ओटीपी से बचेगी जान, यूपी में लाइनमैन को खतरे में डाले बिना यूं ठीक होंगे बिजली के फॉल्ट
एक सब स्टेशन में लगे सभी फीडरों में एक मास्टर डिवाइस होती है, जिसमें सिम लगा होता है और उसके वाईफाई के माध्यम से बाकी फीडरों की डिवाइस कनेक्ट होती है। इसके संचालन के लिए ब्रेकर गार्ड एप बनाया गया है। एक फीडर पर अधिकतम 5 लाइनमैन अलग-अलग जगह शटडाउन ले सकते हैं।

UP Electricity News: बिजली के फॉल्ट बनाते समय गलत शटडाउन की वजह से होने वाली लाइनमैनों की मौत को रोकने के लिए बनाई गई ब्रेकर गार्ड डिवाइस के उत्तर प्रदेश के 50 फीडरों के ट्रायल में सफल नतीजे आए हैं। इसके तहत शटडाउन लेने वाले अंतिम लाइनमैन के ओटीपी बताने के बाद ही शटडाउन वापस होगा। केस्को के विकास नगर सबस्टेशन के पांच फीडरों में पिछले साल जून से अगस्त तक ट्रायल सफल हुआ था। इसके बाद यूपीपीसीएल ने प्रदेश में करंट की चपेट में आकर जान गंवाने वाले कर्मचारियों की घटनाओं वाले इलाकों में इसका ट्रायल कराया। ट्रायल में इस बात पर भी जोर दिया कि गांव में मोबाइल नेटवर्क की समस्या से अगर सबस्टेशन से लाइनमैनों के मोबाइल पर ओटीपी नहीं आता है तो बाईपास की व्यवस्था होनी चाहिए। अभी इस एक डिवाइस की कीमत करीब 10 हजार रुपये है लेकिन बल्क में उद्योगों को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होने पर कीमत पांच से छह हजार रुपये हो सकती है।
ऐसे लाइनमैनों की जान बचाएगी यह सेफ्टी डिवाइस
केस्को के विकासनगर केसा कॉलोनी सबस्टेशन के सभी पांचों फीडरों में इस ब्रेकर गार्ड डिवाइस का सफल ट्रायल हुआ था। एक सबस्टेशन में लगे सभी फीडरों में एक मास्टर डिवाइस होती है, जिसमें सिम लगा होता है और उसके वाईफाई के माध्यम से बाकी फीडरों की डिवाइस कनेक्ट होती है। इसके संचालन के लिए ब्रेकर गार्ड एप बनाया गया है। एक फीडर पर अधिकतम पांच लाइनमैन अलग-अलग जगह फॉल्ट बनाने के लिए शटडाउन ले सकते हैं। सभी के पास अलग-अलग ओटीपी जाएगा। जब तक उस फीडर के अंतिम लाइनमैन के मोबाइल पर गया ओटीपी नहीं बताया जाएगा, तब तक शटडाउन वापस नहीं हो सकेगा और फीडर चालू नहीं होगा। चाहे सबस्टेशन में मौजूद एसएसओ बाकी चार लाइनमैनों के ओटीपी डिवाइस में डाल भी दें, तो भी फीडर ऑन नहीं होगा। कहीं आग लगने या इमरजेंसी में शटडाउन लिया जाएगा तो ओटीपी की जरूरत नहीं होगी। जो भी बाईपास कर फीडर को चालू करेगा, उसकी पूरी डिटेल, कॉल लॉग भी एप पर ऑनलाइन प्रदर्शित होगी।
आईआईटी टीम ने तैयार की डिवाइस
प्रदेशभर में कई लाइनमैनों की मौतें गलत शटडाउन देने और वापसी में होती हैं। तमाम व्यवस्थाओं के बावजूद कोई अचूक व्यवस्था नहीं थी। यूपीपीसीएल ने केस्को एमडी के माध्यम से आईआईटी कानपुर को इस समस्या को बताया। इस पर आईआईटी के प्रोफेसर अंकुश शर्मा के निर्देशन में शोध छात्र ऋतिक राजपूत, मनीष कुमार गुप्ता और प्रतीक शर्मा ने ब्रेकर गार्ड डिवाइस को तैयार किया है। आईआईटी ने इसका पेटेंट करा लिया है। अब यह तकनीक उद्योगों को ट्रांसफर की जाएगी।
क्या बोले अधिकारी
केस्को के एमडी सैमुअल पॉल एन ने बताया कि केस्को में ब्रेकर गार्ड डिवाइस के सफल ट्रायल के बाद यूपी के 50 फीडरों में हुए ट्रायल के नतीजे अच्छे आए हैं। यूपीपीसीएल चेयरमैन ने इसमें कुछ बदलाव के निर्देश दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या से ओटीपी के आने जाने में देरी होने पर उसके विकल्प पर काम हो रहा है। इस तकनीक से गलत शटडाउन से लाइनमैनों को करंट लगने वाली घटनाएं रुक जाएंगी।




साइन इन