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यूपी में कॉन्वेंट को टक्कर देंगे सरकारी स्कूल, करोड़ों खर्च कर यह काम करने जा रही योगी सरकार

यूपी सरकार कॉन्वेंट स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों में सुविधाओं को लगातार बढ़ा रही है। अब कॉन्वेंट की तरह सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए वार्षिकोत्सव का आयोजन होगा और बच्चे सम्मानित किए जाएंगे।

Wed, 11 March 2026 08:12 AMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
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यूपी में कॉन्वेंट को टक्कर देंगे सरकारी स्कूल, करोड़ों खर्च कर यह काम करने जा रही योगी सरकार

Up News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब सरकारी स्कूलों (प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल) को कॉन्वेंट और निजी स्कूलों से टक्कर देने की एक और तैयारी कर रही है। कॉन्वेंट स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों में भी वार्षिक उत्सव जैसा आयोजन होगा और बच्चों को प्रोत्साहन के साथ ही सम्मान दिया जाएगा। कॉन्वेंट स्कूलों में आयोजित होने वाले 'एनुअल प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन' (वार्षिक पुरस्कार वितरण) की तर्ज पर राज्य के 232 से अधिक नामांकन वाले हर सरकारी स्कूल में भव्य पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित होंगे। इसके लिए सरकार ने 5 करोड़ 7 लाख की धनराशि स्वीकृत की है। इसके साथ ही निजी और कॉन्वेंट स्कूलों की तरह पेरेंट-टीचर मीटिंग भी होगी।

कॉन्वेंट की तर्ज पर 'प्रतिभा का सम्मान'

अक्सर देखा जाता है कि कॉन्वेंट स्कूलों में बच्चों की छोटी से छोटी उपलब्धि पर उन्हें ट्रॉफी, सर्टिफिकेट और गिफ्ट देकर प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे उनमें आगे बढ़ने की ललक पैदा होती है। अब यही आधुनिक संस्कृति यूपी के सरकारी स्कूलों में भी दिखाई देगी। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के नेतृत्व में महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने सभी जिलों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।

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क्या मिलेगा पुरस्कार में: बच्चों को उनकी मेहनत के बदले ट्रॉफी, शील्ड, स्कूल बैग, पानी की बोतल और बेहतरीन स्टेशनरी (पेंसिल, रंग, ड्राइंग नोटबुक) के साथ-साथ प्रेरक पुस्तकें दी जाएंगी। यह पुरस्कार केवल कक्षा में प्रथम आने वाले बच्चों के लिए नहीं है। इसमें खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, कला और सबसे महत्वपूर्ण '100% उपस्थिति' (नियमित आने वाले) वाले बच्चों को भी 'स्टार छात्र' के रूप में सम्मानित किया जाएगा।

अभिभावकों का मान: कॉन्वेंट जैसा कम्युनिटी जुड़ाव

निजी और कॉन्वेंट स्कूलों की तरह अब सरकारी स्कूलों में भी 'पेरेंट-टीचर सहभागिता' को मजबूत किया जाएगा। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल बच्चों को ही नहीं, बल्कि उनके अभिभावकों को भी मंच पर बुलाया जाएगा।

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सरकारी स्कूलों के उन अभिभावकों को 'शॉल', 'स्मृति चिन्ह' या 'पौधा' देकर सम्मानित किया जाएगा, जो अपने बच्चों की पढ़ाई के प्रति जागरूक हैं और उन्हें नियमित स्कूल भेजते हैं। इसके अलावा, विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के सक्रिय सदस्यों को भी सम्मानित किया जाएगा। इससे विद्यालय और समुदाय के बीच एक मजबूत रिश्ता बनेगा, जो अब तक केवल महंगे निजी स्कूलों में देखा जाता था।

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हीन भावना का होगा अंत

महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) मोनिका रानी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों के भीतर से उस हीन भावना को खत्म करना है कि सम्मान और बड़े आयोजन केवल कॉन्वेंट स्कूलों तक सीमित हैं। जब एक गरीब परिवार का बच्चा मंच पर अपनी ट्रॉफी उठाएगा, तो उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाएगा। यह सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का माहौल न केवल बच्चों की उपस्थिति बढ़ाएगा, बल्कि पढ़ाई के स्तर में भी सुधार लाएगा। सरकार का यह कदम परिषदीय विद्यालयों की छवि बदलने और उन्हें 'स्मार्ट' बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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