इंस्टाग्राम-टेलीग्राम के जरिए स्लीपर सेल की हो रही भर्ती, पनप रही आतंक की नई नर्सरी
सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिए पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आका भारत में स्लीपर सेल की भर्ती कर रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए आतंक की नई नर्सरी पनप रही है। यहीं पर निगरानी के जरिए एटीएस ने देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त आरोपियों को पकड़ा है।

केस एक: एटीएस ने आतंकी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप में 23 अप्रैल को तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्ला अली खान और समीर खान को नोएडा से गिरफ्तार किया। एटीएस ने दावा किया कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट इंस्टाग्राम व सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म के माध्यम से यूपी के युवकों को स्लीपर सेल बना रहे हैं। आईएसआई के इशारे पर तुषार और समीर इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी गैंगस्टर के सीधे संपर्क में थे। दोनों को कई खतरनाक टास्क सौंपे गए थे।
केस दो: पुलिस ने इंस्टाग्राफ पर प्रसारित युवक के हथियारों का प्रदर्शन करते वीडियो की जांच की। मामले में बिजनौर निवासी मैजुल, उवैद व आजाद के अलावा मेरठ निवासी आकिब को पकड़ा तो इंस्टाग्राम के जरिए विभिन्न स्थानों पर आतंकी घटनाएं रचे जाने का बड़ा षड्यंत्र सामने आया। मामले में आरोपी जुल्फिकार उर्फ राका, आरिफ मलिक व सुहेल उर्फ साहिल भी पकड़े गए।
केस तीन: एटीएस ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आईएसआई के नेटवर्क से जुड़े दो और संदिग्ध आतंकियों बाराबंकी निवासी दानियाल अशरफ और कुशीनगर के कृष्णा मिश्रा को गिरफ्तार किया। एटीएस ने दावा किया कि यह दोनों आरोपी इंस्टाग्राम के जरिए ही पाकिस्तानी गैंगस्टर के संपर्क में आए थे। जो पाकिस्तान में बैठे आतंकियों द्वारा तैयार किए जा रहे नए माड्यूल का हिस्सा बन गए थे। जांच में वाट्सएप के जरिए भी आपसी संपर्क होने और संदिग्ध सूचनाओं के आदान-प्रदान का तथ्य भी सामने आया।
यूपी में गहरा नेटवर्क, कई स्लीपर माड्यूल
आतंकी संगठनों का यूपी में गहरा नेटवर्क रहा है और उनके स्लीपिंग माड्यूल यहां पकड़े भी जाते रहे हैं। अब सोशल मीडिया को हथियार बनाकर पाकिस्तान में बैठे आतंकी बड़ी आसानी से विभिन्न राज्यों में अपने नए माड्यूल बना रहे हैं। इनमें यूपी में बीते दो माह के भीतर ऐसे कई संदिग्ध आतंकियों से पूछताछ में भी ऐसे तथ्य सामने आए हैं।
एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर सर्विलांस के दौरान पता चला था कि मेरठ का साकिब उर्फ डेविड पाकिस्तानी हैंडलरों, विभिन्न कट्टरपंथी ग्रुपों और अफगानिस्तान के नंबर से जुड़ा है। ऐसे ही कई अन्य इनपुट के आधार पर अन्य आरोपितों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई।
एक अन्य संदिग्ध आतंकी आकिब के अपने यूट्यूब हैंडल के जरिये खासतौर पर पश्चिमी यूपी में रहने वाले साथियों को आतंकी घटनाएं करने के लिए उकसाने का तथ्य भी सामने आया था। जांच एजेंसियों के लिए इंस्टाग्राम व टेलीग्राम एक नई चुनौती साबित हो रहे हैं। एटीएस ने इनकी निगरानी बढ़ाने के साथ ही संदिग्धों की आईडी सूचीबद्ध भी की हैं।
एटीएस ऐसी आईडी को ब्लाक भी कराती है। सूत्रों का कहना है कि ऐसी गतिविधियों पर शिकंजा कसने के लिए संदिग्धों की आईडी ब्लाक कराने के लिए अन्य जांच एजेंसियों के सहयोग से कार्रवाई तेज किए जाने की रणनीति बनाई जा रही है।




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