साइबर फ्रॉड का इतना खौफ कि अब पुलिस की भी कॉल नहीं उठा रहे लोग, क्यों समझ रहे जालसाज?
लोगों में साइबर फ्रॉड को लेकर इतना खौफ है कि अब पुलिस की भी कॉल नहीं उठा रहे हैं। इससे पुलिस के सामने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। अब उसे लोगों के घर तक की दौड़ लगानी पड़ रही है।

UP News: यूपी में साइबर अपराध की बढ़ती वारदातों ने आम लोगों के मन में डर और अविश्वास का ऐसा माहौल बना दिया है कि अब पुलिस की कॉल पर भी लोग भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। हालात यह हो गए हैं कि जब यूपी पुलिस किसी शिकायत या जांच के सिलसिले में फोन करती है, तो कई लोग उसे साइबर ठगों की कॉल समझकर तुरंत फोन काट देते हैं। इससे पुलिस के सामने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। अब उसे लोगों के घर तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। दरअसल, साइबर ठग खुद को पुलिस अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को झांसे में लेते रहे हैं। वे फर्जी केस, गिरफ्तारी या खाते बंद होने का डर दिखाकर लोगों से पैसे ऐंठ लेते हैं। ऐसी वारदातें लगातार सामने आने से जनता सतर्क तो हुई है, लेकिन इस सतर्कता का असर अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी पड़ रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में जब वे शिकायतकर्ता या संबंधित व्यक्ति से फोन पर संपर्क करने की कोशिश करते हैं, तो सामने वाला व्यक्ति कॉल उठाते ही संदेह व्यक्त करता है या बिना बात सुने फोन काट देता है। कुछ लोग तो साफ तौर पर कह देते हैं कि वे किसी भी अनजान नंबर से आई कॉल पर भरोसा नहीं करते। ऐसे में जरूरी जानकारी साझा करना और जांच को आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाता है।
घर तक लगानी पड़ रही दौड़
ऐसे हालात में पुलिस को कई मामलों में लोगों के घर तक जाकर संपर्क करना पड़ रहा है। पहले जहां फोन से ही प्रारंभिक पूछताछ और सूचना आदान-प्रदान हो जाता था, वहीं अब पुलिसकर्मियों को व्यक्तिगत रूप से पहुंचकर लोगों को भरोसा दिलाना पड़ रहा है कि वह असली पुलिस है। इससे समय और संसाधनों की अतिरिक्त खपत हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगों के खिलाफ जागरूकता अभियान जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही लोगों को यह भी समझाना आवश्यक है कि वे सही और गलत कॉल में अंतर कैसे करें। पुलिस विभाग भी अब अपने आधिकारिक नंबरों को सार्वजनिक करने, कॉल के दौरान पहचान बताने और जरूरत पड़ने पर लिखित सूचना देने जैसे कदम उठा रहा है, ताकि लोगों का भरोसा फिर से कायम किया जा सके।
कॉल संदिग्ध लगे तो हेल्पलाइन नंबर से करें पुष्टि
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई कॉल संदिग्ध लगे, तो घबराने के बजाय संबंधित थाने या आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर पुष्टि कर लें। बिना जांचे-परखे किसी कॉल को पूरी तरह नजरअंदाज करना भी कई बार जरूरी सूचनाओं से वंचित कर सकता है।




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