अखिलेश कहते रहे, हम जबाव थोड़े ही देते रहेंगे; राम मंदिर से करोड़ों रुपये गायब होने के सवाल पर भड़के पंकज चौधरी
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की करोड़ों रुपये की रकम गायब होने के अखिलेश यादव के आरोप पर सियासत तेज हो गई है। पंकज चौधरी ने इसे मंदिर विषय बताते हुए कहा कि हर बयान का जवाब देना जरूरी नहीं है।

UP News: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई करोड़ों रुपये की रकम गायब होने का आरोप लगाया। इसे लेकर जब भाजपा प्रदेश पंकज चौधरी से सवाल किया गया तो वह भड़क गए। बोले कि वह कहते रहे हम जवाब थोड़े ही देते रहेंगे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी रविवार को जालौन पहुंचे। यहां मीडिया ने उनसे पूछा कि अखिलेश यादव ने मंदिर से करोड़ों रुपये गायब होने का दावा किया है। इस पर उन्होंने कहा कि यह सरकार का विषय नहीं है। मंदिर प्रशासन इसका जवाब देगी। वहीं, पत्रकार ने कहा कि अखिलेश कह रहे हैं धनराशि गायब हो गई। यह सनातन पर चोट है तो इस पर सवाल पर बिफरते हुए पंकज चौधरी ने कहा, 'कहां पे, कौन कह रहा है गायब हो गई है। अखिलेश यादव कहते रहे, उनका हम जवाब थोड़ी ही देते रहेंगे।'
राम मंदिर का चढ़ावा गायब; अखिलेश का दावा
दरअसल, सपा चीफ अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है। ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है। न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है। सरकार की चुप्पी संदिग्ध है।'
चंपत राय के स्पष्टीकरण पर अखिलेश ने उठाए सवाल
जब तीर्थ ट्रस्ट ने इस दावे को खारिज किया तो अखिलेश यादव ने फिर से सवाल किया। उन्होंने कहा, 'स्पष्टीकरण ही स्पष्ट नहीं है। लगता है ये इनके लिए हर हफ़्ते की साधारण बात है, और इतनी अधिक साधारण है कि ये इसे अब उल्लेखनीय भी नहीं मानते हैं। चेहरे के भाव और देह की भाषा हताशा और निराशा से भरी है। ट्रस्ट के सभी सदस्यों को एक साथ बैठाकर स्पष्टीकरण दिया जाए और आंकडों के मिलान के लिए सीसीटीवी के साक्ष्य का सहारा लिया जाए। जैसे ही सारे ट्रस्टी एक साथ बैठेंगे तो सच तत्काल बाहर आ जाएगा क्योंकि उनमें हर कोई एक जैसा नहीं है। इस हेराफेरी की शंका के केंद्र में जब कोई एक व्यक्ति विशेष है ही नहीं तो फिर किसी एक के स्पष्टीकरण का क्या महत्व है।'
समय-समय पर होता है ऑडिट
दरअसल, अखिलेश के पोस्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से महासचिव चंपत राय ने अपना बयान जारी कर इसे खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि समय-समय पर आंतरिक ऑडिट होता है। इस कार्य में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि सम्मिलित रहते हैं। ऑडिट कार्य कई दिन तक चलता है। वही कार्य आजकल हो रहा है। अभी तक कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आयी है।
सीसीटीवी की निगरानी में होती है गिनती
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र एक पदाधिकारी ने बताया कि चढ़ावे की धनराशि की गिनती भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अयोध्या शाखा के द्वारा नियुक्त किए गए रेगुलर स्टाफ के द्वारा होती है। यहां नोटों की गिनती के लिए मशीन भी लगाती गयी है और सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में गिनती की जाती है। बताया जाता है कि पहले एक दिन में गिनती पूरी हो जाती थी और पूरी रकम बैंक में उसी दिन भेज दी जाती थी। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद परिस्थितियां बदलीं और चढ़ावा करोड़ों में पहुंच जाने से गिनती में समय लगने लगा। इसके कारण गिनती की धनराशि को लेजर पर चढ़ाने के बाद आलमारी के लॉकर में रखवाया जाता है। मिली जानकारी के अनुसार आलमारी के यह लाकर डबल लॉक के है। एक लॉक बैंक अधिकारी लगाते हैं तो दूसरा ट्रस्ट के द्वारा नियुक्त प्रभारी लगाते हैं। दूसरे दिन पुनः उसी प्रक्रिया में लॉकर को खोलकर धनराशि को पुन: गिनती कर बैंक की शाखा में कड़ी सुरक्षा में भेजा जाता है।




साइन इन