शंकराचार्य और UGC पर इस्तीफा देने वाले PCS अलंकार अग्निहोत्री निलंबित, जांच का भी आदेश
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री पर बड़ा एक्शन हो गया है। अलंकार को निलंबित करने के साथ ही उनके खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है। अलंकार ने शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी एक्ट के खिलाफ सोमवार को इस्तीफा दिया था।

शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी एक्ट के खिलाफ इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया गया है। उन पर अनुशासनहीनता और सरकारी सेवा शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। सोमवार को अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य और यूजीपी के मामले पर अपनी आपत्ति जताने के साथ ही सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी पोस्ट साझा करते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद से ही उन पर बड़ी कार्रवाई के कयास लगाए जा रहे थे।
शामली अटैच किए गए, मंडलायुक्त करेंगे जांच
निलंबन की अवधि के दौरान अलंकार अग्निहोत्री को जिलाधिकारी कार्यालय, शामली से संबद्ध (अटैच) किया गया है। शासन ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए बरेली मंडलायुक्त (Commissioner) को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। अलंकार के इस्तीफे के बाद तेजी से घटनाक्रम बदला। उनके घर पर ब्राह्मणवादी संगठनों का जमावड़ा हो गया। मीडिया से उन्होंने बातचीत में भाजपा सरकार पर कई आरोप लगा दिए। भाजपा के बॉयकॉट का आह्वान तक कर दिया। डीएम बरेली ने इन सब की रिपोर्ट रात में ही शासन को भेजी। रिपोर्ट के आधार पर शासन ने कार्रवाई की है।
उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक नियमावली के नियम 4 के अंतर्गत उनको प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विशेष सचिव अन्नपूर्णा गर्ग ने राज्यपाल के आदेश को जारी करते हुए विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई के आरोप पत्र अलग से जारी करने की बात कही है।
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे के पीछे दो मुख्य कारणों का हवाला दिया था। पहला प्रयागराज में माघ मेला में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित बदसलूकी और प्रशासनिक उदासीनता का विरोध किया है। दूसरा यूजीसी द्वारा जारी हालिया दिशा-निर्देशों को 'काला कानून' बताते हुए उन्होंने इसे ब्राह्मण समाज के हितों के खिलाफ बताया था।
बॉयकॉट भाजपा बनी गले की फांस?
इस्तीफे के ऐलान के साथ ही अलंकार अग्निहोत्री ने पद पर रहते हुए सोशल मीडिया पर बॉयकॉट भाजपा और काला कानून वापस लो जैसे नारे लिखे पोस्टर के साथ अपनी फोटो पोस्ट की थी। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि एक कार्यरत अधिकारी द्वारा किसी राजनीतिक दल के विरुद्ध इस तरह का प्रचार करना कंडक्ट रूल्स (आचरण नियमावली) का गंभीर उल्लंघन है। इसके कारण शासन ने बिना देरी किए निलंबन की कार्रवाई की है।
प्रशासनिक खेमे में हड़कंप
गणतंत्र दिवस के मौके पर एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा इस तरह की 'बगावत' ने शासन को असहज कर दिया है। अब निलंबन और विभागीय जांच के आदेश के बाद अलंकार अग्निहोत्री की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में उनकी सेवा समाप्ति या अन्य कठोर दंड पर फैसला लिया जा सकता है।
ब्राह्मणवादी संगठनों का मिला साथ
इस्तीफा देने के बाद देर रात तक अलंकार के आवास पर ब्राह्मणवादी संगठनों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक संगठनों के लोग जमे रहे। अलंकार जिलाधिकारी से वार्ता करने भी गए। वहां से लौटने पर उन्होंने खुद को बंधक बनाने का आरोप जड़ दिया। अपनी जान को खतरा बताया। यहां तक अपना सामान गाड़ी में भरकर भिजवा दिया और खुद भी आवास से निकल गए। हालांकि कुछ समय बाद वह फिर अपने आवास पर ही आकर जम गए। उन्होंने मंगलवार को एक बार फिर प्रेस वार्ता करने का ऐलान भी किया था।




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