up s epstein rambhavan was a swindler from the start a stash of sex toys was found from him classmate reveals secrets शुरू से खुराफाती था यूपी का एपस्टीन, पास से मिला था सेक्स ट्वॉय का भंडार; क्लासमेट ने खोले राज, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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शुरू से खुराफाती था यूपी का एपस्टीन, पास से मिला था सेक्स ट्वॉय का भंडार; क्लासमेट ने खोले राज

सीबीआई को रामभवन की गिरफ्तारी के दौरान बड़ी मात्रा में सेक्स ट्वॉय और खिलौने मिले थे। दुकानदारों से इसका बिल सहित सत्यापन भी कराया गया था। इन्हीं के माध्यम से वह मासूमों को अपने जाल में फंसाता था। उसे महंगे मोबाइल फोन और लैपटॉप का भी शौक था। इसमें बच्चों की अश्लील तस्वीरें और वीडियो मिले थे।

Sun, 22 Feb 2026 09:12 PMAjay Singh कार्यालय संवाददाता, बांदा
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शुरू से खुराफाती था यूपी का एपस्टीन, पास से मिला था सेक्स ट्वॉय का भंडार; क्लासमेट ने खोले राज

यूपी के बांदा के नरैनी तहसील क्षेत्र के खरोंच गांव से निकलकर जेई बना रामभवन कॉलेज के दिनों से ही खुराफाती था। यही कारण है कि अपने काले कारनामों से इंटरनेशनल स्तर पर पहुंच बनाने वाला रामभवन दस साल तक बच्चों का यौन शोषण करता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी। इंटरपोल से मिली शिकायत के बाद सीबीआई ने 31 अक्टूबर 2020 को मामला दर्ज किया तो परतें खुलने लगीं। 20 फरवरी 2026 को फांसी की सजा होने के बाद वह सलाखों के पीछे है। गिरफ्तारी के वक्त रामभवन के पास सीबीआई को सेक्स ट्वॉय और खिलौनों का भंडार भी मिला था। शुक्रवार को उसे और उसकी पत्नी को अदालत ने उनके गुनाहों के लिए सजा ए मौत सुनाई है। रामभवन ने नरैनी कस्बे के एक विद्यालय से इंटर तक की पढ़ाई की। उसके साथ पढ़ने वाले एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रामभवन को गैजेट्स का शौक था।

पढ़ाई में वह होशियार भी था। यही वजह है कि वह अवर अभियंता बन गया। मगर वह शुरुआत से ही खुराफाती किस्म का था। वह गलत संगत में जा रहा था। उसकी एक दो बार शिकायत भी हुई थी। कभी सोचा तक नहीं था कि वह ऐसा कृत्य करेगा। वहीं उसके अन्य भाई राजा भइया और रामप्रकाश ज्यादा पढ़ लिख नहीं सके। दोनों नरैनी में सीमेंट की जाली और बड़े बर्तन आदि बनाने का कारोबार करते हैं और नरैनी में ही आबाद हैं। उनके गांव में अब कोई नहीं रहता है।

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सेक्स ट्वॉय और खिलौनों का मिला था भंडार

सीबीआई को रामभवन की गिरफ्तारी के दौरान बड़ी मात्रा में सेक्स ट्वॉय और खिलौने मिले थे। इसका दुकानदारों से बिल सहित सत्यापन भी कराया गया था। इन्हीं के माध्यम से वह मासूमों को अपने जाल में फंसाता था। रामभवन को महंगे मोबाइल फोन और लैपटॉप का भी शौक था। इसमें बच्चों की अश्लील तस्वीरें और वीडियो मिले थे। जिन्हें डिजिटल साक्ष्य के तौर पर कोर्ट में पेश किया गया था और वही उसके सजा का आधार बने।

सबसे पहले बेल्जियम की साइट पर देखा गया था वीडियो

जेई रामभवन द्वारा भेजा गया पोर्न वीडियो सबसे पहले बेल्जियम की एक साइट पर देखा गया था। इसी के बाद से सीबीआई टीम जांच पड़ताल करते हुए सोनभद्र पहुंची। वहां नीरज यादव को गिरफ्तार किया। उसी से मिले सुरागों के बाद अवर अभियंता रामभवन के कारनामों का पर्दाफाश हुआ और सीबीआई ने उसे गिरफ्तार कर लिया। रामभवन ने कबूला कि उसने 47 देशों तक पहुंच बनाकर पोर्न वीडियो बेचे थे।

अपने मामा के बेटे को दिया पैतृक आवास

रामभवन और उसके भाइयों ने खरौंच का अपना घर अपने मामा के बेटे देवीदीन को दे दिया है। अब यहां पर रामभवन के परिवार का कोई भी परिजन नहीं रहता है। रविवार को गांव पहुंचकर उनसे बात करने की कोशित की गई तो उनका कहना था कि आप लोगों को सब पता है। हमें कुछ नहीं कहना है।

रामभवन के शिकार बच्चों को योजनाओं से लाभान्वित करने की तैयारी

जेई रामभवन को कोर्ट से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अब पीड़ित बच्चों को योजनाओं का लाभ देने की कवायद शुरू हो गई है। निदेशालय स्तर से मौखिक निर्देश मिलने के साथ ही प्रोबेशन विभाग ने इसकी तैयारी भी शुरु कर दिया है। जल्द ही पीड़ित बच्चों की मौजूदा जानकारी लेकर मुकदमे में दर्ज धाराओं के आधार पर सरकार की योजनाओं से लाभान्वित किया जाएगा।

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जेई रामभवन ने मुख्यालय कर्वी में रहने के दौरान चित्रकूट के अलावा बांदा और हमीरपुर के बच्चों को यौन शोषण का शिकार बनाया है। फैसला आने के बाद पीड़ित बच्चों को योजनाओं का लाभ देने की कवायद शुरू कर दी गई है। निदेशालय स्तर से पीड़ित बच्चों की मौजूदा स्थिति की जानकारी मांगी गई है। प्रोबेशन विभाग के अधिकारियों की मानें तो फैसले का अवलोकन करते हुए उसमें अंकित धाराओं के आधार पर बच्चों को जिन योजनाओं का लाभ मिल सकता है, उसकी प्रक्रिया की जाएगी। फिलहाल अभी बच्चों की पूरी जानकारी एकत्र की जा रही है। घटना के बाद बच्चों में प्रभाव, वह कहां पढ़ रहे हैं और उनकी स्थिति क्या है, आदि बिंदुओं पर जानकारी एकत्र कर निदेशालय को अवगत कराया जाएगा। जांच के बाद स्पांसरशिप के तहत बच्चों को लाभ दिया जा सकता है। जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रगति गुप्ता का कहना है कि तैयारी चल रही है। लिखित में निर्देश मिलते ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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