patient leg becomes an inch shorter during surgery doctor will now have to pay 3 lakh rupees in compensation डॉक्टर की लापरवाही से मरीज का एक इंच छोटा हुआ पैर, अब देना होगा 3 लाख का हर्जाना, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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डॉक्टर की लापरवाही से मरीज का एक इंच छोटा हुआ पैर, अब देना होगा 3 लाख का हर्जाना

कानपुर में ऑपरेशन में चूक के कारण एक मरीज का पैर एक इंच छोटा हो गया। मामला जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग पहुंचेने पर पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाया गया। वहीं, दूसरे पक्ष को पीड़ित को तीन लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है। 

Sun, 9 Nov 2025 02:30 PMPawan Kumar Sharma प्रमुख संवाददाता, कानपुर
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डॉक्टर की लापरवाही से मरीज का एक इंच छोटा हुआ पैर, अब देना होगा 3 लाख का हर्जाना

यूपी के कानपुर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां ऑपरेशन में चूक के कारण एक मरीज का पैर एक इंच छोटा हो गया। मामला जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग पहुंचा। जहां पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाया गया। वहीं, दूसरे पक्ष को पीड़ित को तीन लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही परिवाद दाखिल करने की तिथि से भुगतान तक सात प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। वहीं, 60 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 10 हजार वाद व्यय भी पीड़ित को मिलेगा।

दरअसल, मेडिकल कॉलेज कैंपस के रहने वाले दिनेश कुमार शुक्ला ने 19 फरवरी 2018 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दाखिल किया था। इसमें उन्होंने डॉ. गोविंद त्रिवेदी ट्रामा एंड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन वेदांता हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर आर्यनगर और द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी बिरहाना रोड को पक्षकार बनाया था। दिनेश ने बताया था कि उनका दाहिना पैर टूट गया था। डॉक्टर ने 5 अप्रैल 2016 को ऑपरेशन कर रॉड डाली थी।

इलाज में बताए गए खर्च का भुगतान करने के बाद उन्हें 12 अप्रैल को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। पैर में तकलीफ बढ़ने पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के आर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. एके गुप्ता को दिखाया था। जांच के बाद बताया गया कि ऑपरेशन के दौरान उनका पैर छोटा हो गया है। इसके बाद उन्होंने संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज लखनऊ की बोन डिन्सीटोमेट्ररी लैब में पूरे शरीर का स्कैन करवाया। 6 फरवरी 2017 को रिपोर्ट आई। इसमें बताया गया कि ऑपरेशन के दौरान लापरवाही से पैर लगभग एक इंच छोटा हो गया है। आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए डॉ. गोविंद त्रिवेदी ने गलत ऑपरेशन के आरोपों का विरोध किया। तर्क दिया कि परिवादी को पहले से ही कई बीमारियां थीं।

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सभी खतरों के बारे में स्पष्ट रूप से बताते हुए उनकी सहमति के बाद ही ऑपरेशन किया गया। दूसरे पक्षकार बीमा कंपनी की ओर से कहा गया कि परिवादी किसी तरह की क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी नहीं है। आयोग अध्यक्ष विनोद कुमार और सदस्य नीलम यादव ने वादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पृथक व संयुक्त रूप से हर्जाना देने के आदेश दिए।

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