High Court takes a tough stance on the case of missing girls from Lucknow seeks a report within three days and summons लखनऊ से गायब लड़कियों के मामले में हाईकोर्ट सख्त, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट, डीसीपी तलब, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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लखनऊ से गायब लड़कियों के मामले में हाईकोर्ट सख्त, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट, डीसीपी तलब

राजधानी लखनऊ से गायब और अगवा हो रही लड़कियों के मामले में हाईकोर्ट सख्त हो गया है। पुलिस से तीन दिन में इस पर रिपोर्ट मांगी है। डीसीपी को व्यक्तिगत रूप से तलब भी किया है। डीसीपी पूर्व ने स्वीकार किया कि 15 लड़कियों का अब भी सुराग नहीं मिला है।

Tue, 9 June 2026 06:03 AMYogesh Yadav लखनऊ, विधि संवाददाता
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लखनऊ से गायब लड़कियों के मामले में हाईकोर्ट सख्त, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट, डीसीपी तलब

राजधानी में नाबालिग लड़कियों के गायब व अगवा होने के मामलों पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने पुलिस कमिश्नर से राजधानी में इस तरह के मामलों पर स्पष्टीकरण मांगा है। इसके साथ ही डीसीपी, पूर्वी को निर्देश दिया है कि वे अपने मातहत आने वाले ऐसे सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों के साथ अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर हों, जिनके पास इस प्रकार के मामले लंबित हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 जून को होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी की एकल पीठ ने 12 वर्षीय एक नाबालिग बच्ची के पिता की ओर से दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर पारित किया है। ​मामले के अनुसार, 12 वर्ष की एक मासूम पिछले चार महीने से लापता थी। पुलिस की सुस्ती के बाद जब पिता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया, तब जाकर पुलिस हरकत में आई और बच्ची को बरामद कर कोर्ट में पेश किया।

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कोर्ट में बच्ची ने अपने पिता के साथ जाने की इच्छा जताई, जिसके बाद अदालत ने उसे पिता के सुपुर्द कर दिया। वहीं, न्यायालय के आदेश के अनुपालन में डीसीपी पूर्वी, दीक्षा शर्मा ने हलफनामा दाखिल किया। इसमें बताया कि उनके अधीन आने वाले नौ थानों के क्षेत्र में कुल 81 लड़कियों, जिनमें से अधिसंख्य नाबालिग हैं का अपहरण या बहला-फुसलाकर भगाने का मामला सामने आया। इनमें से 66 को तो बरामद कर लिया गया है, लेकिन 15 लड़कियां अभी भी लापता हैं।

इस पर न्यायालय ने डीसीपी को निर्देश दिया है कि वह ऐसे सभी मामलों की स्वयं निगरानी करें और तीन दिनों के भीतर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करें। न्यायालय ने कहा कि मामला नाबालिग बच्चियों के जीवन और स्वतंत्रता से जुड़ा है। इसलिए लापरवाह थाना प्रभारियों, चौकी प्रभारियों और जांच अधिकारियों को सचेत किया जाए और जरूरत पड़ने पर सक्षम अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाए। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया गया है कि ऐसे मामलों का भी पता लगाया जाय, जिनकी रिपोर्ट पुलिस को नहीं की गई है।

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अतिक्रमण हटाने के विरोध में वकीलों के हड़ताल पर जाने पर हाईकोर्ट सख्त

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कैसरबाग स्थित सिविल कोर्ट परिसर के आसपास से अतिक्रमण हटाने के विरोध में न्यायिक कार्य के बहिष्कार और वकीलों की हड़ताल पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने सेंट्रल बार एसोसिएशन व लखनऊ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों समेत तीन वकीलों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए तथा उनके आचरण की शिकायत यूपी बार काउंसिल को क्यों न भेजी जाए।

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की अवकाशकालीन पीठ ने अनुराधा सिंह व अन्य टाइटिल से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है। पूर्व में न्यायालय ने कैसरबाग में सिविल कोर्ट परिसर के आसपास से अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया था। पुलिस प्रशासन और नगर निगम की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का वकीलों ने विरोध किया था और न्यायिक कार्य का बहिष्कार भी किया था। इस पर न्यायालय ने जिला जज से रिपोर्ट मांग ली थी।

सोमवार को पारित आदेश में न्यायालय ने कहा कि 18 मई से 26 मई 2026 तक दोनों बार एसोसिएशनों के आह्वान पर वकीलों ने न्यायिक कार्य से विरत रहकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया। न्यायालय ने कहा कि हड़ताल के कारण बड़ी संख्या में वादकारी प्रभावित हुए, दूर-दराज से आने वाले गरीब वादकारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। गवाहों सहित अन्य लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। आदेश में कहा गया कि किसी भी वकील या एसोसिएशन को न्यायालयों के बहिष्कार अथवा हड़ताल का अधिकार नहीं है।

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सुनवाई के दौरान जिला जज लखनऊ की रिपोर्ट और वीडियो फुटेज भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसमें एक अधिवक्ता द्वारा बैठक के दौरान वकीलों में प्लास्टिक की लाठियां बांटने तथा प्रशासन और पुलिस के खिलाफ उत्तेजक टिप्पणियां किए जाने का उल्लेख किया गया है। कोर्ट ने इस घटना को गंभीरता से लिया। इस संबंध में कोर्ट ने अधिवक्ता उत्तम त्रिपाठी, हिमांशु मिश्रा और बृजेश कुमार यादव को भी नोटिस जारी कर दो सप्ताह में शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। हालांकि आदेश में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि सेंट्रल बार एसोसिएशन ने दो अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें पांच वर्ष के लिए सदस्यता से निष्कासित किया है। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

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