There no other organisation like Sangh it cannot be compared to any other organisation rss chief Mohan Bhagwat in Meerut संघ जैसा कोई दूसरा नहीं, इसकी तुलना किसी संगठन से नहीं हो सकती, मेरठ में बोले मोहन भागवत, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
More

संघ जैसा कोई दूसरा नहीं, इसकी तुलना किसी संगठन से नहीं हो सकती, मेरठ में बोले मोहन भागवत

दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की सौ वर्षों की यात्रा के उतार-चढ़ाव से लेकर वर्तमान हालात पर बात की। डॉ.भागवत ने कहा भारत में जो भी निवास करता है वह हिन्दू है। हमारे मत, पंथ, पूजा पद्धति अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सब हैं हिन्दू ही।

Sat, 21 Feb 2026 11:14 PMDinesh Rathour मेरठ, प्रमुख संवाददाता
share
संघ जैसा कोई दूसरा नहीं, इसकी तुलना किसी संगठन से नहीं हो सकती, मेरठ में बोले मोहन भागवत

जातियों में बंटने के बजाए एक होकर देश के लिए खड़े रहने और एकता के संदेश के साथ आरएसएस सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवत का मेरठ में दो दिवसीय दौरा शनिवार को संपन्न हो गया। डॉ.भागवत ने संघ की सौ वर्षों की यात्रा के उतार-चढ़ाव से लेकर वर्तमान हालात पर बात की।डॉ.भागवत ने कहा भारत में जो भी निवास करता है वह हिन्दू है। हमारे मत, पंथ, पूजा पद्धति अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सब हैं हिन्दू ही। हिन्दू का मतलब जोड़ना, सबके हित के विषय में विचार करना और सबके कल्याण की कामना करना। हम संपूर्ण धरती पर जीव-जन्तु, चर-अचर तथा ब्रह्मांड के कल्याण की कामना करते हैं।

संघ की तुलना किसी अन्य संगठन से नहीं की जा सकती, क्योंकि संघ जैसा कोई दूसरा है ही नहीं। उन्होंने कहा कि संघ की शाखा और संचलन को देखकर कुछ लोग इसे 'पैरा-मिलिट्री संगठन समझ लेते हैं', जबकि वास्तविकता यह है कि संघ व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है, जहां व्यक्ति के सर्वांगीण विकास की प्रक्रिया को मूर्त रूप दिया जाता है। संघ स्थापना से पहले देश की परिस्थितियां सबको पता है। डॉ. हेडगेवार के संबंध एवं सम्पर्क बाल गंगाधर तिलक, मदन मोहन मालवीय, सुभाष चन्द्र बोस, वीर सावरकर, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद यानी ऐसे सब लोगों से थे जो तब देश की आजादी के आंदोलन के साथ देश में व्याप्त कुरीतियों से लड़ते हुए भविष्य की चिंता कर रहे थे। डॉ. भागवत ने कहा उस वक्त चिंतन का विषय होता था कि हम बार-बार पराधीन क्यों हो रहे हैं। सबका मत यही रहता कि हम अपने स्व को भूल गए और बंट गए। अनेक कुरीतियां आईं, समाज में विषमताएं पैदा हो गईं। डॉ.हेडगेवार ने समरस, संगठित, अनुशासित हिन्दू समाज के संगठन को सभी समस्याओं का समाधान मानते हुए संघ की स्थापना की।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:मुकदमे का सामना करेंगे, सच्चाई सबके सामने आएगी, FIR के आदेश पर बोले शंकराचार्य

संघ डरा, झुका नहीं..काम करता रहा

संघ प्रमुख ने कहा कि सौ वर्षों में संघ ने प्रतिबंध भी झेला, झूठी हत्याओं के आरोप लगे, राजनीतिक विरोध झेलना पड़ा, स्वयंसेवकों की हत्याएं भी हुईं और अत्यधिक अभाव भी देखा, लेकिन स्वयंसेवकों की दृढ़ संकल्प शक्ति एवं असीम इच्छा शक्ति से स्वयं को बचाते हुए आज अनुकूलता के काल में हम आए हैं।

विविधता मिथ्या, एकता सत्य

संघ प्रमुख के अनुसार बीते दो सौ वर्षों में भारत में जितने महापुरुष हुए उतने दुनिया के किसी देश में नहीं हुए। विविधता भारत का स्वभाव रहा है, लेकिन हम इतिहास देखें तो इन सबके बावजूद हम एकसाथ मिलकर एक राष्ट्र में रह रहे हैं। हमारे पूर्वज जानते थे कि बाहर सुख मिलता नहीं और अंदर किसी ने खोजा नहीं। इसीलिए आध्यात्मिक रूप से उन्होंने यह तत्व समझा और अपने भारत के विषय में कहा कि विविधता मिथ्या है और एकता सत्य है। भागवत ने कहा कि संघ तो कार्य कर ही रहा है। समाज की सज्जन शक्ति भी राष्ट्र उत्थान के लिए प्रत्यनशील रहें।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:रामभद्राचार्य ने UGC नियम पर चेताया, बोले- गृहयुद्ध से बचना है तो वापस ले सरकार

समाज तक पहुंचाएं संघ का उद्देश्य

क्षेत्र कार्यवाह डॉ. प्रमोद कुमार ने प्रस्तावना देखते हुए कहा कि प्रमुख जन गोष्ठी समाज जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में नेतृत्व करने वाले लोगों के बीच संघ का विषय पहुंचाने के लिए रखी गई है। सामाजिक चेतना के विषयों से जुड़ने और भारत को पुनर्वैभव पर पहुंचाने का काम करें। शिशीश कुमार ने एकल गीत प्रस्तुत किया। विभाग सम्पर्क प्रमुख निपुण अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

शिक्षा सबके लिए सुलभ हो

जिज्ञासा समाधान में संघ प्रमुख से सवाल पूछा गया कि शिक्षा पर बजट बहुत कम है तो शिक्षा सबके लिए कैसे सुलभ हो सकती है। डॉ.भागवत ने कहा बजट बढ़ाने का काम सरकार का है, लेकिन संघ का स्पष्ट मत है कि शिक्षा सबके लिए सुलभ हो। प्राचीन काल में समाज के सहयोग से अनेक विद्यालय चलते थे। आज भी हमें वैसे ही परस्पर सहयोग एवं संस्कार की आवश्यकता है कि समाज बिना सरकारी सहायता के वंचितों को शिक्षित करे। एक राष्ट्र-एक शिक्षा एवं एक राष्ट्र-एक स्वास्थ्य नीति के सवाल पर संघ प्रमुख ने कहा कि देश में एक शिक्षा नीति है और एक स्वास्थ्य नीति भी है। क्षेत्रीय जरूरतों के हिसाब से इसमें कुछ विषय जोड़ने की भी छूट है, लेकिन इसे लागू करना राज्यों का विषय है। संघ का प्रयास है कि ऐसे विषयों पर एक राय बने और समाज में एकरूपता आए।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:यूपी में 45 हजार होमगार्ड भर्ती में इन्हें मिलेगी प्राथमिकता, सीएम योगी का ऐलान

ओटीटी पर रामायण-हनुमान चालीसा भी, देखना हमारे विवेक पर

ओटीटी प्लेटफार्म पर मौजूद अश्लील विषय वस्तु से समाज को संस्कार रहित करने के प्रयास के सवाल पर डॉ.भागवत ने कहा कि विषय वस्तु देखना हमारे विवेक पर निर्भर करता है। ओटीटी पर रामायण एवं हनुमान चालीसा भी हैं। आदर्श मूल्यों के क्षरण के कारण और इस पर संघ के मत पर डॉ.भागवत ने कहा कि सबसे पहले मूल्य आधारित शिक्षा लागू करनी होगी। समाज को संस्कारयुक्त वातावरण देना होगा। समृद्धि होना अच्छी बात है, किन्तु वेदों में कहा गया है आप भरपूर कमाएं लेकिन अपनी जरूरत के हिसाब से रखते हुए शेष समाज हित में प्रयोग करें। संघ सामाजिक समरसता पर काम कर रहा है, लेकिन राजनीतिक दल जाति देखकर टिकट देते हैं, इस सवाल पर डॉ.भागवत ने कहा कि संघ गहनता से काम कर रहा है। जो भी तत्व समाज को विघटित करने वाले हैं उनसे सावधान होना होगा। संघ प्रमुख ने कहा कि वह तभी ऐसा करते हैं जब समाज ऐसा होता है। ऐसे में हमें अपने व्यवहार में समरसता लानी होगी। समाज का वातावरण बदलना होगा।

उत्पादन के साथ गुणवत्ता के लिए भी हो काम

जैविक कृषि का चेहरा एवं पद्मश्री भारत भूषण त्यागी ने कहा कि संघ की पंच परिवर्तन की संकल्पन समाज में परिवर्तन ला रही है। उन्होंने कहा खेती में अधिक उत्पादन की होड़ में अत्यधिक रसायन एवं कीटनाशक प्रयुक्त हो रहे हैं। इससे स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है और निर्यात भी। त्यागी ने इन मुद्दों पर भी संघ को फोकस करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रकृति के अनुकूल चलते हुए पर्यावरण संरक्षण की अपील की।

नारी से ही बचेगा परिवार, वैदिक शिक्षा दें

चोटीपुरा गुरुकुल की संस्थापिका पद्मश्री डॉ.सुमेधा आचार्य ने कहा आज हम विकसित राष्ट्र बनने की ओर हैं, लेकिन हमें समझना होगा कि मात्र भौतिक उन्नति किसी भी राष्ट्र के लिए अच्छी नहीं होती। भौतिक विकास के साथ आध्यात्मिक उन्नति भी उतनी ही जरूरी है। दुनिया में जो राष्ट्र विकसित हो चुके हैं वे पर्यावरण, नैतिकता का पतन, मानसिक अवसाद, सामाजिक विघटन जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। लौकिक और आध्यात्मिक दोनों उन्नति जरूरी हैं। जहां इहलोक-परलोक की उन्नति है वही धर्म है। डॉ.सुमेधा ने कहा कि परिवार नारी से बनता है। नारी शिक्षित एवं संस्कारित होगी तो परिवार संस्कारित एवं सशक्त होगा। यदि परिवार सशक्त-संस्कारित है तो समाज, राष्ट्र और विश्व सशक्त-संस्कारित होगा। नारी समाज की मुख्य इकाई है। ऐसे में नारी को वैदिक शिक्षा देनी होगी।

लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News और Kanpur News के साथ-साथ UP Board Result 2026 Live, UP Board 10th Result, UP Board 12th Result और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।