाते हैं, लेकिन छोटे जिलों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नक्शा पास करने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। जिला पंचायतों से पास नक्शे को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। इसीलिए उच्च स्तर पर हुई बैठक में जिला स्तरीय टाउन प्लानिंग कमेटी बनाने पर सहमति बनी है। इसकी देखरेख में ही छोटे जिलों में भी नक्शा पास किया जाएगा, जिससे ग्रुप हाउसिंग या बड़ी टाउनशिप लाने वालों को किसी तरह की परेशानी न हो।
विकास को मिलेंगे नए पंख
इस फैसले से छोटे जिलों में टाउनशिप विकसित करने वाले बिल्डरों और निवेशकों को बड़ी राहत मिलेगी। अब उन्हें नक्शा पास कराने के लिए लखनऊ या बड़े मुख्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। विनियमित क्षेत्रों और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के नक्शों को भी इसी कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। इसकी अनुशंसा के बाद ही सक्षम प्राधिकारी अंतिम मुहर लगाएंगे। इससे न केवल छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को आधुनिक फ्लैट और सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।




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