Rambhadracharya warned against UGC rule saying government should withdraw it if it wants to avoid civil war रामभद्राचार्य ने UGC नियम पर चेताया, बोले- गृहयुद्ध से बचना है तो वापस ले सरकार, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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रामभद्राचार्य ने UGC नियम पर चेताया, बोले- गृहयुद्ध से बचना है तो वापस ले सरकार

बस्ती में यूजीसी के नए नियमों को लेकर जगद्गुरु रमाभद्राचार्य ने केंद्र सरकार को चेतावनी दे डाली। साथ ही सवाल किया कि यूजीसी गाइडलाइंस की क्या आवश्यकता थी? समाज में क्यों भेदभाव किया जा रहा है।

Sat, 21 Feb 2026 06:59 PMDinesh Rathour लाइव हिन्दुस्तान, बस्ती
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रामभद्राचार्य ने UGC नियम पर चेताया, बोले- गृहयुद्ध से बचना है तो वापस ले सरकार

यूजीसी नियमों को लेकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने बस्ती में बड़ा बयान दिया। साथ ही सरकार को चेतावनी भी दी है। रामभद्राचार्य ने कहा, देश में यूजीसी कानून लागू नहीं हो सकता। गृहयुद्ध से बचना है तो सरकार को यूजीसी नियमों को वापस लेना पड़ेगा। उनके रहते इस कानून को लागू नहीं करने दिया जाएगा। सरकार को चेतावनी देते हुए रामभद्राचार्य बोले मैं जब तक धर्माचार्य हूं किसी को अपने मन की नहीं करने दी जाएगी।

बस्ती के कप्तानगंज ब्लॉक के बढ़नी में रामकथा सुना रहे रामभद्राचार्य ने केंद्र सरकार को घेरा और सवाल किया कि यूजीसी गाइडलाइंस की क्या आवश्यकता थी? समाज में क्यों भेदभाव किया जा रहा है। समाज का विभाजन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, ब्राह्मण कभी जातिवादी नहीं रहा है। दुर्भाग्य से अनेक ब्राह्मण मांस सेवन, मछली खाने और शराब का सेवन करने लगे हैं। ऐसे ब्राह्मणों को स्वयं जागरूक होना होगा। महर्षि वशिष्ठ की कथा सुनाते हुए रामभद्राचार्य ने कहा गुरु वशिष्ठ ने निषाद राज को आदर किया था। अगर द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा देने से मना नहीं किया होता तो महाभारत नहीं होता।

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महान ऋषि थे गुरु वशिष्ठ

स्वामी रामभद्राचार्य ने गुरु वशिष्ठ को वह महान ऋषि बताया, जिन्होंने प्रभु श्रीराम और उनके भाइयों को वेद, शास्त्र और राजधर्म की शिक्षा दी थी। कथा को आगे बढ़ाते हुए तीसरे दिन स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि श्रीराम अपने भाइयों के साथ बचपन में ऋषि वशिष्ठ आश्रम गए थे ताकि शिक्षा प्राप्त कर सकें। राजपरिवार के कर्तव्यों को सीख सकें। अवध के आदर्श भावी राजा बनने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। वनवास के बाद के जीवन में भी रामजी अपने जीवन में आने वाली किसी भी शंका, उलझन या समस्या के समाधान के लिए वशिष्ठ के निरंतर संपर्क में रहते थे। इतना ही नहीं इस गुरुकुल में पुत्रों को शिक्षा के लिए महाराज दशरथ ब्रह्मर्षि वशिष्ठ के पाए आए थे और शिक्षा देने का अनुरोध किया था। ‘भए प्रगट कृपाला, दीन दयाला कौशल्या हितकारी’ पर समूचा पांडाल स्वर में स्वर मिलाता दिखा।

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राजनीति करनी है तो राम की करें

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा का दिन अद्भुत है। ऐसे गुरु वशिष्ठ जिन्होंने भगवान राम व चारो भाइयों के प्राकट्य का आधार बने, उन्हीं ब्रह्मर्षि वशिष्ठ का इस गांव में पुन: प्राकट्य हुआ। कथा के समय आने पर सीख मिलती थी। यहां पता चला कि गुरु वशिष्ठ अपने बलबूते 10 हजार विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ पालन पोषण करते थे। उन्होंने राम के बिना भारत नहीं है। राम हैं तो सब कुछ है। राम अपने सबको समेटे हैं। राजनीति करनी है तो राम की राजनीति करें। इस मौके पर कथा व्यास स्वामी रामभद्राचार्य ने हिमाचल के राज्यपाल को रामचरित्र मानस स्मृति चिह्न के रूप में दिया।

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