जंग के बीच साइबर अटैक डेढ़ गुना बढ़े, चीन-रूस से सबसे ज्यादा हमले, IIT रिपोर्ट में खुलासा
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के दौरान साइबर हैकरों ने भी अपने हमले तेज कर दिए हैं। हर मिनट दो से ज्यादा साइबर अटैक हो रहे हैं। ये हमले चीन, रूस के आईपी एड्रेस से किए जा रहे हैं। यह खुलासा आईआईटी कानपुर ने किया है।

UP News: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के दौरान साइबर हैकरों ने भी अपने हमले तेज कर दिए हैं। हर मिनट दो से ज्यादा साइबर अटैक हो रहे हैं। ये हमले चीन, रूस, जापान, सेशेल्स और रोमानिया के आईपी एड्रेस से किए जा रहे हैं। चीन से हर तीसरे मिनट तो रूस से हर चौथे मिनट पर एक साइबर अटैक हो रहा है। यह खुलासा आईआईटी कानपुर में स्थित सी-3आई हब की रिपोर्ट में हुआ है। हब में लगे हनीपॉट पर पिछले एक महीने के दौरान हुए साइबर हमलों के विश्लेषण से यह तथ्य सामने आए हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि युद्ध के दौरान साइबर अटैक लगभग डेढ़ गुना बढ़ गए हैं। एक महीने में 60 से 70 हजार साइबर अटैक हो रहे हैं। युद्ध से पहले यह आंकड़ा 45 से 50 हजार का था। आईआईटी कानपुर के सी-3आई हब में लगे हनीपॉट पर अटैक कर हैकर भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय व्यवस्था, तकनीकी उपकरण, पॉवर स्टेशन, रिफाइनरी सिस्टम समेत अन्य जरूरी जानकारी में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। सी3आई हब के चीफ स्ट्रेटजी ऑफिसर आनंद हांडा ने बताया कि पिछले एक माह के दौरान सर्वाधिक 17095 साइबर हमले चीन के आईपी से हुए हैं। दूसरे नंबर पर रूसी आईपी से 14634 हमले किए गए हैं। इसी तरह जापानी आईपी से 13015, सेशेल्स से 9734 और रोमानिया से 3756 साइबर हमले किए गए हैं।
कई अन्य देश जैसे अमेरिका, वियतनाम, कंबोडिया आदि से भी साइबर हमले हुए हैं लेकिन इनकी संख्या कम है। चीफ स्ट्रेटजी ऑफिसर के मुताबिक डिजिटल युग में सबसे बड़ा खतरा साइबर वार का है। इससे निपटने के लिए आईआईटी कानपुर में स्थापित सी3आई हब में वैज्ञानिक व स्टार्टअप्स की टीम अनुसंधान व नवाचार कर नई तकनीक, टूल व उत्पाद विकसित कर रही है। वहीं, दुश्मन और हैकर्स की ताकत और कमजोरी को समझने के लिए यह हनीपॉट तैयार किया है। इसे अत्यधिक महत्वपूर्ण समझ हैकर्स तेजी से आकर्षित होते हैं और अटैक करते हैं।
क्या है हनीपॉट
हनीपॉट एक नेटवर्क सिस्टम है, जो यूनिवर्सल डोमेन वेबसाइट क्लाउड पर तैयार किया जाता है। इसे इतना आकर्षक बनाते हैं कि हैकर उसमें घुसने को आतुर हो जाते हैं। इस पर क्लिक करते ही सिग्नल इसे ट्रैप कर लेता है। इसमें क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रमुख रूप से दिखाया जाता है। करीब छह साल पहले संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. संदीप शुक्ला की देखरेख में विशेषज्ञों ने इसे तैयार किया था।
चकमा देने के लिए खूबसूरत द्वीप सेशेल्स से कर रहे हमला
एक्सपर्ट आनंद हांडा ने बताया कि पिछले वर्षों चीन और रूस के आईपी एड्रेस से लगातार साइबर अटैक होते रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका, वियतनाम, नीदरलैंड की आईपी से भी काफी हमले होते थे। अब हैकर्स चकमा देने के लिए खूबसूरत द्वीप सेशेल्स के आईपी का इस्तेमाल कर रहे हैं। हैकर्स खुद को छिपाए रखने के लिए दूसरे देश का आईपी प्रयोग करते हैं। इससे यह कहना मुश्किल होता है कि ये सभी हमले संबंधित देश से ही हुए हैं।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि सी-3आई हब में हनीपॉट की मदद से हैकर्स की ट्रैपिंग की जाती है, जिससे पता लगाया जा सके कि किन-किन आईपी से लगातार हैकिंग के प्रयास हो रहे हैं। मध्य पूर्व में जंग के बीच साइबर अटैक तेजी से बढ़े हैं।




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