अजय राय की क्रिमिनल हिस्ट्री सार्वजनिक होगी? बीजेपी एमएलसी धर्मेंद्र राय ने सरकार से कर दी बड़ी मांग
पीएम मोदी पर अजय राय द्वारा की अमर्यादित टिप्पणी से नाराज भाजपा एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह राय ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बनारस के रहने वाले बीजेपी एमएलसी ने अजय राय को 'पुराना अपराधी' बताते हुए योगी सरकार से उनके सभी आपराधिक रिकॉर्ड्स (क्रिमिनल हिस्ट्री) को जनता के सामने लाने की मांग की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस के यूपी अध्यक्ष अजय राय की अमर्यादित टिप्पणी पर वाराणसी की राजनीति में भारी उबाल आ गया है। बनारस के ही रहने वाले अजय राय के खिलाफ बनारस के ही भाजपा एमएलसी धर्मेंद्र सिंह राय ने मोर्चा खोल दिया है। अजय राय की टिप्पणी पर गहरी नाराजगी और आक्रोश जताया है। उन्होंने अजय राय के राजनीतिक वजूद पर हमला बोलते हुए उन्हें एक पुराना अपराधी करार दिया है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि अजय राय के अब तक के सभी आपराधिक रिकॉर्ड (क्रिमिनल हिस्ट्री) को जनता के सामने सार्वजनिक किया जाए।
अजय राय नेता नहीं, पुराने अपराधी हैं
एमएलसी धर्मेंद्र सिंह ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अजय राय कोई असली राजनेता नहीं हैं, बल्कि वह एक पुराने अपराधी हैं। उन्हें अपने कारनामों की वजह से कई बार जेल की हवा खानी पड़ी है। उनके ऊपर लगे आरोप भी कोई मामूली नहीं, बल्कि जघन्य और गंभीर हैं। उन्होंने सीएम योगी से मांग की कि उनके असली चेहरे को बेनकाब किया जाए और जनता को बताया जाए कि किस तरह एक अपराधी राजनीति में घुसकर लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार कर रहे हैं और गंदगी फैला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिस तरह एक गंदी मछली पूरे तालाब को खराब कर देती है, ठीक उसी तरह अजय राय बनारस की पावन और सुसंस्कृत राजनीति को चौपट कर रहे हैं। जब ऐसे लोग खुद को नेता बताते हैं, तो एक बनारसी होने के नाते भारी ग्लानी महसूस होती है।
बनारस की परंपरा और संस्कारों का दिया हवाला
बीजेपी एमएलसी ने काशी की समृद्ध वैचारिक विरासत को याद करते हुए महान नेताओं का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, "इसी बनारस की धरती ने राजनारायण जैसे महान नेता दिए, जिन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक की राजनीति को पलट कर रख दिया था। कल्पनाथ राय जैसे पूर्वांचल के कद्दावर नेता हुए, जिन्हें आज भी लोग 'विकास पुरुष' के नाम से याद करते हैं। स्वामी सहजानंद सरस्वती की महान परंपरा पर आगे बढ़ने वाले कई भूमिहार नेता इस मिट्टी में पैदा हुए, जो वैचारिक सहमति और असहमति का सम्मान करना जानते थे। विरोधी होने के बावजूद पंडित कमलापति त्रिपाठी और राजनारायण जी हमेशा एक-दूसरे के प्रति आदर भाव रखते थे और सार्वजनिक जीवन में पैर छूकर आशीर्वाद लेते थे।"
धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जो भाषा अजय राय ने इस्तेमाल की है, वह पूरी तरह से असहनीय और अक्षम्य है। बनारस, काशी नरेश और 'हर-हर महादेव' के उद्घोष का शहर है, जहां पीएम मोदी ने नेतृत्व देकर पूरी दुनिया में काशी का मान-सम्मान बढ़ाया है। बाबा विश्वनाथ की नगरी में माथे पर चंदन-टीका लगाकर इस तरह देश के प्रधानमंत्री को गालियां देना बनारस के संस्कारों और यहां के भूमिहार समाज की संस्कृति के बिल्कुल खिलाफ है।
सपा के कारण मिले वोट, तुष्टिकरण का घमंड
एमएलसी ने अजय राय को चुनाव में मिले वोटों पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी दलों की तुष्टिकरण की राजनीति के कारण आज कोई भी भाजपा के खिलाफ खड़ा होता है, तो विपक्ष का तीन-चार लाख थोक वोट बैंक उसे मिल जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अजय राय इतने ही बड़े नेता हैं, तो इससे पहले के चुनावों में वे इन वोटों को हासिल क्यों नहीं कर सके थे? वे हमेशा 70 हजार वोटों के आसपास ही सिमट कर रह जाते थे।
2024 में समाजवादी पार्टी के गठबंधन और तुष्टिकरण के चलते उन्हें कुछ लाख वोट अतिरिक्त क्या मिल गए, उन्हें इसका घमंड हो गया है। इस तरह का अहंकार स्वस्थ लोकतंत्र और बनारस की मर्यादा के लिए बेहद घातक है। उन्होंने समाज के सभी बुद्धिजीवियों और बनारस की जनता से आह्वान किया कि वे राजनीतिक स्तर को गिराने वाली इस असत्य और अमर्यादित भाषा की चौतरफा घोर निंदा करें।
अजय राय पर केस भी दर्ज, बताया एआई का वीडियो
महोबा में पीएम मोदी पर की गई टिप्पणी के बाद अजय राय के खिलाफ केस भी दर्ज कर लिया गया है। महोबा में अजय राय के साथ ही बिना अनुमति के कार्यक्रम करने और अजय राय को बुलाने के मामले में निवर्तमान प्रदेश सचिव बृजराज अहिरवार और 30 अज्ञात समर्थकों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। ये दोनों ही केस अधिवक्ता नीरज रावत की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने दर्ज किए। वहीं, एफआईआर दर्ज होते ही अजय राय अपने बचाव में उतर आए हैं। उन्होंने अपने वीडियो को एआई जनरेटेड बताया है।




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