यूपी पंचायत चुनाव: 36 जिलों की पंचायतों में डुप्लीकेट वोटर की जांच की प्रक्रिया पूरी
UP Panchayat elections: यूपी के 36 जिलों की पंचायतों में डुप्लीकेट वोटर की जांच की प्रक्रिया पूर्ण हो गई है। हालांकि शेष 39 जिलों में 48.71 लाख डुप्लीकेट वोटर के सत्यापन का कार्य नहीं हो सका है

UP Panchayat elections: त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनाव में इस बार एसआईआर की छाया दिखेगी। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मेरठ, बुलंदशहर, बागपत, कानपुर, गाजियाबाद समेत 36 जिलों की पंचायतों में डुप्लीकेट वोटर की जांच की प्रक्रिया पूर्ण हो गई है। हालांकि शेष 39 जिलों में 48.71 लाख डुप्लीकेट वोटर के सत्यापन का कार्य नहीं हो सका है। हालांकि 75 जिलों की जांच में 9.07 लाख डुप्लीकेट वोटर का नाम हटाया जा चुका है।
मेरठ समेत प्रदेश के 75 जिलों की पंचायतों में 21 अप्रैल से डुप्लीकेट वोटर के सत्यापन का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। 28 मई तक डुप्लीकेट वोटर के सत्यापन का कार्य होना था। राज्य निर्वाचन आयोग ने कई स्तरों पर ऐसे वोटर के सत्यापन की प्रक्रिया कराई। आयोग की अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार अब तक कुल 75 जिलों से 9.07 लाख से अधिक डुप्लीकेट वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं।
इस पूरी कवायद के तहत लगभग 4 करोड़ 68 लाख 59 हजार 97 डुप्लीकेट वोटरों का सत्यापन किया जा रहा है। 39 जिलों में अभी भी 48.71 लाख डुप्लीकेट वोटरों का सत्यापन होना बाकी है, जिसे जल्द पूरा किए जाने का लक्ष्य है। वैसे चार करोड़ 19 लाख 87 हजार 248 डुप्लीकेट वोटर का सत्यापन हो चुका। अब दस जून को वोटर लिस्ट का फाइनल प्रकाशन होना है।
मेरठ में 5.21 लाख डुप्लीकेट वोटर की हुई जांच
आयोग की रिपोर्ट के अनुसार मेरठ जिले की 479 ग्राम पंचायतों में कुल पांच लाख 21 हजार 755 डुप्लीकेट वोटर की जांच हुई, जिसमें से पांच लाख 12 हजार 276 वैध वोटर पाए गए। नौ हजार 479 डुप्लीकेट वोटर का नाम सत्यापित न होने पर वोटर लिस्ट से नाम हटा दिया है।
आपको बता दें कि हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में याचिका डाली गई है। इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पंचायत चुनावों के संबंध में पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पेश करने का आदेश राज्य सरकार को दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग से भी संभावित चुनाव कार्यक्रम की स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ व न्यायमूर्ति एके चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने स्थानीय अधिवक्ता ओम प्रकाश प्रजापति की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका पर पारित किया है। याचिका में ग्राम प्रधानों केा प्रशासक नियुक्त करने संबधी राज्य सरकार के 25 मई के आदेश को चुनौती दी गई है। कहा गया है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 के तहत प्रधानों का कार्यकाल उनके शपथ लेने के पश्चात से सिर्फ पांच वर्ष का ही हो सकता है। सरकार ने समय पर पंचायत चुनाव न करा के मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया।




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