राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सियासत तेज होते ही रिपोर्ट तलब, अचानक अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र
राम मंदिर से चढ़ावा गायब होने के आरोप और विवाद बढ़ने के साथ सियासत गरमा गई है। इस पर रिपोर्ट भी तलब कर ली गई है। इस बीच अचानक भवन निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंच गए हैं। उन्होंने पहुंचते ही ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ बैठक की।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के राम मंदिर में चढ़ावे की करोड़ों की राशि के कथित रूप से गायब होने के आरोप को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय की ओर से खारिज किए जाने के दूसरे दिन सोमवार को भी सोशल मीडिया पर महासचिव के बयान को ही अस्पष्ट करार दिया गया। इस मुद्दे पर विपक्ष की सियासत तेज होते ही केंद्र और प्रदेश सरकार सतर्क हो गई है। बताया जा रहा है कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई जानने के लिए रिपोर्ट तलब की गई है। इसी क्रम में राम मंदिर निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र सोमवार को अचानक अयोध्या पहुंचे और ट्रस्ट पदाधिकारियों संग बैठक की। माना जा रहा है कि 13 जून को प्रस्तावित समीक्षा बैठक में उन्हें आना था, लेकिन उनका जल्दी आगमन इसी सिलसिले में हुआ है।
पुलिस का किसी की गिरफ्तारी से इनकार
बदलते घटनाक्रम में पुलिस ने इस मुद्दे पर किसी की गिरफ्तारी से इन्कार किया है। फिर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोगों का कहना है कि गड़बड़ी हुई है और इस संबंध में नौ लोग चिन्हित भी किए जा चुके हैं। चर्चा यह भी है कि इस प्रकरण में बैंक से जुड़े लोगों की भी मिलीभगत है। सूत्र बताते हैं कि रामलला के चढ़ावे की धनराशि दानपात्रों से एकत्र कर पीएफसी में तय जगह लाई जाती थी। सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में ही इसकी गिनती होती थी।
जानकारी के मुताबिक एसबीआई द्वारा चढ़ावे की धनराशि की गिनती में बैंक कर्मचारियों के अलावा हायर एजेंसी के भी दो दर्जन कर्मचारी सहयोग करते हैं, लेकिन गिनती में उनकी भूमिका नहीं रहती। फिलहाल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से किसी प्रकार की पुष्टि नहीं की गयी है न जिला प्रशासन के जिम्मेदारों ने ही कोई टिप्पणी की।
अखिलेश का वार, ब्रजेश पाठक का पलवार
इसे लकेर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने लगातार दो दिनों तक निशाना साधा तो डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने हमले का जवाब दिया। अखिलेश ने एक्स पर किसी का नाम लिए बिना कहा कि चेहरे के भाव और देह की भाषा हताशा और निराशा से भरी है। ट्रस्ट के सभी सदस्यों को साथ बैठाकर स्पष्टीकरण दिया जाए और आंकड़ों के मिलान के लिए सीसीटीवी साक्ष्य का सहारा लिया जाए। जैसे ही सारे ट्रस्टी साथ बैठेंगे तो सच तत्काल बाहर आ जाएगा, क्योंकि उनमें हर कोई एक जैसा नहीं है। इस हेराफेरी की शंका के केंद्र में जब कोई एक व्यक्ति विशेष है ही नहीं तो फिर किसी एक के स्पष्टीकरण का क्या महत्व है।
उन्होंने कहा कि ये भी स्पष्ट किया जाए कि 40 सेकंड का स्पष्टीकरण आने में इतने घंटे क्यों लगे। स्पष्टीकरण के नाम पर एक मिनट बोलना भी भारी क्यों पड़ रहा है। प्रदेश सरकार की चुप्पी की तरह ये सफाई भी संदिग्ध है। ऐसा लग रहा है जैसे स्पष्टीकरण के नाम पर शाब्दिक औपचारिकता निभाई जा रही है। संपूर्ण विश्व का सनातन समाज, इस बेहद कमजोर स्पष्टीकरण से और भी अधिक शंकित और आहत हुआ है।
भ्रम फैला रहे अखिलेश, उनकी सोच बाबरवादी: ब्रजेश
वहीं, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सोमवार को अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने वीडियो संदेश में कहा है कि सपा मुखिया ने कभी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान नहीं किया। उनकी सोच बाबरवादी है। ब्रजेश ने कहा कि श्रीराम मंदिर निर्माण से पूर्व भूमि पूजन पर भी उनके शब्द नहीं निकले। अयोध्याधाम में जब भव्य वास्तुकला मूर्त रूप ले रही थी, तब भी शांत रहे। प्रभु श्रीराम का विग्रह स्थापित होने पर भी स्वागत नहीं किया।
कहा कि अखिलेश श्रीराम मंदिर को लेकर अफवाह फैलाकर झूठ गढ़ने का असफल प्रयास कर रहे हैं। वह माता शबरी और भगवान जटायु की चर्चा कभी नहीं करेंगे। भारत दुनिया में सनातन संस्कृति का वाहक राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि सपा मुखिया महर्षि वाल्मीकि के महाकाव्य को भी भूल गए हैं। अपनी सोच को सनातन संस्कृति के विरुद्ध न करें। आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। वर्ष 2027 में समाजवादी पार्टी को पुनः मुंह की खानी पड़ेगी। उनके झूठ का नैरेटिव कभी सफलता तक नहीं पहुंचेगा। प्रदेश के लोग सपा की कारगुजारियों को अच्छी तरह से समझ चुके हैं।




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