सोनिया-राहुल के करीबी सांसद किशोरी लाल पर केस में लापरवाही, कोर्ट का डीएम को ऐक्शन का निर्देश
Raebareli News: रायबरेली की एक अदालत ने अमेठी सांसद किशोरी लाल शर्मा और अन्य कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ 2012 के एक पुराने मामले में पुलिस की घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। डीएम को पुलिसकर्मियों पर एक्शन और पूरी रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।

Raebareli News: यूपी के रायबरेली में कोतवाली में सांसद किशोरी लाल शर्मा पर दर्ज मुकदमे की जांच में बड़ी लापरवाही सामने आई है। इसके बाद कोर्ट ने जांच में शामिल रहे पुलिसकर्मियों की कार्यशैली पर घोर लापरवाही मानते हुए डीएम को कार्रवाई का आदेश दिया है। इसके साथ ही कार्रवाई की पूरी डिटेल उपलब्ध कराने को कहा है। किशोरी लाल शर्मा गांधी परिवार खासकर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बेहद करीबी नेता हैं। लंबे समय तक वह रायबरेली में सोनिया गांधी के प्रतिनिधि के रूप में भी काम कर चुके हैं। प्रियंका गांधी तो कई बार खुलेआम उनकी तारीफ कर चुकी हैं।
रायबरेली के मिल एरिया थाना क्षेत्र निवासी एक अधिवक्ता ने साल 2012 में तत्कालीन कांग्रेस नेत्री सोनिया गांधी के प्रतिनिधि और अब अमेठी के सांसद समेत आधा दर्जन कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज कराया था। अधिवक्ता ने कांग्रेस प्रतिनिधि किशोरी लाल शर्मा समेत आधा दर्जन लोगों ने राष्ट्रध्वज का अपमान और दंगे का आरोप लगाया था। इस मामले में चार साल की विवेचना के बाद साल 2016 में पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने चार्जशीट में खामियां देख दोबारा विवेचना का आदेश दिया। इसके बाद नौ साल तक विवेचना पूरी नहीं हुई। इस पर कोर्ट ने गंभीर रुख अख्तियार करते हुए लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा।
अधिवक्ता शकील अहमद खान ने बताया कि मुकदमे की विवेचना करने वाले विवेचकों की ओर से इस मामले में घोर लापरवाही बरती गई। मुकदमे की विवेचना बारी-बारी से आधा दर्जन विवेचकों को स्थानांरित की गई। मामले में अधिवक्ता ने फिर से प्रकरण की जांच के लिए न्यायालय को पत्र लिखा था। इस पर वर्ष 2016 में मुकदमे की विवेचना किए जाने के लिए दोबारा न्यायालय से निर्देशित किया गया। करीब नौ साल से प्रकरण की चल रही जांच समय से पूरी ना किए जाने पर न्यायालय की ओर से नारागजी जताई। कोर्ट ने कोतवाली पुलिस को समय से विवेचना ना पूरी किए जाने पर फटकार लगाते हुए जवाब मांगा।
न्यायालय की ओर से मांगे गए जवाब में शहर कोतवाल ने अपना स्पष्टीकरण दिया। इसमें बताया गया कि इस प्रकरण की विवेचना करने में आधा दर्जन दरोगा समेत सात पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की ओर से लापरवाही बरती गई और अब इस मामले के साक्ष्य भी गायब हो चुके हैं। मामले की विवेचना करने वाले पुलिस कर्मियों का स्थानांतरण भी जिले से हो गया है। पुलिस को न्यायालय में दाखिल किए गए जवाब के बाद कोर्ट ने दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
जांच अधिकारी पर प्रपत्र गायब करने का आरोप
अधिवक्ता के द्वारा न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया कि सांसद प्रतिनिधि व कांग्रेस पदाधिकारियों के खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज के अपमान किए जाने के दर्ज कराए गए मुकदमे में घोर लापरवाही बरती गई। आरोप है कि उक्त मुकदमे की जांच कर रहे विवेचकों के द्वारा प्रपत्रों को गायब किया गया है। फिलहाल मामले को कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए पुलिस कर्मियों को दोषी मानते हुए कार्रवाई किए जाने के लिए पुलिस विभाग के अधिकारियों को भी पत्र लिखा है।
पुलिस अधीक्षक रवि कुमार के अनुसार पुराना मामला है। न्यायालय की ओर से जारी आदेशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। पूरे प्रकरण की जानकारी करने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।




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