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यूपी भाजपा में बदलाव की हलचल तेज, प्रदेश संगठन के साथ सभी क्षेत्रीय अध्यक्ष बदलने की तैयारी

उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के संगठन में मिशन-2027 को ध्यान में रखते हुए बड़े बदलाव की तैयारी है। पार्टी नेतृत्व जल्द ही प्रदेश टीम के साथ सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदलने का ऐलान कर सकता है।

Fri, 6 March 2026 06:48 AMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ, विशेष संवाददाता
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यूपी भाजपा में बदलाव की हलचल तेज, प्रदेश संगठन के साथ सभी क्षेत्रीय अध्यक्ष बदलने की तैयारी

UP News: भारतीय जनता पार्टी के जिलों से लेकर क्षेत्र और प्रदेश संगठन में जल्द बड़ा बदलाव दिखेगा। एक ओर जिला इकाइयों के गठन की प्रक्रिया चल रही है तो दूसरी ओर सभी क्षेत्रीय अध्यक्ष भी बदलने की तैयारी है। प्रदेश के टीम के साथ ही क्षेत्रीय अध्यक्षों के बदलाव का भी ऐलान हो जाएगा। दरअसल, अधिकांश क्षेत्रीय अध्यक्षों के खिलाफ पार्टी नेतृत्व के पास गंभीर शिकायतें हैं। इसमें लेनदेन से लेकर चहेतों को बढ़ावा देने के लिए पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा सहित अन्य शिकायतें शामिल हैं।

भाजपा का संगठन प्रदेश में 1918 मंडलों, 98 संगठनात्मक जिलों और छह क्षेत्रों में बंटा है। जहां तक मंडल अध्यक्षों का सवाल है तो अब केवल 70-75 मंडल अध्यक्षों की घोषणा होना बाकी है जबकि 94 नये जिलाध्यक्ष घोषित किए जा चुके हैं। सिर्फ वाराणसी जिला, चंदौली, देवरिया और अंबेडकर नगर में नये जिलाध्यक्ष घोषित होने हैं। इसकी कवायद चल रही है। इधर, प्रदेश की सभी जिला इकाइयों के गठन के लिए पर्यवेक्षकों ने रायशुमारी कर ली है। सभी लोग अगले 48 घंटे में अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंप देंगे। उसके बाद क्षेत्रवार बैठकों का सिलसिला शुरू होगा।

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नई परिपाटी ने बढ़ाई मारामारी

अब बारी क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रदेश टीम की है। आगामी विधानसभा चुनावों की दृष्टि से जिलाध्यक्षों के साथ ही क्षेत्रीय अध्यक्षों की भूमिका भी बेहद अहम है। टिकट के दावेदारों के नाम भी जिलों से क्षेत्र के जरिए ही प्रदेश को भेजे जाते हैं। यूं भी बीते कुछ समय से पार्टी में क्षेत्रीय अध्यक्षों को विधान परिषद भेजे जाने की परिपाटी सी विकसित हो गई है। ऐसे में इस पद के लिए मारामारी भी कुछ अधिक ही हो गई है।

कुर्सी बचाने की कोशिश में जुटे अध्यक्ष

पार्टी सूत्रों की मानें तो लगभग सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदलने की तैयारी है। यूं तो शिकायतें अधिकांश के खिलाफ हैं लेकिन दो-तीन की चर्चाएं तो लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हैं। हालांकि लगभग सभी अब अपनी कुर्सी बचाने के प्रयासों में जी-जान से जुटे हैं। नेताओं की परिक्रमा के साथ ही संघ पदाधिकारियों से भी सिफारिशी फोन कराए जा रहे हैं। इससे इतर धार्मिक अनुष्ठान कराने और ज्योतिषियों से गृह दशा दिखवाने का सिलसिला भी चल रहा है।

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सामाजिक समीकरण पर जोर

सूत्रों का यह भी कहना है कि मिशन-2027 के चलते पार्टी का सामाजिक समीकरण साधने पर ज्यादा फोकस है। ऐसे में पिछली बार की तुलना में इस बार क्षेत्रवार जातीय गुणा-गणित भी बदलेगा। भाजपा आलाकमान का मुख्य जोर इस बार 'सोशल इंजीनियरिंग' पर है। आगामी विधानसभा चुनावों की चुनौतियों को देखते हुए पार्टी उन जातियों और वर्गों को क्षेत्रीय नेतृत्व में प्रतिनिधित्व देना चाहती है, जो पिछले कुछ चुनावों में छिटकते नजर आए हैं।

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