swami Avimukteshwaranand retaliates against Prayagraj magh mela administration issues counter-notice giving 24-hour अविमुक्तेश्वरानंद का प्रयागराज मेला प्रशासन पर पलटवार, जवाबी नोटिस में 24 घंटे की मोहलत, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
More

अविमुक्तेश्वरानंद का प्रयागराज मेला प्रशासन पर पलटवार, जवाबी नोटिस में 24 घंटे की मोहलत

प्रयागराज माघ मेला प्रशासन द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के 'शंकराचार्य' संबोधन पर उठाए गए सवालों के जवाब में अब संत की ओर से तीखा पलटवार किया गया है। उनके अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्रा के माध्यम से प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को एक कानूनी नोटिस भेजा गया है।

Wed, 21 Jan 2026 02:47 PMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
share
अविमुक्तेश्वरानंद का प्रयागराज मेला प्रशासन पर पलटवार, जवाबी नोटिस में 24 घंटे की मोहलत

प्रयागराज माघ मेला प्रशासन द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के 'शंकराचार्य' संबोधन पर उठाए गए सवालों के जवाब में अब संत की ओर से तीखा पलटवार किया गया है। उनके अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्रा के माध्यम से प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को एक कानूनी नोटिस भेजा गया है, जिसमें प्रशासन की कार्रवाई को न केवल अपमानजनक बताया गया है, बल्कि इसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की अवमानना करार दिया गया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि मेला प्रशासन द्वारा 19.01.2026 को जारी किए गए उस पत्र को 24 घंटे के भीतर वापस लिया जाए। अधिवक्ता का तर्क है कि प्रशासन का पत्र अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिष्ठा, गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है।

'सुप्रीम कोर्ट की अवमानना' का दावा

नोटिस में आरोप लगाया गया है कि यह पूरा मामला माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है। ऐसे में प्रशासन का हस्तक्षेप कोर्ट की गरिमा को चुनौती देने जैसा है। नोटिस के अनुसार, प्रशासन की यह हरकत Contempt of Courts Act, 1971 और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। यदि प्रशासन अपना पत्र वापस नहीं लेता है, तो उनके खिलाफ मानहानि और अवमानना की कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:शंकराचार्य क्यों लिख रहे? अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस, 24 घंटे में जवाब मांगा गया

आधी रात को नोटिस चस्पा करने पर आपत्ति

नोटिस में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि प्रशासन ने 19 जनवरी की रात को, जब स्वामी जी सो रहे थे, पुलिस बल के साथ शिविर के प्रवेश द्वार पर नोटिस चस्पा की थी। इसे 'जगद्गुरु शंकराचार्य' संस्था का अनादर और अपमान बताया गया है।

क्या है मुख्य विवाद?

दरअसल, मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से उनके 'शंकराचार्य' पद की वैधानिकता के प्रमाण मांगे थे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा गया था। अविमुक्तेश्वरानंंद की ओर से उस नोटिस का आठ पन्नों में जवाब देने के बाद अब कानूनी नोटिस के जरिए यह संदेश दिया गया है कि धार्मिक पदों की गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रशासन की नोटिस के जवाब में क्या कहा

मेला प्रशासन के नोटिस के जवाब में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के जिस आदेश का हवाला दिया गया है, वो 14 अक्तूबर 2022 का है जबकि 11 सितंबर 2022 को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने के अगले दिन 12 सितंबर को स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के आश्रम में शंकराचार्य के तौर पर उनका पट्टाभिषेक हो चुका था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अधिवक्ता टीएन मिश्र ने इस बारे में विस्तार से बताया।

अधिवक्ता टीएन मिश्र ने बताया कि कोर्ट ने अपने आदेश में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को खुद शंकराचार्य लिखा है। बताया कि 26 सितंबर को शृंगेरी मठ के शंकराचार्य स्वामी भारतीजी ने अपने आश्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का पट्टाभिषेक किया था और बाद में 12 से 14 अक्तूबर 2022 को द्वारकाशारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने भी अपने आश्रम में उनका पट्टाभिषेक किया था। जिसमें शृंगेरी मठ के शंकराचार्य मौजूद थे।

अधिवक्ता ने बताया कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने एक फरवरी 2017 को एक रजिस्टर्ड वसीयत के जरिए स्वामी सदानंद सरस्वती को द्वारका शारदापीठ और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्योतिष्पीठ का उत्तराधिकारी घोषित किया था। जिसकी जानकारी 13 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट को दी भी गई है। जब उसी वसीयत से स्वामी सदानंद सरस्वती शंकराचार्य हैं तो फिर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती क्यों नहीं?

सुप्रीम कोर्ट का नाम गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया

उन्होंने अफसरों पर निशाना साधते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का नाम गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। ऐसे में उनके ऊपर अवमानना का मामला बनता है। नोटिस का जिक्र करते हुए अधिवक्ता ने कहा कि अवमानना का मामला है या नहीं, इसे सुप्रीम कोर्ट तय करेगा, प्रशासन नहीं।

लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News, Kanpur News , Pareet Yadav Death Live और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।