UP: IAS रिंकू सिंह राही का इस्तीफा, वकीलों के सामने उठक-बैठक के बाद से राजस्व परिषद में थे अटैच
शाहजहांपुर में एसडीएम रहने के दौरान वकीलों के सामने उठक-बैठक करने का आईएएस रिंकू सिंह राही का वीडियो वायरल हुआ था। उस घटना के बाद से रिंकू सिंह को जुलाई 2025 से राजस्व परिषद में अटैच कर दिया गया था। अब उन्होंने सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने खुद को साइडलाइन किए जाने का आरोप लगाया है।

उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया है। रिंकू सिंह राही पिछले साल यानी 2025 में तब अचानक से सुर्खियों में आ गए थे जब शाहजहांपुर में एसडीएम रहने के दौरान वकीलों के सामने उठक-बैठक करने का उनका वीडियो वायरल हुआ था। उस घटना के बाद से रिंकू सिंह को जुलाई 2025 से राजस्व परिषद में अटैच कर दिया गया था। रिंकू सिंह का पूरा कैरियर उतार-चढ़ाव और चर्चित कहानियों से भरा पड़ा है। साल-2009 में मुजफ्फरनगर में 100 करोड़ के घोटाले का खुलासा करने के बाद 7 गोलियां लगने के बावजूद वे जिंदा बच गए थे।
मीडिया रिपेार्ट्स के मुताबिक 2022 बैच के यूपी कैडर के आईएएस रिंकू सिंह राही ने यह कहते हुए इस्तीफा दिया है कि उन्हें लंबे समय से न तो पोस्टिंग दी जा रही थी और न ही कोई काम सौंपा जा रहा था। उन्होंने लिखा कि वे संबद्ध हैं, लेकिन उन्हें जनसेवा का मौका नहीं दिया गया। SDM रहते हुए कार्रवाई के बाद उन्हें साइडलाइन कर दिया गया। हालांकि उन्हें वेतन मिलता रहा, लेकिन काम करने और जनसेवा के अवसर से वंचित रखा गया। उन्होंने इसे नैतिक निर्णय बताते हुए इस्तीफा दिया।
2009 में हुआ था जानलेवा हमला
रिंकू सिंह राही की प्रोफेशनल पृष्ठभूमि काफी उल्लेखनीय रही है। 2009 में उन्होंने एक बड़े घोटाले को उजागर किया था, जिसके बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ था। राही पर सात गोलियां चलाई गईं थीं। इसके बाद भी वह बच गए थे। शाहजहांपुर में वकीलों के एक प्रदर्शन के दौरान उनका उठक बैठक का वीडियो वायरल होने के बाद सरकार ने उन्हें अटैच कर दिया था, लेकिन उसके बाद उन्हें कोई नई पोस्टिंग नहीं दी गई।
क्या हुआ था शाहजहांपुर में ?
आईएएस रिंकू सिंह राही को 24 जुलाई 2025 को शाहजहांपुर में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर तैनाती दी गई थी। उन्हें शाहजहांपुर के पुवायां तहसील में एसडीएम के पद पर नियुक्त किया गया था। चार्ज लेने के बाद रिंकू सिंह राही तहसील परिसर का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने चार लोगों को खुले में पेशाब करते देख लिया। उन्होंने मौके पर ही चारों को उठक-बैठक लगाने का निर्देश दे दिया। जब पता चला कि उनमें से एक व्यक्ति अधिवक्ता का मुंशी है तो वकील भड़क गए। उन्होंने धरना शुरू कर दिया। वकीलों ने इसे अपमानजनक करार देते हुए विरोध तेज कर दिया। माहौल बिगड़ता देख एसडीएम रिंकू सिंह राही खुद धरना स्थल पर पहुंचे और कहा कि खुले में पेशाब करना गलत है। चाहे कोई भी हो। इसी वाद-विवाद के बीच किसी तंज पर रिंकू सिंह राही ने वकीलों के सामने खुद कान पकड़कर उठक-बैठक लगानी शुरू कर दी। एक मुंशी ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी देकर उसे चुप करा दिया। इसके बाद उन्होंने दोबारा उठक-बैठक लगाई। यह देख बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने उन्हें रोका और माहौल शांत करने का प्रयास किया। विवाद बढ़ता देख एडीएम मौके पर पहुंचे और वकीलों से धरना समाप्त करने की अपील की।
सोशल मीडिया में एसडीएम का उठक-बैठक वाला वीडियो वायरल होने के बाद इस पर तरह-तरह के मीम्स बनने लगे। कटाक्ष और प्रतिक्रियाओं के बीच बात शासन तक पहुंची तो इस मामले में ऐक्शन लिया गया। रिंकू सिंह राही को एसडीएम के पद से हटाकर राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया।




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