यूपी में भी बढ़ा एसआईआर का समय, इस तारीख को जारी होगी वोटर लिस्ट की अंतिम सूची
एसआईआर को लेकर राहत भरी खबर है। चुनाव आयोग ने एसआईआर की प्रक्रिया को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है। अब यह काम 16 दिसंबर तक होगा। 14 फरवरी को वोटर लिस्ट की अंतिम सूची जारी होगी।

यूपी समेत नौ प्रदेशों में एक सप्ताह के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को बढ़ा दिया गया है। साथ ही वोटर लिस्ट की अंतिम लिस्ट जारी होने की तारीख भी तय कर दी गई है। निर्वाचन आयोग ने कहा कि गणना प्रपत्र वितरण अब चार दिसंबर के बजाय 11 दिसंबर तक जारी रहेगा। मसौदा मतदाता सूची अब नौ दिसंबर की जगह 16 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची सात फरवरी के स्थान पर 14 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि आयोग ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ आंतरिक चर्चा के आधार पर एसआईआर के सभी चरणों की समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है जहां यह प्रक्रिया जारी है।
प्रदेशभर के बीएलओ को मिली राहत
एसआईआर फॉर्म भरने और डिजिटाइजेशन की तारीख बढ़ने से बीएलओ और वोटरों को बड़ी राहत मिली है। फॉर्म भरने से छूटे वोटर अब फॉर्म भरकर बीएलओ के पास जमा कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने एसआईआर के फॉर्म जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय बढ़ा दिया है। बतादें कि समय रहते काम निपटाने को लेकर बीएलओ काफ़ी दबाव में काम कर रहे थे। एक सप्ताह का समय बढ़ाकर आयोग ने बीएलओ को तो राहत दी है। वही जिन मतदाताओं के फॉर्म अभी नहीं जमा हो पाए थे उनके लिए बहुत बड़ी राहत हो गई है। दरअसल प्रदेश के जिलों में रहने वाले कई ऐसे लोग हैं जो बाहर हैं। कुछ काम से गए हुए हैं तो कोई मेहनत मजदूरी करने के लिए दूसरे प्रदेश में पड़ा है। अब ऐसे लोगों को अपने घर आकर एक सप्ताह का समय और बढ़ जाने से अपना फार्म जमा करने का मौका मिल गया है।
एसआईआर को लेकर विपक्ष ने उठाए थे कई सवाल
विपक्षी दलों ने एसआईआर के दौरान कम से कम 40 बूथ-स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) की मौत होने का दावा करते हुए मतदाता सूची में संशोधन किए जाने के को कई सवाल उठाए थे। उनका दावा था कि इनमें से ज्यादातार ने 'कम समय सीमा' होने के कारण तनाव में आकर आत्महत्या की। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। एसआईआर कार्यक्रम में संशोधन के निर्वाचन आयोग के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह इस बात का संकेत है कि निर्वाचन आयोग को पता था कि समय-सीमा 'व्यावहारिक' नहीं थी।
27 अक्टूबर को एसआईआर कराने को लेकर आयोग ने की थी घोषणा
निर्वाचन आयोग ने 27 अक्टूबर को यूपी समेत नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर कराने की घोषणा की थी। इसमें अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्यप्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल थे। चुनाव आयोग के अनुसार एसआईआर का मुख्य उद्देश्य विदेशी अवैध प्रवासियों के जन्मस्थान की जांच करके उन्हें मतदाता सूची से बाहर करना है। यह कदम विभिन्न राज्यों में रह रहे बांग्लादेश और म्यांमा के अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




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