दो फीट जमीन की खातिर अपनों ने ही बुझा दिया घर का ‘चिराग’, चीखों में तब्दील हो गया रात का सन्नाटा
लखीमपुर खीरी में अपनों ने ही अपनों की जान ले ली। दो फीट जमीन के लालच में चाचाओं ने भतीजे की गला रेतकर हत्या कर दी। बचाने पहुंची मां को भी लहूलुहान कर दिया। घटना से गांव में कोहराम मचा है।

Lakhimpur Kheri News: यूपी के लखीमपुर खीरी में दो फीट जमीन की खातिर मासूम की हत्या से पूरा गांव दहल उठा। अपनों ने ही धारदार हथियार से गला रेतकर घर का चिराग बुझा दिया। हत्यारों ने मासूम की मां को भी नहीं छोड़ा, उसे भी लहूलुहान कर दिया। अपने माता-पिता की इकलौती संतान होने से अब महिला का वंश ही खत्म हो गया। जिसने भी इस निर्मम हत्या के बारे में सुना, उसका कलेजा दहल गया। रात को रवि की गला रेतकर हत्या करने के बाद शुक्रवार सुबह उसके घर सिर्फ चीखें, सिसकियां और खून के धब्बे बिखरे पड़े थे।
निघासन कोतवाली के तारानगर गांव में एक छप्पर के नीचे जिंदगी काटने वाली ज्ञानदेवी को अपनी इकलौती संतान आठ साल के बेटे रवि का ही सहारा था। उसी का मुंह देखकर वह अपनी जिंदगी काट रही थी। उसका पति रामप्रसाद मानसिक रूप से कमजोर होने की वजह से वहां से करीब दो सौ मीटर दूर बने आवास में रहता है। केवल पांच बीघे जमीन से चार भाइयों के परिवार पलने मुश्किल होने से सभी मेहनत-मजदूरी करके पेट भरते हैं। रवि के पिता चार भाई संतराम, रामप्रसाद, कुंजबिहारी और रामचंद्र हैं। रामप्रसाद भाइयों ने मंझला है। उसके दिमाग से कमजोर होने की वजह से उसकी पत्नी ज्ञानदेवी मजदूरी करके खर्च चलाती है। सभी भाई एक ही पुश्तैनी घर में रहते हैं। घर में जगह कम होने से ज्ञानदेवी अपने बेटे रवि के साथ घर के बाहर पड़े छप्पर के नीचे सोती थी।
दोनों घरों के बीच गली की जगह का था विवाद
ज्ञानदेवी और उसके जेठ व देवरों के पुश्तैनी के घर के पास उसके पति के खानदानी भाइयों सियाराम और हरेराम का घर है। उनके और रामप्रसाद आदि के घरों के बीच एक गली है। बताया जाता है कि करीब पंद्रह दिन पहले ज्ञानदेवी अपने घर की टटिया लगा रही थी। तभी उसका सियाराम आदि से काफी झगड़ा हुआ था। सियाराम और हरेराम उससे टटिया अपने घर की तरफ और बढ़ाकर लगाने का दबाव डाल रहे थे। ज्ञानदेवी कोलिया की जगह छोड़कर पुरानी जगह पर ही टटिया लगाने पर अड़ी रही। बताया जाता है कि दोनों ने उसे देख लेने और उसकी शाख खत्म कर देने की धमकी दी थी। गांव के भले लोगों ने दोनों को शांत करके उस समय मामले को किसी तरह शांत करवा दिया था लेकिन तब क्या पता था कि दोनों भाइयों ने अपने दिलों में कितना खतरनाक इरादा बना लिया था।
खौफनाक मंजर देखकर कांप गई रूह
गुरुवार रात रवि अपनी मां ज्ञानदेवी के साथ गहरी नींद में सोया था। ज्ञानदेवी का जेठ संतराम वहां से करीब बीस मीटर दूर दूसरे छप्पर के नीचे सो रहा था। कुंजबिहारी भी दूसरी जगह सोया था। घरवालों के मुताबिक रात के सन्नाटे में अचानक दो लोग साए की तरह ज्ञानदेवी की झोपड़ी में दाखिल हुए। ज्ञानदेवी कुछ समझ पाती, उससे पहले हमलावर सोते हुए रवि को दबोचकर धारदार हथियार से उसका गला रेतने लगे। तड़पते हुए बेटे की चीख सुनकर ज्ञानदेवी जाग गई। वह खौफनाक मंजर देख उसकी रूह कांप गई। उसने हमलावरों से अपने जिगर के टुकड़े को बचाने की हर संभव कोशिश की। हमलावरों ने उसे भी ताबड़तोड़ वार करके गंभीर रूप से घायल कर दिया। हालांकि वह अपने इकलौते बेटे को मौत के मुंह में जाने से नहीं बचा सकी। गंभीर रूप से घायल ज्ञानदेवी को सीएचसी से लखीमपुर जिला अस्पताल भेजा गया है। ज्ञानदेवी ने सियाराम और हरेराम पर बेटे की हत्या और खुद पर जानलेवा हमला करने की पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस ने दोनों नामजद आरापियों को हिरासत में ले लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है।




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