यूपी पुलिस का साइबर अपराध पर बड़ा हमला, म्यूल खातों से करोड़ों ठगने वाले गैंग के 9 सदस्य गिरफ्तार
गोंडा के SP विनीत जायसवाल ने बताया कि साइबर सेल, कोतवाली नगर की टीम संदिग्ध बैंक खातों और साइबर ठगी से संबंधित ट्रांजेक्शनों का लगातार तकनीकी विश्लेषण कर रही थी। जांच में ऐसे कई बैंक खातों की जानकारी मिली, जिनमें विभिन्न राज्यों से साइबर ठगी की धनराशि ट्रांसफर की जा रही थी।

UP News : यूपी पुलिस ने गोंडा में साइबर सेल की मदद से म्यूल खातों से करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह के नौ शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 347 पासबुक, 177 एटीएम किट, 22 आधार कार्ड, 10 मोबाइल, नौ पैनकार्ड, दौ स्टैम्प, एक वोटर आईडी, दो चेकबुक, तीन सिम, तीन बाइक और 20,290 रुपये नकद बरामद किया है। पुलिस ने लगभग 14 करोड़ 87 लाख छह हजार रूपए विभिन्न खातों में फ्रीज भी कराए हैं। एसपी ने खुलासा करने वाली टीम को 25 हजार रुपए नकद पुरस्कार देने की भी घोषणा की है।
गोंडा के एसपी विनीत जायसवाल ने बताया कि साइबर सेल, कोतवाली नगर की टीम संदिग्ध बैंक खातों और साइबर ठगी से संबंधित ट्रांजेक्शनों का लगातार तकनीकी विश्लेषण कर रही थी। जांच के दौरान ऐसे कई बैंक खातों की जानकारी मिली, जिनमें विभिन्न राज्यों से साइबर ठगी की धनराशि ट्रांसफर की जा रही थी। साइबर सेल टीम ने प्राप्त मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, आईपी डिटेल्स व डिजिटल ट्रांजेक्शनों का गहन विश्लेषण करते हुए गिरोह के सक्रिय सदस्यों की पहचान की। इसके बाद पुलिस टीमों का गठन कर संदिग्ध व्यक्तियों की निगरानी की गयी। मुखबिर खास की सूचना एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर दबिश देकर नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
सरकारी योजनाओं का लालच देकर ले लेते थे डिटेल
पुलिस ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे लोग भोले-भाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, बैंक खाता खुलवाने तथा अन्य प्रकार के प्रलोभन देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक एवं मोबाइल नम्बर ले लेते थे। वहीं कई व्यक्तियों के आधार कार्ड एवं पैन कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से बैंक खाते भी खुलवाए जाते थे। इन बैंक खातों का प्रयोग ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन ट्रेडिंग एवं अन्य साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि के लेन-देन एवं निकासी के लिए किया जाता था। साइबर फ्रॉड से मिली धनराशि को विभिन्न माध्यमों से निकालकर आपस में बांट लिया जाता था। इसमें हर सदस्य को लगभग 40 से 60 प्रतिशत तक कमीशन मिलता था। वे विभिन्न जनपदों से बैंक खाते एवं संबंधित दस्तावेज एकत्र कर अपने अन्य साथियों को उपलब्ध कराते थे, जिनका उपयोग साइबर अपराध को अंजाम देने में किया जाता था।
46 खाते संदिग्ध, 212 शिकायतें
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से प्राप्त मोबाइल फोन की जांच के दौरान विभिन्न बैंक खातों का विवरण, नेट बैंकिंग आईडी, पासवर्ड एवं आपसी चौटिंग मिली है। पूछताछ एवं तकनीकी जांच के दौरान कुल 46 बैंक खाते प्रकाश में आए, जिनमें से विभिन्न बैंकों के 17 खातों के विरुद्ध एनसीआरपी पोर्टल पर कुल 212 शिकायतें दर्ज पाई गईं। लगभग चौदह करोड़ सत्तासी लाख छह हजार आठ सौ उनासी रुपये की धनराशि विभिन्न बैंक खातों में होल्ड कराई गई है। यह शिकायतें दिल्ली, उड़ीसा, हरियाणा, बिहार, उत्तराखण्ड, झारखण्ड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश से संबंधित हैं।
पुलिस के हत्थे चढ़े ये नौ आरोपी
अमन सिंह पुत्र सुरेश सिंह निवासी बघमरवा किंधौरा थाना तरबगंज, कुलदीप वर्मा पुत्र रामकेवल वर्मा निवासी लौव्वा वीरपुर थाना नवाबगंज, रोहित सिंह पुत्र शिवनाथ सिंह निवासी नायबपुरवा पसका थाना परसपुर, सूरज कुमार सिंह पुत्र अरविन्द कुमार सिंह निवासी भंभुवा चंगेरिया थाना करनैलगंज, मोहित सिंह पुत्र रामशंकर सिंह निवासी भदवा सोमवंशी थाना कोतवाली देहात, रंजीत कुमार पुत्र ओमप्रकाश निवासी छावनी सरकार जेल रोड, आलोक गुप्ता पुत्र अजय गुप्ता निवासी पंतनगर थाना कोतवाली नगर, आरिफ पुत्र अनीश अहमद निवासी जाजमऊ थाना जाजमऊ कानपुर नगर और समीर पुत्र सलीम निवासी किदवई नगर थाना बाबूपुरवा जनपद कानपुर नगर शामिल हैं।
इनको मिली सफलता : निरीक्षक संजय कुमार गुप्ता प्रभारी साइबर सेल, अतिरिक्त निरीक्षक सभाजीत सिंह, दरोगा उदित वर्मा, आरक्षी हरिओम टण्डन, अमित गौड़, मनीष कुशवाहा, राजेन्द्र कुमार,आलोक सविता, शिवम मिश्रा, पंकज कुमार, अभय सिंह, नैमिष कुमार शामिल हैं।




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