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यूपी में ऐसे लोगों का प्लॉट अलॉटमेंट हो सकता है रद्द, एक महीने का है वक्त; जानें डिटेल

औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने सभी औद्योगिक प्राधिकरणों को इस तरह के मामलों में ऐक्शन लेने के निर्देश दिए हैं। दो साल से से ज्यादा वक्त से जमीन आवंटित करा कर अब तक फैक्टरी निर्माण शुरू नहीं करा पाने वाले निवेशक चिन्हित कर लिए गए हैं।

Sun, 3 Aug 2025 07:36 AMAjay Singh लाइव हिन्दुस्तान
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यूपी में ऐसे लोगों का प्लॉट अलॉटमेंट हो सकता है रद्द, एक महीने का है वक्त; जानें डिटेल

औद्योगिक उपयोग के लिए जमीन लेकर फैक्टरी न लगाई तो आवंटन रद्द होगा। इसके लिए उन्हें एक महीने का वक्त दिया गया है। खास तौर पर दो साल पहले जमीन आंवटन करा कर फैक्टरी निर्माण न करने वालों पर खास निगाह रखी जाएगी। औद्योगिक जमीन लेकर दुकान प्रतिष्ठान चलाने वालों पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें फैक्टरी एक्ट में पंजीकृत किया जाएगा।

औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने सभी औद्योगिक प्राधिकरणों को इस तरह के मामलों में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। दो साल से से ज्यादा वक्त से जमीन आवंटित करा कर अब तक फैक्टरी निर्माण शुरू नहीं करा पाने वाले निवेशक चिन्हित कर लिए गए हैं। अब इन्हें एक महीने में निर्माण शुरू कराना होगा। स्नैक्स बनाने वाली प्रसिद्ध ब्रांड वाली कंपनी को 2018 में नोएडा में जमीन आवंटित की गई। लेकिन वह 30 जुलाई तक निर्माण शुरू नहीं कर पाई। अब इसे एक माह का वक्त दिया गया है।

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नोएडा में 1000 से ज्यादा यूनिट दुकान और व्यवासयिक प्रतिष्ठान एक्ट में पंजीकृत

असल में विभाग द्वारा फैक्टरी एक्ट में पंजीकृत न होने वाली औद्योगिक इकाईयों का उसमें पंजीकरण कराने का अभियान चल रहा है। उसमें यह गड़बड़ियां सामने आईं हैं। नोएडा में 1227 चालू औद्योगिक यूनिट 110 इकाई फैक्टरी एक्ट में पंजीकृत हैं। बाकी यूनिट दुकान व व्यवासयिक प्रतिष्ठान एक्ट में पंजीकृत हैं। इनमें कई ऐसी हैं जहां सौ से ज्यादा कर्मचारी हैं। इनमें मेगा मैक्स सर्विस प्राइवेट (197 कर्मचारी), लिमिटेड, एकुस्टाम एपरेल प्राइवेट लिमिटेड(138 कर्मचारी) व रिशान आईटी मैनेजमेंट (200 कर्मचारी) हैं। इनका जमीन आवंटन की जांच होगी। देखा जाएगा कि औद्योगिक उदेश्य से ली गई जमीन पर कैसे बिना अनुमति के दूसरे कामों में उपयोग हो रहा है। इन लोगों ने कैसे गलत तरीके से पंजीकरण कराया।

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इस संबंध में औद्योगिक विकास प्राधिकरण की सभी औद्योगिक प्राधिकरणों के साथ पिछले दिनों हुई बैठक में तय हुआ कि इन सब गड़बड़ियों की जांच होगी। प्राधिकरणों से कहा गया है कि वे जांचें कि 20 से 99 तक कर्मचारी वाली यूनिट कैसे दुकान व व्यवासयिक प्रतिष्ठान एक्ट में पंजीकृत हैं। इनमें 26 दुकान व व्यवासयिक प्रतिष्ठान एक्ट में पंजीकृत हैं। यदि शर्तें पूरी करती हों तो इन्हें फैक्टरी एक्ट में पंजीकृत किया जाए।

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