खाड़ी देशों में युद्ध से घट गई हज पर जाने वालों की संख्या, 22 अप्रैल को होगी शुरुआत
इस बार मध्य पूर्व की जंग के चलते प्रयागराज से जाने वाले हज यात्रियों की संख्या कम हो गयी है। हालांकि सऊदी सरकार की ओर से युद्ध को लेकर किसी तरह का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक हज, सऊदी अरब में मक्का की एक पवित्र तीर्थयात्रा है, जिसे मुसलमान अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार करने की ख्वाहिश रखते हैं। जिसका उद्देश्य अल्लाह के प्रति समर्पण, गुनाहों से माफी और आत्मशुद्धि हासिल करना है। लेकिन इस बार मध्य पूर्व की जंग के चलते प्रयागराज से जाने वाले हज यात्रियों की संख्या कम हो गयी है। हालांकि सऊदी सरकार की ओर से युद्ध को लेकर किसी तरह का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
इस बार हज जाने के लिए 325 लोगों ने पंजीकरण कराया था लेकिन 290 लोगों का चयन किया गया। जबकि वर्ष 2025 में 350 और 2024 में 400 लोग हज यात्रा पर गए थे। खुद्दामे हज कमेटी के हाजी मोइन अहमद खान के अनुसार, हज यात्रा के लिए पहली फ्लाइट 22 अप्रैल को लखनऊ से उड़ान भरेगी। अंतिम फ्लाइट चार मई को जाएगी। हज यात्रियों की सुविधा के लिए 15 अप्रैल का शाम सात बजे नूरुल्लाह रोड स्थित पालकी गेस्ट में आखिरी प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा।
हाजी मोइन ने बताया कि प्रत्येक हज यात्रा के लिए प्रत्येक यात्री को 3.52 लाख जमा किए गए हैं। इसमें किराया और ठहरने का इंतजाम रहेगा बल्कि भोजन का व्यवस्था यात्री का स्वयं करना होगा। पिछले साल यात्रियों को किराये के मद में 3.39 लाख रुपये जमा करने पड़े थे। हज यात्रा के लिए सभी प्रशासनिक कार्य सितंबर में पूरे कर लिए गए थे। प्रशिक्षण के दौरान बताए गए नियमों का गंभीरता से पालन करना होगा, जिससे यात्रा सुगम और सुरक्षित हो।
आपबीती: खाड़ी देशों में हमले के संदेश से उड़ जाती है रातों की नींद
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के बीच खाड़ी देशों में रहने वालो में तनाव, खौफ बढ़ता जा रहा है। वहां सरकार की ओर से मोबाइल पर एक संदेश आता है और यहां खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के परिजनों की नींद उड़ जाती है। सऊदी अरब के दम्माम में नौकरी कर रहे इरफान फारूकी ने बताया कि अपने जीवन में इतना खौफ कभी नहीं देखा। पहले लगता था कि युद्ध जल्द समाप्त हो जाएगा। अब एक ही सवाल परेशान करता है कि युद्ध आखिर कब समाप्त होगा। कब तक मिसाइलों से हमले होते रहेंगे। इरफान ने बताया कि सोमवार तक हमले के खौफ से वर्क फ्रॉम होम था।
मंगलवार से कार्यालय खोले गए हैं। रात में बाहर निकलने पर मनाही है। इरफान के मुताबिक, रात में सरकार की तरफ से अलर्ट जारी किया जाता है। इस तरह का संदेश मिलने की जानकारी होने पर प्रयागराज में परिवार के सदस्य भी परेशान होते हैं। इरफान बताते हैं कि उनकी तरह सऊदी अरब में रहने वाले अन्य सभी लोग भी परेशान है। इस समय विमान का किराया इतना अधिक है कि लौटने के बारे में सोचते ही नहीं। सऊदी अरब के रियाद में सबसे अधिक दहशत है। सरकार का एक अलर्ट जारी होने के बाद रियाद के कई शहरों के लोग आपात स्थिति में सामान बांधकर भागने के लिए भी तैयार हैं।
प्रयागराज के सलमान हाशमी के एक रिश्तेदार रियाद में रहते हैं। सलमान ने बताया कि रियाद में उनके रिश्तेदार व अन्य लोग किसी भी समय घर छोड़ने को तैयार हैं। पिछले दिनों वहां की सरकार ने जरूरत के सामान के साथ घर भागने को तैयार रहने का संदेश दिया गया है। इसी प्रकार कतर के रस लफ्फान में भी लोग डरे हैं। सलमान कहते हैं कि उनके भाई नदीम हाशमी रस लफ्फान में हैं। यहां परिवार के लोग कतर समेत खाड़ी के सभी देशों में सलामती और युद्ध समाप्त होने की दुआ कर रहे हैं।




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