RSS chief Mohan Bhagwat said in Gorakhpur Every person living in India is a Hindu भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है; गोरखपुर में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है; गोरखपुर में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख डॉ.मोहन राव भागवत ने कहा है कि इस देश में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है। हिन्दू समाज मानता है कि हमारा रास्ता भी ठीक है और तुम्हारा भी। इस समाज में रुचि के अनुसार अन्य-अन्य पंथ सम्प्रदाय हैं। रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं किन्तु लक्ष्य एक।

Mon, 16 Feb 2026 05:48 AMPawan Kumar Sharma वरिष्ठ संवाददाता, गोरखपुर
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भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है; गोरखपुर में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ.मोहन राव भागवत ने कहा कि इस देश में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है। हिन्दू समाज मानता है कि हमारा रास्ता भी ठीक है और तुम्हारा भी। इस समाज में रुचि के अनुसार अन्य-अन्य पंथ सम्प्रदाय हैं। रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं किन्तु लक्ष्य एक। इस धारणा को मानने वाला ही हिन्दू समाज है। संघ प्रमुख रविवार को तारामंडल क्षेत्र में योगीराज गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में गोरक्ष प्रांत के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख जन को संबोधित कर रहे थे।

संघ प्रमुख ने बताया कि संघ हिंदू समाज की ही बात क्यों करता है। मिलजुल कर चलो, ऐसा मानने वाले को एक नाम दिया गया हिन्दू। वास्तव में हिंदू शब्द एक संज्ञा नहीं, बल्कि व्याकरण की दृष्टि से एक विशेषण है, जो गुणधर्म बताता है। जो सबको एक साथ लेकर चलता है। मोक्ष की तरफ ले जाता है। यही हिन्दू धर्म है। चूंकि यह हिन्दू नाम भारत के साथ रूढ़ हो गया है इसलिए हिन्दू नाम से ही सनातन जगेगा। जो भूल गए हैं कि हम हिन्दू हैं, उन्हें याद दिलाना है कि आप हिन्दू हो, जिससे हिन्दू समाज खड़ा हो सकें। हमें अपना ध्येय पूर्ण करना है।

उन्होंने कहा कि समाज सहिष्णुता और समन्वयता से ही चलना चाहिए। अपने स्वार्थ के लिए नहीं, दूसरों के हित के लिए चलना ही भारतीय संस्कृति है। इस सत्य को पहचानने से ही हमें शाश्वत आनंद की प्राप्ति हुई। उन्होंने आगे कहा कि हमारा राष्ट्र धर्मप्राण राष्ट्र है। धर्म हमारे आचरण का हिस्सा है। इसके लिए संस्कार की आवश्यकता थी। पीढ़ी दर पीढ़ी मानवीय आदतें बनाई गईं, यही संस्कार है। इससे ही संस्कृति बनी। इसी संस्कृति के आधार पर राष्ट्र का निर्माण हुआ। हम एक हैं, इस सत्य को हमने जाना। विविधता के होते हुए हमारे राष्ट्र को जोड़ने का वाला आधार भारत स्वरूप मातृशक्ति है।

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संघ प्रभाव, सत्ता, लोकप्रियता का आकांक्षी नहीं

संघ प्रमुख ने कहा कि संघ एक स्वायत्त, स्वतंत्र व स्वावलंबी संगठन है। जो अपने लिए नहीं, राष्ट्र के लिए समर्पित है। पूर्ण समाज फिर से स्वस्थ होकर अपना कार्य करने लगे तो संघ की आवश्यकता ही क्यों। सरसंघचालक ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी परिस्थिति विशेष की प्रतिक्रिया नहीं है और न ही उसका किसी से विरोध है। वह किसी के साथ अपनी स्पर्धा भी नहीं देखता। वह प्रभाव, सत्ता, लोकप्रियता का भी आकांक्षी नहीं है। बल्कि समाज के हित में सभी कार्यों को करने वाला ही संघ है।

उन्होंने बाइबिल के वाक्य का जिक्र करते हुए कहा कि हम किसी को नष्ट करने के लिए नहीं आए हैं। सरसंघचालक ने कहा कि संघ की दृष्टि पूर्णतया भारतीय चिंतन पद्धति से ही विकसित हुई है। आज समाज में संघ से अपेक्षाएं बढ़ी हैं। विश्व के पास ऐसा कोई तरीका नहीं है, जो समाज को सुख और शांति दे सके। इसलिए वह भी हमारी तरफ आशा भरी नजरों से देख रहा है। भारतवर्ष में पाश्चात्य चिंतन का प्रभाव पड़ने लगा था, जिसने भारतीय ज्ञान परम्परा को खण्डित करने और अपने चिंतन को स्थापित करने का प्रयास किया, किन्तु उनकी चिंतन पद्धति अधूरी थी। भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित हमारी चिंतन पद्धति ही समाज में उत्पन्न शंकाओं का समाधान कर सकती है। इसलिए संघ शताब्दी वर्ष में हमने समाज तक जाने का निर्णय लिया, जिससे हम उसे संगठित कर सकें।

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भारत की स्वतंत्रता के लिए चार चिंतन धाराएं चलीं

सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के लिए चार चिंतन धाराएं चलीं। पहला चिंतन पुनः लड़कर उन्हें हरा दें। सुभाष चंद्र बोस तक यह धारा चली। यह थी क्रांति की धारा। दूसरी धारा के अनुसार समाज में राजनीतिक जागृति नहीं थी। इसलिए हम हारे। समाज में राजनीतिक जागृति पैदा करनी पड़ेगी। यह दूसरी धारा चली। तीसरी धारा अंग्रेजों से बराबरी के लिए आधुनिक ज्ञान- विज्ञान की धारा एवं समाज सुधार की धारा थी। चौथा प्रवाह हम इसलिए भटके क्योंकि हम अपने मूल से अलग हुए। अतः हम पुनः मूल की तरफ बढ़ें। मूल की तरफ वापसी का काम स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद आदि ने किया। इन चारों धाराओं या प्रवाह से हेडगेवार जी का संपर्क रहा।

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संपूर्ण समाज को संगठित करना संघ का कार्य

संघ प्रमुख ने कहा कि सम्पूर्ण समाज को संगठित करना संघ का कार्य है। संघ के 100 वर्ष पश्चात् हमें अपने को विस्तार देना है, सुदृढ़ करना है। इसलिए पंच परिवर्तन विषय लाया गया है। इसमें सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्यबोध, पर्यावरण, कुटुंब प्रबोधन, स्व का बोध है। इस पंच परिवर्तन से सशक्त और भव्य समाज का निर्माण करना है।

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