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इरान-अमेरिका युद्ध से यूपी का यूरोप से कारोबार लड़खड़ाया, दांव पर लगा तीन हजार करोड़

ईरान-इजराइल युद्ध और खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण उत्तर प्रदेश से यूरोप होने वाला निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कानपुर, आगरा और नोएडा के लेदर व गारमेंट सेक्टर के करीब 3,000 करोड़ के ऑर्डर फंसे हुए हैं। ढुलाई और बीमा खर्च बढ़ने से निर्यातकों को ऑर्डर रद्द होने और पेनल्टी का डर सता रहा है।

Fri, 6 March 2026 02:19 PMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान, आशीष दीक्षित कानपुर
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इरान-अमेरिका युद्ध से यूपी का यूरोप से कारोबार लड़खड़ाया, दांव पर लगा तीन हजार करोड़

कानपुर, नोएडा और आगरा के औद्योगिक इलाकों में फैक्ट्रियों की मशीनें चल तो रही हैं, लेकिन निर्यातकों के चेहरे पर अनिश्चितता साफ दिख रही है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने उत्तर प्रदेश के निर्यात कारोबार पर सीधा दबाव डाला है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग का असर अब यूरोपियन कारोबार तक पहुंच चुका है। खाड़ी मार्ग के रास्ते यूरोप के बाजारों तक जाने वाली करोड़ों की खेप बीच रास्ते में अटकी हैं। इस वजह से कानपुर, आगरा, मुरादाबाद, वाराणसी, नोएडा, गाजियाबाद समेत समूचे प्रदेश के लगभग तीन हजार करोड़ का कारोबार दांव पर है।

दुबई, यूएई, ओमान और कतर के रास्ते जर्मनी, फ्रांस, इटली और यूके समेत दो दर्जन यूरोपीय देशों को यूपी से लेदर, गारमेंट, इलेक्ट्रानिक, इंजीनियरिंग, हैंडीक्राफ्ट, केमिकल समेत कई उत्पादों की सप्लाई पर असर पड़ा है। कई कंटेनर ट्रांजिट पोर्ट पर रुके हुए हैं। शिपिंग लाइन ने जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है, जिससे ढुलाई दरों में अचानक उछाल आया है।

छोटे और मझोले निर्यातक सबसे अधिक संकट में

कानपुर की लेदर निर्यातक प्रेरणा वर्मा का कहना है कि जंग की वजह से खाड़ी देशों के रास्ते यूरोपियन देशों तक माल समय पर पहुंचाने में कठिनाई आ रही है। ऑर्डर समय से न पहुंचे तो यूरोपीय खरीदार पेनाल्टी लगाते हैं। इस बार देरी हमारी नहीं, हालात की वजह से है, फिर भी नुकसान हमें ही उठाना पड़ेगा। प्लास्टिक निर्यातक मनोज शुक्ला के अनुसार, छोटे और मझोले निर्यातकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कार्यशील पूंजी की है। यह स्थिति लंबी खिंची तो उत्पादन में कटौती करनी पड़ सकती है, जिससे रोजगार पर भी असर पड़ेगा।

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उद्यमियों ने मौजूदा स्थिति को माना चुनौतीपूर्ण

इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन (आईआईए) के पूर्व अध्यक्ष दिनेश बारसिया, काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (सीएलई) के रीजनल चेयरमैन असद इराकी ने इसे गंभीर स्थिति बताया है। यूरोप के साथ मजबूत बाजार होने के बावजूद लॉजिस्टिक अनिश्चितता पूरी सप्लाई चेन को झकझोर रही है। खाड़ी देशों के रास्ते यूरोपियन देशों के बाजार में माल भेजना मुश्किल होता जा रहा है। जंग ज्यादा दिन तक चली तो जर्मनी, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, इटली और स्पेन, स्वीडन जैसे मजबूत बाजारों में पैठ कमजोर पड़ सकती है।कारोबार के लिए हालात का सामान्य होना अति आवश्यक है।

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प्रदेश का निर्यात लक्ष्य भी भटकने का डर

निर्यात महासंघ के सहायक निदेशक एके श्रीवास्तव के अनुसार, जंग की वजह से कारोबारी गतिविधियां बिगड़ रही हैं। कानपुर समेत प्रदेश भसर के अलग-अलग सेक्टरों के लिए काफी झटका लग रहा है। यूरोपियन देशों में जाने वाले लगभग तीन हजार करोड़ के उत्पाद फंसे हैं। जल्द वैकल्पिक शिपिंग रूट और बीमा राहत नहीं मिली तो प्रदेश का निर्यात लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।

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