रबर स्क्रैब के 31 भारी भरकम बोरों में ऐसा क्या था जिससे हैरान रह गई पुलिस-STF? चेकिंग में खुला खेल
यूपी की राजधानी लखनऊ में चेकिंग दौरान डीसीएम में रबर स्क्रैब के 31 भारी भरकम बोरों में ऐसा क्या देखा जिससे पुलिस-STF हैरान रह गई? पुलिस ने डीसीएम चालक को गिरफ्तार कर ली है।

Lucknow News: यूपी के लखनऊ में एसटीएफ और निगोहां पुलिस की संयुक्त टीम ने एक डीसीएम में चेकिंग के दौरान रबर स्क्रैब के 31 भारी भरकम बोरों में 775 पैकेट देखकर हैरान रह गई। इस दौरान तस्करी खेल खुल गया। बोरों में भरे रबर स्क्रैब के बीच गांजे के पैकेट रखकर उड़ीसा से ले जाया जा रहा था। बरामद गांजे की कीमत करीब दो करोड़ रुपये बताई जा रही है। टीम ने पौने आठ कुंतल गांजा बरामद कर तस्कर चालक को गिरफ्तार कर लिया है।
थानाप्रभारी निगोहां अनुज कुमार तिवारी और एसटीएफ के उपनिरीक्षक हरीश सिंह चौहान की संयुक्त टीम बुधवार देर रात चेकिंग कर रही थी। इस बीच नगराम मोड़ के एक डीसीएम देखकर टीम ने रोकने का प्रयास किया। चालक ने रफ्तार बढ़ा दी। दोनों टीमों ने डीसीएम का पीछा किया और ओवरटेक कर रोक लिया। चालक को धर दबोचा। टीम ने डीसीएम की तलाशी ली तो अंदर भारी भरकम बोरे रखे थे। रबर स्क्रैब के 31 बोरों में 775 पैकेट गांजा बरामद हुआ। वजन करीब 775 किलो था। पकड़ा गया चालक कौशल कुमार फतेहपुर जनपद के मदारपुर बिंदकी का रहने वाला है। उसके पास से दो मोबाइल और 210 रुपये बरामद हुए हैं।
पूछताछ में बताया कि गांजे की यह खेप ओडिशा से लाकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सप्लाई की जानी थी। पुलिस के अनुसार यह माल नगराम इलाके में रहने वाले मयंक गुप्ता के पास पहुंचाया जा रहा था, जहां से इसे अलग-अलग जगहों पर सप्लाई किया जाता था। थानाप्रभारी के मुताबिक तस्करी में समरजीत उर्फ सोनू गुप्ता, मयंक कुमार गुप्ता, रविंद्र जायसवाल उर्फ रवींद्र और सैय्यद दावर अलवी समेत कई अन्य लोग भी शामिल हैं। गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को लगाया गया है।
गांजे को लेकर नगराम इलाका रहा सुर्खियों में :
ग्रामीणों ने बताया कि गांजा की बिक्री नगराम निगोहा और गोसाईगंज में दशकों से चली आ रही है इसको लेकर पुलिस ने कुछ छोटे कारोबारियों को पकड़ा भी लेकिन ये कारोबार पूरी तरह कभी बंद नहीं हुआ।
तत्कालीन इंस्पेक्टर ने बड़े तस्कर को जेल भेजकर तिलिस्म तोड़ा था :
ग्रामीणों ने बताया कि नगराम और गोसाईगंज की सीमा पर एक गांव में रसूखदार नशे का कारोबार फैला रखा था और राजनीतिक पकड़ होने के चलते किसी पुलिस अधिकारी ने हाथ डाला था। तत्कालीन इंस्पेकर धीरेन्द्र प्रताप कुशवाहा ने इस कारोबारी को पकड़कर सलाखों के पीछे भेजकर बड़ी कार्यवाही की थी। इसके बाद से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी।




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