यूपी में बाढ़ से बिगड़े हालात, प्रयागराज-काशी में हजारों बेघर; CM योगी ने फील्ड में दौड़ाए अफसर
सीएम योगी ने निर्देश दिया है कि बाढ़ प्रभावित जिलों के प्रभारी मंत्री (टीम-11) अपने जिलों में ही रात्रि विश्राम करें। डीएम, एसपी, सीएमओ समेत सभी अधिकारी 24x7 फील्ड में रहकर काम करें। उधर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रयागराज में बाढ़ के हालात को लेकर सवाल उठाए हैं।

यूपी के कई इलाकों में बाढ़ से हालात बिगड़े दिख रहे हैं। गंगा-यमुना खतरे का निशान पर कर गईं हैं। प्रयागराज और वाराणसी में घरों में पानी घुसने के चलते हजारों लोगों को बेघर होना पड़ा है। जलस्तर में अभी बढ़ोतरी लगातार जारी है। प्रयागराज में शनिवार शाम 4 बजे तक नैनी में यमुना का जलस्तर 85 मीटर पार कर गया। जबकि खतरे का निशान खतरे का निशान 84.73 मीटर है। इस बीच सीएम योगी ने बाढ़ राहत के लिए ‘टीम-11’ का गठन किया है। 12 बाढ़ प्रभावित जिलों के लिए 11 प्रभारी मंत्रियों की तैनाती की गई है। सीएम योगी ने निर्देश दिया है कि बाढ़ प्रभावित जिलों के प्रभारी मंत्री (टीम-11) अपने जिलों में ही रात्रि विश्राम करें। डीएम, एसपी, सीएमओ समेत सभी अधिकारी 24x7 फील्ड में रहकर काम करें। इसके साथ ही तटबंधों की सतत निगरानी, जलनिकासी और साफ-सफाई के भी निर्देश दिए हैं। उधर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रयागराज में बाढ़ के हालात को लेकर सवाल उठाए हैं। रविवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर लिखा- ‘प्रयागराज में 20 हज़ार करोड़ खर्च करने के बाद प्रयागवासियों को जलभराव के सिवा और क्या मिला? भ्रष्टाचार के गहरे गड्ढों में भरा पानी भाजपाई घपलों-घोटालों के गोरखधंधे का भंडाफोड़ कर रहा है। स्मार्ट सिटी की संकल्पना पर पानी फेरनेवाले भाजपाई अपनी-अपनी नाव लेकर कहां गायब हो गये हैं।’
प्रयागराज शहर में चल रही नावें, पानी में उतराता दिखा शव
प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर शनिवार को खतरे का निशान पार कर गया। 63 गांवों-मोहल्लों में पानी पहुंच गया है। लोगों का आवागमन बंद हो गया है। 5135 लोग अपना घर छोड़कर राहत शिविरों में पहुंच गए हैं। तीन लाख से अधिक लोग किसी न किसी रूप में बाढ़ से प्रभावित हैं। शहर के वीआईपी इलाकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में हर जगह लोग परेशान दिखे। इस बीच झूंसी क्षेत्र के मुंशी पुरवा हेतापट्टी मार्ग पर शनिवार की सुबह बाढ़ के पानी में एक शव उतराया दिखा। राहगीरों ने मामले की जानकारी वहां तैनात पुलिसकर्मी को दी पर देर शाम तक शव नहीं हटाया गया। लोगों ने बताया कि शव को कौवे नोंच रहे थे। पुलिसकर्मी जानकारी के बाद भी शव निकलवाने का प्रयास नहीं किया।
सदर तहसील के 59 मोहल्ले सीधे प्रभावित हो गए हैं। इसमें मऊ-सरैया कछार, राजापुर देहमाफी, असदुल्लापुर मोहम्मदाबाद, बेली कछार, बेली उपरहार, बघाड़ा जहरूद्दीन, बघाड़ा बालन, मेहंदौरी कछार, शिवकुटी, चांदपुर सलोरी उपरहार, सादियाबाद कछार, चिल्लापट्टी, अराजी बारूद खाना कछार, आराजी जोंधवल, अराजी बारूद खाना उपरहार, गोविंदपुर, चांदपुर सलोरी कछार, बक्शी उपरहार, बक्शी कछार, बभनपट्टी कछार, बराही पट्टी कछार, मुस्तफा बाद मुंस्कसमा, सराय मौज उर्फ कीडगंज, बखतियारा, दरियाबाद, मेहंदौरी उपरहार, म्योराबाद, नकौली कछार, कछार भिखी सराय, नकौली उपरहार, नेवादा, बमरौली कछार, असरौली कछार, गोहटी कछार, गोहटी उपरहार, करेली, करैलाबाग, मैनापुर, असरावलखुर्द मोहल्ले शामिल हैं। प्रशासन ने चार पशु शिविर का भी संचालन किया है। शनिवार को 55 मवेशियों का उपचार कराया गया।
प्रयागराज के पांच हजार लोग राहत शिविरों में
शनिवार तक राहत शिविरों में पांच हजार लोग पहुंच गए थे, लेकिन इसके अलावा लगभग 50 हजार घरों में पानी पहुंच चुका है। इसमें से अधिकांश लोग अपने घर छोड़ नहीं रहे हैं और तमाम ऐसे भी हैं जो घर से निकलकर कुछ दिन गांव या किसी दूसरी जगह चले गए हैं।
वाराणसी तीन सेमी प्रतिघंटे बढ़ रहा जलस्तर
वहीं वाराणसी (काशी) में गंगा शनिवार रात खतरा निशान पार कर गईं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार तीन सेमी प्रतिघंटे बढ़ रहा जलस्तर रात 12 बजे राजघाट गेज पर 71.31 मीटर पर था। यहां चेतावनी बिंदु 70.262 और खतरा निशान 71.262 मीटर पर है। जबकि उच्चतम स्तर 73.901 मीटर है।
जलस्तर के खतरा निशान पार करने के बाद तटवर्ती इलाके के लोगों को वर्ष 1978 और 2013 के जैसे बाढ़ की आशंका सताने लगी। इससे पहले सुबह आठ बजे तीन सेमी प्रतिघंटा हो रहा बढ़ाव दोपहर दो बजे ढाई सेमी पर पहुंच गया था₹। लेकिन शाम छह बजे बढ़ाव में फिर तेजी आई और रफ्तार तीन सेमी प्रतिघंटा हो गई। रात आठ बजे जलस्तर 71.19 पर पहुंच गया था। गंगा में उफान की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन, जलपुलिस और एनडीआरएफ की टीमें लगातार सतर्कता बरत रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों में नावों से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। गंगा और वरुणा के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोग लगातार बाढ़ राहत शिविरों या फिर रिश्तेदारी में रहने को मजबूर हैं।
बाढ़ ने कइयों को किया बेघर और बेरोजगार
बाढ़ ने गंगा और वरुणा किनारे बसे कई परिवारों को बेघर और बेरोजगार कर दिया है। प्रभावित परिवारों के लोग इस समय राहत शिविरों में जीवन-यापन कर रहे हैं। उधर तटवर्ती कई गांव भी बाढ़ में घिरने से टापू बन गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी पशुपालकों को है। उनके सामने पशुओं के चारे की समस्या है। हालांकि जिला प्रशासन प्रभावित लोगों की मदद कर रहा है, लेकिन शिविरों में ठौर लिये लोगों में घर छोड़ने का संताप दिख रहा है।
वरुणा किनारा: आने-जाने के लिए ट्यूब बना सहारा
वरुणा किनारे के सलारपुर, सरैया, नक्खी घाट, दानियालपुर, कोनिया, ढेलवरिया, पुलकोहना, रसूलगढ़, पुरानापुल, शैलपुत्री, और बघवा नाला इलाके की गलियों में पानी घुटने तक भर गया है। यहां के लोग नाव और ट्यूब के सहारे आवागमन कर रहे हैं।
घरों और होटलों में कैद हो गए हैं लोग
जलस्तर बढ़ने से गंगा घाटों की सीढ़ियां चढ़ते हुए अब गलियों में हिलोरे ले रही हैं। बढ़ोतरी जारी रहने पर आशंका है कि जल्द अस्सी, नगवा क्षेत्रों में कुछ सड़कों पर आवागमन बंद हो सकता है। उधर घाट से सटी गलियों में बने होटल और मकानों के लोग उस समय कैद हो गए हैं। अस्सी में पार्किंग के बगल से घाट की ओर से जाने वाला मार्ग जलमग्न हो गया है। यही हाल शिवाला, मानसरोवर घाट, चौकी घाट, पांडेय घाट, दरभंगा घाट, दशाश्वमेध, मुंशी घाट, मानमंदिर क्षेत्रों का है।
चौकी घाट और आसपास के इलाकों में कई मकानों की बिजली भी काटी गई है। नगवा में गंगोत्री विहार कॉलोनी में सड़क पर जल बह रहा हैं। कई मकान पानी से घिर गए हैं। नगवा नाला से पानी घुसने के कारण रामेश्वर मठ के पीछे से लेकर भागवत विद्यालय के पास गली में रहने वाले कई परिवारों को निकाल कर शिविर में पहुंचाया गया। संगमपुरी कॉलोनी में मुख्य मार्ग पर पानी आ गया है। यहां महामृत्युंजय मंदिर के ऊपर गंगा प्रवाहित हो रही हैं। अपना घर आश्रम मदरवां सामनेघाट में रहने वाले 114 अशक्त लोगों को अन्य सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। रमना इलाके में पानी प्रवेश कर गया है।
बलिया, गाजीपुर और मिर्जापुर में बढ़ रहा जलस्तर
बलिया, गाजीपुर और मिर्जापुर में जलस्तर खतरा बिंदु से ऊपर है। चंदौली में गंगा रात में खतरे के निशान को छू सकती हैं। कई इलाकों में पानी घरों, स्कूलों और श्मशान घाटों तक पहुंच गया है। प्रशासन अलर्ट मोड पर है लेकिन हालात हर घंटे बिगड़ते जा रहे हैं।बलिया में गंगा मीडियम फ्लड पार कर उच्चतम बिंदु की ओर बढ़ रहीं हैं। सदर और बैरिया तहसील की दो दर्जन से अधिक बस्तियां प्रभावित हैं। सभी घाट डूब चुके हैं। कई विद्यालयों मे पानी घुसने से पठन-पाठन बाधित हो गया है। संपर्क मार्ग डूबने से लोगों की आवाजाही मुश्किल हो रही है। नदी पार चक्की-नौरंगा के करीब 200 मकानों पर कटान पर संकट गहरा गया है। गाजीपुर में भी गंगा तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहीं हैं। चंदौली में देर रात तक जलस्तर खतरा बिंदु पार कर सकता है। मिर्जापुर में छानबे, कोन, मझवां, सीखड़, पहाड़ी और नारायनपुर ब्लाक के लगभग ढाई सौ गांव बाढ़ की चपेट में हैं। दर्जन भर गांवों का संपर्क टूट गया है। भदोही में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कोइरौना इलाके में कई गांव बाढ़ के मुहाने पर खड़े हैं।
घाघरा के जलस्तर में भी इजाफा
सरयू (घाघरा) नदी के जलस्तर में बढ़ाव जारी है। आजमगढ़ के बदरहुआ में शुक्रवार शाम चार बजे नदी का जलस्तर 70.25 मीटर पर था। शनिवार को सुबह आठ बजे 70.47 मीटर पर पहुंच गया। यहां 12 घंटे में पर 22 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। मऊ में भी जलस्तर में वृद्धि जारी है। यहां बीते 24 घंटे में 20 सेमी जलस्तर बढ़ा है। बलिया में भी यही स्थिति है।
चीफ सेक्रेटरी ने की समीक्षा
प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी.गोयल ने संभावित बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी जिलाधिकारी जन-धन की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें। मुख्य सचिव ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के संभावित बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के सभी जिलाधिकारी संबंधित विभागों एवं केन्द्रीय एजेन्सियों के साथ समन्वय बनाकर पूरी सतर्कता के साथ राहत एवं बचाव कार्यों को करायें तथा बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों एवं व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण भी करें, जिससे कहीं पर भी जन-धन का नुकसान न होने पाये। उन्होंने कहा कि अति संवेदनशील और संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ की आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त राहत सामग्री की उपलब्धता रहे। बाढ़ राहत शिविरों में लोगों के लिए लंच पैकेट, शुद्ध पेयजल, दवाओं व नाश्ते के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध रहे। अन्य राहत सामग्री की गुणवत्ता से भी कोई समझौता न किया जाए। इन स्थलों पर पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था एवं आवश्यक उपकरणों का भी प्रबन्ध होना चाहिए। राहत आयुक्त ने बताया कि प्रदेश के 24 जनपद अतिसंवेदनशील स्थिति में हैं। इसमें महाराजगंज, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, बस्ती, बहराइच, बिजनौर, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, गोण्डा, बलिया, देवरिया, सीतापुर, बलरामपुर, अयोध्या, मऊ, फर्रुखाबाद, श्रावस्ती, बदायूं, अम्बेडकर नगर, आजमगढ़, संतकबीर नगर, पीलीभीत और बाराबंकी शामिल हैं। जबकि सहारनपुर, शामली, अलीगढ़, बरेली, हमीरपुर, गौतमबुद्ध नगर, रामपुर, प्रयागराज, बुलन्दशहर, मुरादाबाद, हरदोई, वाराणसी, उन्नाव, लखनऊ, शाहजहांपुर और कासगंज संवेदनशील प्रकृति के हैं।




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