राम मंदिर से करोड़ों का चढ़ावा गायब होने के अखिलेश के दावे पर ट्रस्ट का जवाब; कोई गड़बड़ी नहीं, सपा मुखिया ने कसा तंज
अखिलेश यादव ने राम मंदिर चढ़ावे की रकम को लेकर ट्रस्ट के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 40 सेकंड की सफाई देने में घंटों लगना संदेह पैदा करता है। वहीं ट्रस्ट का दावा है कि ऑडिट जारी है और कोई अनियमितता सामने नहीं आई है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर एक गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई करोड़ों रुपये की रकम गायब हो गई है। उन्होंने यह बात अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कही। अखिलेश के इस आरोप को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खारिज करते हुए कहा कि अभी तक ऐसी कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या के महासचिव चंपत राय ने कहा कि तीर्थ क्षेत्र का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट होता है। इस कार्य में ट्रस्ट और एसबीआई के प्रतिनिधि शामिल रहते हैं। ऑडिट कार्य कई दिन तक चलता है। वही कार्य आजकल हो रहा है। अभी तक कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आई है।
40 सेकंड का स्पष्टीकरण देने में भी इतने घंटे लग गए- अखिलेश
जिस पर एक बार फिर सपा मु्खिया ने एक्स पर ट्वीट कर तंज कसा है। उन्होने कहा कि स्पष्टीकरण ही स्पष्ट नहीं है। लगता है ये इनके लिए हर हफ़्ते की साधारण बात है, और इतनी अधिक साधारण है कि ये इसे अब ‘उल्लेखनीय’ भी नहीं मानते हैं। ये भी स्पष्ट किया जाए कि 40 सेकंड का स्पष्टीकरण आने में इतने घंटे क्यों लगे और स्पष्टीकरण के नाम पर 1 मिनट बोलना भी भारी क्यों पड़ रहा है। प्रदेश सरकार की चुप्पी की तरह ये सफ़ाई भी संदिग्ध है। ऐसा लग रहा है जैसे स्पष्टीकरण के नाम पर शाब्दिक औपचारिकता निभाई जा रही है। संपूर्ण विश्व का सनातन समाज, इस बेहद कमज़ोर स्पष्टीकरण से और भी अधिक शंकित और आहत हुआ है।
सीसीटीवी की निगरानी में होती है गिनती
आपको बता दें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के एक पदाधिकारी ने बताया कि चढ़ावे की राशि की गिनती एसबीआई की अयोध्या शाखा द्वारा नियुक्त स्टाफ द्वारा की जाती है। यहां नोटों की गिनती के लिए मशीन लगी है। कैमरे की निगरानी में गिनती की जाती है। बताया कि पहले एक दिन में गिनती पूरी हो जाती थी और पूरी रकम बैंक में उसी दिन भेज दी जाती थी। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद परिस्थितियां बदलीं और चढ़ावा करोड़ों में पहुंच जाने से गिनती में समय लगने लगा। इस कारण गिनती की राशि को लेजर पर चढ़ाने के बाद लॉकर में रखवाया जाता है। यह लॉकर डबल लाक के हैं। इसमें एक चाबी बैंक अधिकारी लगाते हैं तो दूसरी ट्रस्ट के द्वारा नियुक्त प्रभारी लगाते हैं। दूसरे दिन पुनः उसी प्रक्रिया में लॅाकर को खोलकर गिनती की गई राशि को बैंक की शाखा में सुरक्षापूर्वक भेजा जाता है।




साइन इन