yogi government takes major action against violation of investment rules upeida cancels 4 industrial plots in updic यूपी में निवेश के नियमों के उल्लंघन पर योगी सरकार का बड़ा ऐक्शन, 4 औद्योगिक भूखंड निरस्त, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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यूपी में निवेश के नियमों के उल्लंघन पर योगी सरकार का बड़ा ऐक्शन, 4 औद्योगिक भूखंड निरस्त

कुछ मामलों में यह पाया गया कि आवंटन के काफी समय बीत जाने के बावजूद, संबंधित भूखंडों पर भौतिक प्रगति का स्तर संतोषजनक नहीं था। निर्धारित निवेश किए बिना ऐसे भूखंडों को लंबे समय तक रोके रखना मूल्यवान सार्वजनिक संसाधनों के अप्रभावी उपयोग का कारण बनता है। 

Wed, 25 March 2026 05:19 PMAjay Singh संवाददाता, लखनऊ
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यूपी में निवेश के नियमों के उल्लंघन पर योगी सरकार का बड़ा ऐक्शन, 4 औद्योगिक भूखंड निरस्त

उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए योगी सरकार ने ऐक्शन तेज कर दिया है। सरकार के सख्त रुख को देखते हुए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर (UPDIC) के विभिन्न नोड्स में आवंटित चार औद्योगिक भूखंडों को निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई उन आवंटियों के खिलाफ की गई है, जिन्होंने निर्धारित समयसीमा के भीतर निवेश और रोजगार सृजन से जुड़ी अपनी कार्यवाही को पूरा नहीं किया।

उत्तर प्रदेश सरकार की प्रमुख परियोजना UPDIC को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के तहत प्रदेश को स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत लखनऊ, कानपुर, झांसी, अलीगढ़, आगरा एवं चित्रकूट जैसे प्रमुख नोड्स में फैला यह कॉरिडोर बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने, उन्नत रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने तथा व्यापक रोजगार सृजन के उद्देश्य से स्थापित किया जा रहा है।

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UPDIC के अंतर्गत निवेशकों को सब्सिडी दरों पर पूर्व-विकसित औद्योगिक भूमि ‘रेडी-टू-मूव’ आधारभूत संरचना के साथ उपलब्ध कराई जाती है। इसकी खासियत प्लग-एंड-प्ले सुविधा से साइट विकास में लगने वाला समय कम होता है, वहीं नोड्स का रणनीतिक चयन बाजार एवं लॉजिस्टिक्स तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करता है, जिससे परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन में सहायता मिलती है।

हालांकि, कुछ मामलों में यह पाया गया कि आवंटन के काफी समय बीत जाने के बावजूद, संबंधित भूखंडों पर भौतिक प्रगति का स्तर संतोषजनक नहीं था, जिससे संबंधित क्षेत्र के समग्र विकास और अपेक्षित रोजगार सृजन प्रभावित हो रहा था। निर्धारित निवेश किए बिना ऐसे भूखंडों को लंबे समय तक रोके रखना न केवल मूल्यवान सार्वजनिक संसाधनों के अप्रभावी उपयोग का कारण बनता है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में राष्ट्रीय उद्देश्यों को भी प्रभावित करता है। इस प्रकार की देरी रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की दिशा में प्रगति को बाधित करती है, जिससे क्षमता निर्माण, आपूर्ति श्रृंखला विकास और रोजगार सृजन की प्रक्रिया धीमी पड़ती है।

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इसी क्रम में UPEIDA ने अपने नियमों से संबंधित दायित्वों के अंतर्गत, आवंटित भूखंडों की अनुपालन स्थिति की व्यापक समीक्षा की और लगातार लापरवाही और ग़ैर जिम्मेदाराना तरीके से काम करने वाले आवंटियों को चिन्हित किया गया। इसके पश्चात मामले पर प्राधिकरण के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल दंडात्मक नहीं है, बल्कि भूमि संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग को सुनिश्चित करने और कॉरिडोर के अंतर्गत विकसित किए जा रहे औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

प्राधिकरण द्वारा रद्द की गई इकाईयों में, पहले स्थान पर नाम आता है, मेसर्स कुंगार्मर प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2021 में कानपुर नोड में रक्षा वस्त्र निर्माण हेतु भूमि आवंटित की गई थी। हालांकि, कंपनी द्वारा कई किस्तों एवं वार्षिक लीज़ किराए का भुगतान नहीं किया गया तथा लीज़ निष्पादन के लगभग पाँच वर्ष बाद भी भवन मानचित्र प्राधिकरण के सम्मुख प्रस्तुत नहीं किया गया। वर्ष 2021 से लगातार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद, कंपनी ने निर्देशों का पालन नहीं किया।

इसी प्रकार दूसरा स्थान है मेसर्स पी2 लॉजिटेक प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2021 में अलीगढ़ नोड में ऑप्टिकल साइट्स के निर्माण के लिए आवंटित भूखंड को किस्तों के भुगतान में लापरवाही और प्रस्तावित परियोजना के क्रियान्वयन में विफलता के कारण निरस्त कर दिया गया। वसूली नोटिस जारी किए जाने और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिए जाने के बावजूद, कंपनी ने न तो बकाया राशि का निपटान किया और न ही स्थल पर निर्माण कार्य प्रारंभ किया।

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ऐसे ही एक अन्य मामले में, मेसर्स ट्रैक्ट्रिक्स ऑप्टो डायनेमिक्स एलएलपी को वर्ष 2021 में अलीगढ़ नोड में प्रिसिजन एवं ऑप्टिकल उपकरणों के निर्माण हेतु भूखंड आवंटित किया गया था, किंतु कंपनी ने आवश्यक भवन मानचित्र प्रस्तुत नहीं किया और लंबे समय तक कोई निर्माण कार्य भी प्रारंभ नहीं किया। वर्ष 2023 से 2025 के बीच प्राधिकरण द्वारा कारण बताओ नोटिस सहित कई अनुस्मारक जारी किए गए, लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर या अनुपालन प्राप्त नहीं होने के कारण इनका आवंटन भी निरस्त किया गया । इसी के साथ ही चौथे मामले में यूपीडा द्वारा मेसर्स मिलकोर डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2021 में अलीगढ़ नोड में ग्रेनेड लॉन्चर निर्माण हेतु आवंटित भूखंड को भी निरस्त कर दिया गया। बार-बार पत्राचार और सुनवाई के अवसर प्रदान किए जाने के बावजूद, कंपनी बकाया किस्तों का भुगतान करने में विफल रही तथा लीज़ की शर्तों के अनुरूप परियोजना विकास कार्य पूर्ण नहीं कर सकी।

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गौरतलब है कि यहां, यहां चारों ही कंपनियों को आवंटन की निर्धारित नियमों शर्तों के अनुरूप इन्हें कई बार सुधार हेतु पर्याप्त अवसर दिए गए, परंतु किसी प्रकार की प्रगति न होने के फलस्वरूप विधिवत प्रक्रिया का पालन करते हुए इनके आवंटन निरस्त किए गए हैं। गैर-अनुपालन करने वाली इकाइयों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के साथ ही प्राधिकरण प्रमाणिक निवेशकों को निरंतर सहयोग प्रदान करने और निर्धारित नियमों के सख्त अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। आवंटन की शर्तों से किसी भी प्रकार का विचलन समयबद्ध विकास और प्रदेश सरकार के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के व्यापक प्रयास के उद्देश्य को भी प्रभावित करता है और ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, जैसा कि UPEIDA द्वारा उपरोक्त चारों मामलों में स्पष्ट किया गया।

इस प्रकार कार्रवाई के द्वारा UPEIDA ने उदासीन निवेशकों को एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है कि नियमों और समयसीमा का पालन अनिवार्य है तथा इसमें कोई समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही, उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर के अंतर्गत विकसित हो रहे रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में जवाबदेही को पूर्णतया केंद्र में रखा जाएगा।

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