यूपी: दुष्कर्म के बाद नाबालिग भतीजे का कत्ल करने वाले चाचा को होगी फांसी; कोर्ट ने सुनाई सजा
22 फरवरी 2026 की शाम गांव में ही तिलक समारोह में डीजे और डांस देखने नाबालिग बच्चा गया हुआ था। पट्टीदारी का चाचा पिन्टू उर्फ कोयल उसे बहला-फुसला कर एकांत में ले गया। कुकर्म के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए बनियान से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। बखार के पास ले जाकर शव छुपा दिया और फरार हो गया।

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट दिनेश कुमार की अदालत ने कुकर्म के बाद बालक की हत्या किए जाने के मामले में आरोपी पट्टीदारी के चाचा को दोषी करार दिया है। उसे फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले को रेयर ऑफ रेयरेस्ट करार देते हुए आदेश दिया है कि अभियुक्त पिंटू उर्फ कोयल के गले में फांसी लगाकर फंदे पर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।
विशेष शासकीय अधिवक्ता (पॉक्सो एक्ट) सुनील मिश्रा व संजय तिवारी ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि जटहा बाजार थाने में इस आशय का अभियोग पंजीकृत कराया गया था कि वादिनी का 8 साल का बेटा 22 फरवरी 2026 को शाम सात बजे गांव में ही तिलक समारोह में डीजे और डांस देखने गया था। पट्टीदारी का चाचा पिन्टू उर्फ कोयल, भतीजा लगने वाले उस बच्चे को बहला-फुसला कर एकांत में ले गया। कुकर्म के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए बनियान से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। बखार के पास ले जाकर शव छुपा दिया और फरार हो गया। अगले दिन परिजन बालक की तलाश करते हुए बखार तक पहुंचे तो उसकी लाश मिली। घटना के बाद इलाके के लोगों में आक्रोश था।
पुलिस ने केस दर्ज करने के बाद जटहा बाजार थाना क्षेत्र स्थित हिरनही निवासी अभियुक्त पिंटू उर्फ कोयल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाकर अभियुक्त के खिलाफ कुकर्म, हत्या व साक्ष्य मिटाने के प्रयास आदि की धाराओं में चार्जशीट दाखिल कर दी। अभियोजन की ओर से 15 साक्षीगणों का परीक्षण कराया गया। अदालत ने समस्त अभिलेखों व मौखिक साक्ष्य के आधार पर अभियुक्त पिंटू उर्फ कोयल के द्वारा कारित अपराध को विरल से विरलतम श्रेणी का पाया। अभियुक्त को मृत्युदंड दिया।
समाज को स्तब्ध कर देती है घटना: अदालत
न्यायालय ने अपने निर्णय में टिप्पणी की है कि यह घटना न केवल न्यायिक चेतना को झकझोरती है, बल्कि मानवीय मूल्यों की थोड़ी सी भी समझ रखने वाले हर व्यक्ति को, विशेष रूप से रक्त संबंधियों और संपूर्ण समाज को स्तब्ध कर देती है। अदालत ने अपने निर्णय में विचारण सम्बन्धी समस्त कार्यवाही की मूल पत्रावली उच्च न्यायालय को दण्डादेश की पुष्टि हेतु अविलम्ब प्रेषित किए जाने का भी आदेश पारित किया है।




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