सीबीआई जांच के घेरे में यूपी के इस विभाग के कई अधिकारी-कर्मचारी, खंगाल रही जानकारी
CBI ने यूपीएफसी के नाम पर फर्जी बैंक खाता खोल कर 6.95 करोड़ रुपये की ठगी के आरोप में दीपक संजीव सुवर्ना और मैसूर निवासी दीपक यादव को गिरफ्तार किया था। दोनों से की गई लंबी पूछताछ के दौरान उनके संपर्कों से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं। गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

UP News : उत्तर प्रदेश वन निगम (यूपीएफसी) के नाम पर फर्जी बैंक खाता खोलकर की गई ठगी में सीबीआई जांच के घेरे में कई सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी हैं। गिरोह को सरकारी विभागों के एफडीआर बनवाने की जानकारी पहले से हो जाती थी। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई इसकी तह तक पहुंचने के लिए गिरोह के सदस्यों के बीते दिनों के मूवमेंट को ट्रैक कर रही है। आरोपितों से मिले कुछ संदिग्ध नंबरों का ब्योरा भी खंगाला जा रहा है।
सीबीआई ने यूपीएफसी के नाम पर फर्जी बैंक खाता खोल कर 6.95 करोड़ रुपये की ठगी के आरोप में गाजियाबाद निवासी दीपक संजीव सुवर्ना और मैसूर निवासी दीपक यादव को गिरफ्तार किया था। दोनों से की गई लंबी पूछताछ के दौरान उनके संपर्कों से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। गिरोह के द्वारा अन्य राज्यों में की गई ठगी की घटनाओं का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है।
सीबीआई ने मामले में बैंक आफ इंडिया की शिकायत पर 15 जनवरी को केस दर्ज किया था। आरोप है कि दीपक संजीव और दीपक यादव ने सरकारी कर्मचारियों और अन्य की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों की मदद से उत्तर प्रदेश वन निगम के नाम पर बैंक आफ इंडिया की लखनऊ में सदर स्थित शाखा में खाता खुलवाया था। यूपीएफसी की ओर से एफडीआर के लिए भेजे गए 64.82 करोड़ रुपये का एक हिस्सा जाली दस्तावेजों के जरिए खोले गए बचत खाते में डायवर्ट कराया गया था। सीबीआई नई दिल्ली के पते पर दर्ज उन फर्मों के संचालकों तक भी पहुंचने का प्रयास कर रही है, जिनके खातों में ठगी की रकम डायवर्ट की गई थी।
दीपक संजीव और दीपक को कई राज्यों में तलाश कर रही थी सीबीआई
दीपक संजीव और दीपक को सीबीआई पिछले कुछ महीने से कई राज्यों में तलाश रही थी। दोनों आरोपियों को भ्रष्टाचार विरोधी विशेष न्यायाधीश, (पश्चिम) लखनऊ की अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। मामले में पहले लखनऊ की सदर कोतवाली में केस दर्ज हुआ था। सीबीआई ने बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर मामले में 15 जनवरी को केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। सीबीआई के अनुसार आरोपी दीपक संजीव और दीपक यादव ने अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य की मिलीभगत से जारी केवाईसी दस्तावेजों, फर्जी प्राधिकरण पत्रों और फर्जी बोर्ड प्रस्तावों के जरिए उत्तर प्रदेश वन निगम के नाम पर बैंक ऑफ इंडिया की लखनऊ सदर स्थित शाखा में फर्जी बैंक खाता खोला था।
आरोप है कि जाली दस्तावेजों के जरिए बैंक को यूपीएफसी की ओर से कथित तौर पर एफडीआर बनाने के लिए खाते में 64.82 करोड़ रुपए स्थानांतरित करने के लिए प्रेरित किया गया। बाद में आरोपितों ने आरटीजीएस के जरिए 6.95 करोड़ रुपए कोलकाता और नई दिल्ली स्थित छह लाभार्थी फर्मों को ट्रांसफर रकर दिए। धोखाधड़ी का पता तब चला जब यूपीएफसी के अधिकारियों ने बैंक को सूचित किया कि ऐसा कोई अधिकार पत्र जारी नहीं किया गया था और आरोपितों का यूपीएफसी से कोई संबंध नहीं था। पूरे मामले में कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।




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