up panchayat chunav allahabad high court sought a response from government asked when will elections be held बढ़ाया नहीं जा सकता पंचायतों का कार्यकाल, यूपी में कब होंगे चुनाव? हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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बढ़ाया नहीं जा सकता पंचायतों का कार्यकाल, यूपी में कब होंगे चुनाव? हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की शक्तियों के टकराव पर भी पुरानी मिसालों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि चुनाव की तारीखें तय करने और पूरी प्रक्रिया के अधीक्षण और नियंत्रण का अधिकार संवैधानिक रूप से राज्य निर्वाचन आयोग के पास है।

Tue, 17 March 2026 09:35 PMAjay Singh विधि संवाददाता, प्रयागराज
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बढ़ाया नहीं जा सकता पंचायतों का कार्यकाल, यूपी में कब होंगे चुनाव? हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

UP Panchayat Chunav : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने को लेकर दाखिल एक याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने इम्तियाज हुसैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 ई के तहत पंचायतों का कार्यकाल उनकी पहली बैठक से पांच वर्ष की अवधि के लिए होता है और इसे उससे अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता।

याची का कहना था कि उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों की पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी, जिसके अनुसार इनका पांच साल का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। यह भी कहा गया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीखों में कई बार संशोधन किया है। पहले यह प्रक्रिया दिसंबर 2025 में पूरी होनी थी, जिसे बढ़ाकर मार्च 2026 और अब नवीनतम अधिसूचना के माध्यम से 15 अप्रैल 2026 कर दिया गया है। याची का कहना था कि मतदाता सूची के फाइनल होने के बाद निर्वाचन क्षेत्रों के आरक्षण की प्रक्रिया में भी काफी समय लगेगा, जिससे चुनाव समय पर संपन्न होने में बाधा आ सकती है। इसी तरह की स्थिति पहले भी 'विनोद उपाध्याय' मामले में उत्पन्न हुई थी जब चुनाव समय पर न होने के कारण प्रशासकों की नियुक्ति करनी पड़ी थी।

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कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की शक्तियों के टकराव पर भी पुरानी मिसालों का हवाला दिया। प्रेम लाल पटेल मामले के निर्णय का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि चुनाव की तारीखें तय करने और पूरी प्रक्रिया के अधीक्षण व नियंत्रण का अधिकार संवैधानिक रूप से राज्य निर्वाचन आयोग के पास है। अदालत ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि क्या पूर्व में घोषित किए गए कुछ संशोधनों की संवैधानिक स्थिति अब भी प्रभावी है।

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कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह बताना होगा कि क्या 15 अप्रैल तक मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद 26 मई 2026 तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराना संभव है। कोर्ट ने अपेक्षा की है कि अगली सुनवाई की तारीख 25 मार्च 2026 तक चुनाव का पूरा विस्तृत कार्यक्रम रिकॉर्ड पर लाया जाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने महाधिवक्ता या अपर महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है।

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