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लखनऊ नगर आयुक्त दफ्तर की कुर्की करने पहुंची पुलिस टीम, अफसरों से तीखी नोकझोंक

लखनऊ के लालबाग स्थित नगर निगम मुख्यालय में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब सिविल कोर्ट के आदेश पर पुलिस और अमीन की टीम नगर आयुक्त कार्यालय की कुर्की करने पहुंच गई। मामला एक संस्था के 2.17 लाख रुपये के पुराने बकाये भुगतान से जुड़ा था।

Wed, 11 March 2026 06:33 AMYogesh Yadav हिन्दुस्तान, लखनऊ
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लखनऊ नगर आयुक्त दफ्तर की कुर्की करने पहुंची पुलिस टीम, अफसरों से तीखी नोकझोंक

Lucknow News: बकाये भुगतान के विवाद ने मंगलवार को लखनऊ नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। सिविल कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस और न्यायालय के अमीन की टीम लालबाग स्थित नगर आयुक्त कार्यालय की कुर्की करने पहुंच गई। अचानक हुई इस कार्रवाई से नगर निगम मुख्यालय में हड़कंप मच गया और करीब तीन घंटे तक अफसरों और कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक होती रही।

कुर्की की प्रक्रिया शुरू करने के लिए हजरतगंज पुलिस और कोर्ट के अमीन नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। उनके साथ वादी संस्था के वकील भी थे। अमीन ने कार्यालय का सामान बाहर निकालना शुरू किया तो कर्मियों ने विरोध किया। स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल भी आ गया। टीम ने पहले अफसरों से बातकर भुगतान के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी। नगर आयुक्त के कक्ष से टेबल, कुर्सियां, सोफा और इनवर्टर तक बाहर निकाल दिए गए। कर्मचारियों ने अफसरों को सूचना दी। अफसरों के हस्तक्षेप के बाद टीम कार्रवाई रोकी गई।

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कोर्ट ने सामान कुर्क करने के दिए निर्देश: सिविल कोर्ट के आदेश में 10 कंप्यूटर, 10 मेज, 50 कुर्सियां और 25 अलमारियां कुर्क करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही डिक्री धारक को कब्जा दिलाने के लिए पुलिस सुरक्षा भी उपलब्ध कराने को कहा गया था।

अपर नगर आयुक्त ने की नोटिस की अनदेखी

पूरे प्रकरण में प्रशासनिक लापरवाही भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कुर्की की सूचना एक दिन पहले संबंधित पुलिस चौकी ने अपर नगर आयुक्त ललित कुमार को दे दी थी, पर यह जानकारी समय पर नगर आयुक्त और विधि विभाग तक नहीं पहुंची। मामले में अपर नगर आयुक्त से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इन्हीं अपर नगर आयुक्त की वजह से एक महीने तक नगर निगम की लिफ्ट खराब पड़ी रही। इन्होंने काम में अड़ंगा लगा दिया था। जिससे महापौर से लेकर बुजुर्गों को भारी परेशानी हुई थी।

हस्तक्षेप से टली कार्रवाई

तीन घंटे चले हंगामे के बाद अफसरों के हस्तक्षेप व कोर्ट में आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करने की जानकारी देने पर टीम शाम को लौट गई। बाहर निकाला गया सामान फिर से नगर आयुक्त के कक्ष में रख दिया गया।

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2019 के विवाद से जुड़ा मामला

मेसर्स गंगा संस्थान व नगर निगम के अधीन डूडा के बीच पुराना विवाद है। संस्था के अधिवक्ता विवेक मिश्रा के अनुसार फर्म कैसरबाग क्षेत्र में शेल्टर होम चलाती थी। 2019 में नगर निगम ने संस्था का नवीनीकरण समाप्त कर दिया, बकाया भुगतान भी रोक दिया गया। संस्था कोर्ट पहुंची, जहां सुनवाई के बाद कोर्ट ने नगर निगम को 2.17 लाख रुपये के बकाये के साथ छह माह का ब्याज देने का आदेश दिया। भुगतान न होने पर कोर्ट ने निगम कार्यालय के सामान की कुर्की का आदेश जारी कर दिया।

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