UP farmers will now receive sugarcane slips based on GPS surveys; system is mandatory for the new crushing season UP में इस सर्वे के आधार पर अब किसानों को मिलेगी गन्ने की पर्ची, न पेराई सत्र के लिए व्यवस्था अनिवार्य, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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UP में इस सर्वे के आधार पर अब किसानों को मिलेगी गन्ने की पर्ची, नए पेराई सत्र के लिए व्यवस्था अनिवार्य

उत्तर प्रदेश में जीपीएस सर्वे के आधार पर ही अब किसानों को गन्ने की पर्ची द जाएगी। नए पेराई सत्र के लिए नई व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया गया है।  पूरे प्रदेश में जीपीएस सर्वेक्षण का कार्य करा रहा है जो 30 जून तक पूरा हो जाएगा।

Tue, 2 June 2026 06:41 PMDeep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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UP में इस सर्वे के आधार पर अब किसानों को मिलेगी गन्ने की पर्ची, नए पेराई सत्र के लिए व्यवस्था अनिवार्य

यूपी में जीपीएस सर्वे के आधार पर ही अब किसानों को गन्ने की पर्ची मिलेगी। नए पेराई सत्र के लिए जीपीएस आधारित सर्वे से तैयार पर्ची को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत जिन पंजीकृत गन्ना किसानों के खेत में बोए गए गन्ने की प्रजाति व उसकी बुआई से संबंधित जानकारियां समेत अन्य सूचनाएं उपलब्ध होंगी उन्हीं कृषकों को मिलों को गन्ने की आपूर्ति का लाभ मिलेगा। गन्ना विभाग पूरे प्रदेश में जीपीएस सर्वेक्षण का कार्य करा रहा है जो 30 जून तक पूरा हो जाएगा अब तक 42 प्रतिशत के आसपास सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो चुका है।

इसके पूरा होने के बाद चीनी मिलें गन्ना सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़े सीधे विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन पोर्ट करेंगी और अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगी। सर्वेक्षण के साथ गन्ना विभाग नए सदस्यों (किसानों) का पंजीकरण भी करा रहा है ताकि गन्ना किसानों को पेराई सत्र के दौरान चीनी मिलों के रहमो-करम पर न रहना पड़े।

गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग प्रदेश भर में गन्ने की फसल का जीपीएस सर्वेक्षण करा रहा है। इसके लिए सर्वे की सूचना 3 दिन पहले ही सभी रजिस्टर्ड गन्ना किसानों को मोबाइल एसएमएस के जरिए दी जा रही है। ताकि किसान तय समय पर अपनी खेत पर मौजूद रह सके। गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी होते हैं जो खेत पर पहुंचकर जीपीएस के जरिए उत्पादन का डाटा सीधे विभाग के सर्वर पर फीड करते हैं। वहीं सर्वेक्षण के बाद खेत का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म समेत अन्य जानकारियां भी किसानों को एसएमएस के माध्यम से दी जा रही है। राज्य सरकार ने गन्ना कृषक के सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग की वेबसाइट www.upbhulekh.gov.in से करने की भी सुविधा उपलब्ध कराई है।

सर्वेक्षण के दौरान होगा नए किसानों का पंजीकरण

विभाग के मुताबिक गन्ना सर्वेक्षण के दौरान नए सदस्यों (किसान) का पंजीकरण भी किया जाएगा। 30 सितम्बर 2026 तक पंजीकृत कृषकों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा। उपज बढ़ोत्तरी के लिए गन्ना सर्वेक्षण से लेकर 30 सितम्बर 2026 तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए अनुसूचित जाति व जनजाति के कृषकों, लघु कृषकों और अन्य कृषकों से क्रमशः 10, 100 एवं 200 रुपये प्रति कृषक शुल्क जमा कराया जाएगा।

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नई व्यवस्था से सभी पक्षों को होगा लाभ

जीपीएस सर्वेक्षण से यह पता लगाना आसान होगा कि किस किसान ने किस वेराइटी का गन्ना कितने क्षेत्र में बोया है। इससे चीनी मिलों को शुद्धता के गन्ने की आपूर्ति हो सकेगी। अगेती वेराइटी कितनी है और पछेती कितनी है इसका पता पहले ही चल जाएगा। इससे किसानों को भुगतान में आसानी होगी।

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