पूछताछ में फंसी पुच एआई पेपर नहीं दिखा पाई, यूपी सरकार ने निवेश का एमओयू रद्द कर दिया
कंपनी ने सोमवार को प्रदेश में एआई पार्क की स्थापना के लिए 25 हजार करोड़ रुपये निवेश का एमओयू किया था। कंपनी की हैसियत को लेकर तरह-तरह के सवाल उठने लगे। इसके बाद इसके एमओयू को निरस्त कर दिया गया।

UP Government News: पुच एआई कंपनी की हैसियत व अनुभव को लेकर उठे सवालों के बाद यूपी सरकार ने सख्त एक्शन लिया। इन्वेस्ट यूपी ने पुच एआई कंपनी के साथ किए गए एमओयू को गुरुवार को निरस्त कर दिया है। कंपनी ने सोमवार को प्रदेश में एआई पार्क की स्थापना के लिए 25 हजार करोड़ रुपये निवेश का एमओयू किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एमओयू पर सवाल उठने पर इसे गंभीरता से लिया था और अगले ही दिन मंगलवार को स्पष्ट किया था कि शर्तों को पूरा न करने पर एमओयू निरस्त होगा।
इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरन आनन्द का कहना है कि कंपनी को डीपीआर, बिजनेस प्लान समेत अन्य डाक्यूमेंट देने थे पर कोई दस्तावेज नहीं दिया गया। इस पर एमओयू रद कर दिया गया। दरअसल, पुच एआई से हुए एमओयू को लेकर इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। सोशल मीडिया पर कंपनी की माली हालत केवल 49 लाख रुपये के आसपास होने का हवाला देकर उसके साथ हुए 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को हवा-हवाई करार दिया गया था। कंपनी की हैसियत को पहले न परखने के लिए करार की प्रक्रिया में शामिल रहे इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों की कार्यशैली व मंशा को लेकर भी तीखी टिप्पणियां सामने आई थीं।
सीएम योगी ने लिया संज्ञान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकरण को बेहद गंभीरता से लिया था। उन्होंने मंगलवार को अपने एक्स अकाउंट पर कहा था कि शर्तों को पूरा न करने वाले किसी भी संभावित निवेशक का समझौता ज्ञापन स्वतः ही रद्द कर दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश पारदर्शी, जिम्मेदार और भविष्योन्मुखी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। यह भी स्पष्ट किया था कि इन्वेस्ट यूपी द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन विस्तृत जांच-पड़ताल और परियोजना मूल्यांकन से पहले का प्रारंभिक कदम है। पुच एआई के साथ हुआ एमओयू इन्वेस्ट यूपी द्वारा एआई क्षेत्र में संभावनाओं का पता लगाने की प्रक्रिया की शुरुआत है। एमओयू राज्य सरकार पर बाध्यकारी नहीं हैं। वहीं विवाद उठने के दिन मंगलवार को इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरन आनन्द ने कहा था कि कंपनी से प्रक्रिया के तहत डीपीआर, बिजनेस प्लान समेत अन्य विवरण मांगे गए हैं। दस्तावेजों के मूल्यांकन व जांच के बाद ही निवेश प्रस्तावों में आगे की प्रक्रिया अपनाई जाती है। अभी कोई अप्रूवल नहीं हुआ है।
सपा प्रमुख अखिलेश ने भी बोला था हमला
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मामले को लेकर सरकार को घेरा था। अखिलेश ने एक्स अकाउंट पर बुधवार को लिखा था कि एमओयू करने से पहले एआई से ही ‘पुच’ के बारे में पूछ लिया होता। कहा था कि ‘अपने आसपास के ऐसे फाइव परसेंटिया घूसखोर व खुदगर्ज लोगों लोगों से बचना चाहिए।
पहले भी उठे सवाल
यूपी सरकार द्वारा किए गए एमओयू पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। इससे पहले व्यूनाउ मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड से जुड़ा मामला सुर्खियों में आया था। कंपनी ने सभी 75 जिलों में 750 डाटा सेंटर स्थापित करने का करार किया था और इसके बाद कंपनी के शेयरों में उछाल आया था। बाद में ईडी ने कंपनी के निदेशक सुखविंदर सिंह व उसकी पत्नी को दिल्ली से एक घोटाले में पकड़ा गया था। वहीं सैन फ्रांसिस्को की एक अमेरिकी कंपनी से हुए एमओयू को लेकर भी विवाद हुआ था। तब सरकार ने स्पष्ट किया था कि एमओयू आस्टिन यूनिवर्सिटी से नहीं बल्कि आस्टिन कंसलटेंसी ग्रुप से हुआ है।




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