Shankaracharya Swami Avimukteshwarananda still out of Magh Mela camp a week having not taken the Basant Panchami bath स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एक हफ्ते बाद भी माघ मेला में शिविर के बाहर, नहीं किया बसंत पंचमी स्नान, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एक हफ्ते बाद भी माघ मेला में शिविर के बाहर, नहीं किया बसंत पंचमी स्नान

प्रयागराज माघ मेला में मौनी अमावस्या पर स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर ही हैं। शुक्रवार को उन्होंने बसंत पंचमी का स्नान भी नहीं किया। इस बीच उनकी तबीयत भी बिगड़ गई।

Sat, 24 Jan 2026 09:55 AMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान, prayagraj
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एक हफ्ते बाद भी माघ मेला में शिविर के बाहर, नहीं किया बसंत पंचमी स्नान

प्रयागराज माघ मेले में पिछले रविवार को मौनी अमावस्या पर हुए विवाद के बाद ससम्मान संगम स्नान की मांग कर रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक हफ्ते बाद भी अपने शिविर के बाहर ही हैं। उन्होंने शुक्रवार को वसंत पंचमी पर भी गंगा स्नान नहीं किया। इस बीच, भीषण ठंड में लगातार शिविर के बाहर रहने से शुक्रवार को उनकी तबीयत भी बिगड़ गई। सेवा में लगे संतों ने बताया कि सुबह उन्हें बुखार आ गया था। इस बीच इस मुद्दे को लेकर संतों का दो गुट बन गया है। कई संत अविमुक्तेश्वरानंद के साथ दिखाई दे रहे हैं तो वहीं रामभद्राचार्य ने शंकराचार्य को निशाने पर लिया है। दोनों संतों में वार-पलटवार हुआ है।

18 जनवरी को हुए विवाद के बाद से शंकराचार्य ने शिविर में प्रवेश नहीं किया है। शंकराचार्य आमतौर पर मौनी अमावस्या को ही स्नान करते हैं पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जब अपने गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के साथ यहां आते थे तो वे कई बार वसंत पंचमी तक रुकते थे तो वंसत पर भी स्नान करते थे। इसी उम्मीद में सुबह बड़ी संख्या में अनुयायी उनके शिविर के बाहर पहुंचे थे कि शायद शंकराचार्य संगम स्नान के लिए जाएं लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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फिलहाल प्रतिदिन सुबह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर बैठते हैं फिर दिन में वह गोरक्षा यात्रा कर माघ मेला में गोरक्षा के मुद्दे पर संतों का समर्थन मांगते हैं। देर शाम तक शिविर के बाहर बैठते और रात्रि में शिविर के बाहर खड़ी विशेष वैन में विश्राम करते हैं। हालांकि शुक्रवार को दोपहर दो बजे वह अपनी वैन से बाहर नहीं निकले। बाहर अनुयायियों की भीड़ उनके दर्शन के लिए खड़ी थी। संतों का कहना है कि लगातार पांच दिन से सर्द में बाहर बैठने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई है। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी डॉ. एसके सिंह ने बताया कि सुबह से उन्हें बुखार है। कोई डॉक्टर भी उन्हें देखने नहीं आया।

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केशव के बयान से संतुष्ट दिखे शंकराचार्य

प्रयागराज। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर शंकराचार्य संतुष्ट दिखे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अच्छा लगा की सरकार की ओर से कोई तो चाहता है कि इस मामले का पटाक्षेप हो। फिर भी बात वही है, उनके अधिकारी तो नहीं मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री मान रहे हैं कि हम ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य हैं और उनके अधिकारी हमें नोटिस दे रहे हैं कि हम शंकराचार्य नहीं हैं। कहा कि डिप्टी सीएम समझदार हैं, समझदार व्यक्ति को मुख्यमंत्री होना चाहिए। बता दें कि डिप्टी सीएम ने गुरुवार को आजमगढ़ में मीडिया के सवालों पर कहा था कि पूज्य शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम, उनसे प्रार्थना है कि बढ़िया से स्नान करें। इस विषय का यहीं समापन करें।

पांच बार की पूजा हो रही है प्रभावित

हनुमानगंज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रमुख शिष्य प्रत्यक्यचैतन्य मुकुंदानंद गिरि, प्रतिनिधि देवेंद्र पांडेय व राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगिराज बताते हैं कि शंकराचार्य इस बार स्वयं चलकर साधु-संतों और श्रद्धालुओं को गोरक्षा के लिए प्रेरित करने का संकल्प लेकर माघ मेला में आए थे। उन्होंने सवा लाख शिवलिंग भी मंगवाया था। एक ही पंडाल के नीचे सवा लाख शिवलिंगों का श्रद्धालुजन दर्शन कर सकें ऐसी मंशा थी, किंतु वह भी बाधित हो गई। शंकराचार्य चौबीस घंटे में एक बार अन्न ग्रहण करने और एक बार भिक्षा लेने तथा चार बार स्नान करने की परंपरा निभाते रहे हैं, किंतु शिविर में प्रवेश नहीं करने से प्रतिदिन पांच बार की जाने वाली आराध्यों की पूजा से वंचित हो रहे हैं।

बयानों पर शंकराचार्य ने किया पलटवार

हनुमानगंज। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, स्वामी रामभद्राचार्य और बाबा रामदेव के बयान पर पलटवार किया। सीएम के बयान को उन्होंने झुंझलाहट भरा बताया जबकि तुलसी पीठाधीश्वर के लिए कहा कि वो गंभीर संत नहीं हैं। वो राजनेताओं के करीबी हैं। पालकी की बात करते हैं और खुद आलीशान कार में बैठकर स्नान के लिए आए थे। शंकराचार्य ने कहा कि वो जिस मुहूर्त में निकले थे, वो अभी खत्म नहीं हुआ है। अगर स्नान करके निकले होते तो मुहूर्त पूरा होता। उनके लिए अभी भी मौनी ही है। बाबा रामदेव पर कहा कि वह शासन सत्ता का पिछलग्गू बने हैं। उन्हें सिर्फ व्यापार दिख रहा है।

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