यूपी के ढाई लाख शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, योगी सरकार ने 25 लाख की ग्रेच्युटी
उत्तर प्रदेश के इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता मूल वेतन का 50 प्रतिशत हो जाने पर ग्रेच्युटी/उपादान की धनराशि 20 लाख रुपये से बढ़ाकर अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये तक कर दी गई है। सरकार ने सोमवार 16 मार्च को इससे संबंधित शासनादेश जारी कर दिया है।

UP News: योगी आदित्यनाथ सरकार ने एडेड माध्यमिक स्टूलों के शिक्षकों व कर्मियों के ग्रेस्यूटी की राशि 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी है। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने 24 फरवरी के अंक में ‘माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक-कर्मियों को 25 लाख ग्रेच्यूटी’ देने की तैयारी की खबर छापी थी। सरकार ने सोमवार 16 मार्च को इससे संबंधित शासनादेश जारी कर दिया है। इससे करीब ढाई लाख शिक्षकों-कर्मचारियों को लाभ होगा।
शासनादेश में कहा गया है कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता मूल वेतन का 50 प्रतिशत हो जाने पर ग्रेच्युटी/उपादान की धनराशि 20 लाख रुपये से बढ़ाकर अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये तक कर दी गई है। यह भी कहा गया है कि वेतन समिति उत्तर प्रदेश 2016 की संस्तुतियों को स्वीकार किए जाने के फलस्वरूप अशासकीय सहायता माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों/कर्मचारियों के पेंशन/उपादान/पारिवारिक पेंशन आदि के प्राविधानों में संशोधन किया गया है।
सात मई 2017 के शासनादेश के प्रस्तर-5 में यह व्यवस्था दी गई है कि ग्रेच्युटी/मृत्यु ग्रेच्युटी की अधिकतम धनराशि की सीमा 20 लाख से अनधिक होगी। शासन द्वारा विचार के बाद उपर्युक्त शासनादेश के क्रम में अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों को भी महंगाई भत्ता मूल वेतन का 50 प्रतिशत हो जाने पर ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये किये जाने की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
दो वर्ष पूर्व राज्यकर्मियों को प्रदान की गई थी यह सुविधा
वर्तमान में इन शिक्षकों एवं कर्मियों की ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा राशि 20 लाख निर्धारित है। दो वर्ष पूर्व दो जुलाई 2024 को राज्य कर्मियों की अधिकतम ग्रेच्युटी की सीमा वृद्धि 25 लाख की गई थी। पिछले साल भर से शिक्षकों की ग्रेच्यूटी को राज्यकर्मियों के बराबर करने की लगातार मांग की जा रही थी। दूसरी तरफ विधान परिषद के बीते सत्र में भी इस मुद्दे को शिक्षक एवं निर्दल समूह के नेताओं ने उठाया था, जिसके जवाब में सरकार की तरफ से वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया था कि इससे संबंधित पत्रावली माध्यमिक शिक्षा विभाग में ही प्रक्रियाधीन है। जैसे ही वित्त विभाग में उसका प्राथमिकता निस्तारण कर अन्तिम निर्णय ले लिया जाएगा।




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