पल्लवी पटेल का लखनऊ में हल्ला बोल, इंजन पर चढ़कर रोकी ट्रेन; UGC नियम लागू करने की मांग
आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने चारबाग रेलवे स्टेशन पर पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग कर बनाया सुरक्षा घेरा तोड़ दिया। वे रेलवे स्टेशन के प्लेफार्म नंबर एक पर पहुंच गए। यूजीसी सिक्योरिटी रेगुलेशन तुरंत लागू करने की मांग करते हुए पल्लवी पटेल और उनके समर्थकों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ शनिवार को सिराथू विधायक और अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल के हल्लाबोल की गवाह बनी। पल्लवी पटेल करीब दो हजार समर्थकों के साथ विधानसभा कूच का ऐलान करते हुए सड़क पर उतर गईं। पल्लवी पटेल और उनके साथ चल रहे आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने चारबाग रेलवे स्टेशन पर पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग कर बनाया सुरक्षा घेरा तोड़ दिया और रेलवे स्टेशन के प्लेफार्म नंबर एक पर पहुंच गए। यूजीसी सिक्योरिटी रेगुलेशन तुरंत लागू करने की मांग करते हुए पल्लवी पटेल और उनके समर्थकों ने वंचितों के हक की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान पल्लवी पटेल खुद समर्थकों के साथ ट्रेन के इंजन पर चढ़ गईं और जमकर नारेबाजी की। पल्ल्वी ने कहा कि वे तीन महीने के जन जागरूकता अभियान के बाद शनिवार को सरकार और न्यायपालिका से जवाब मांगने आई हैं। चारबाग स्टेशन पर पल्लवी पटेल समर्थकों और पुलिस के बीच घंटों खींचतान चलती रही। अंत में पुलिस ने पल्लवी पटेल समेत कई कार्यकर्ताओं हिरासत में लेकर बसों से इको गार्डन भिजवा दिया।
पल्लवी पटेल के साथ प्रदर्शन में शामिल एक कार्यकर्ताओं ने मीडिया से कहा कि आज हम लोगों ने ट्रेन रोकी है जरूरत पड़ी तो हवाई जहाज भी रोकेंगे। एयरपोर्ट पर ताला लगा देंगे। उन्होंने कहा कि दलित, पिछड़ा, आदिवासी सभी को वोट करता है। लेकिन कोई भी उसके अधिकार के लिए सामने नहीं आता है। उन्होंने कहा कि हम लोग मुकदमे से नहीं डरते हैं। मुकदमा हमारे लिए मेडल की तरह है।
पुलिस से भिड़ गईं पल्लवी
यूजीसी के नये नियमों के समर्थन में सड़क पर उतरीं पल्लवी पटेल चारबाग से विधानसभा की ओर जाने के दौरान पुलिस से भिड़ गईं। पुलिस ने पल्लवी और उनके कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। काफी देर तक चली खींचतान के बाद पुलिस ने कार्यकर्ताओं में भरकर इको गार्डन भिजवा दिया। इस दौरान पल्लवी पटेल ने कहा कि यूजीसी के नये नियमों को हम लागू करवा कर रहेंगे। इसके लिए हम लगातार सड़कों पर उतरकर संघर्ष कर रहे हैं। आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि हम लोग जवाब मांगने आए हैं कि आखिर क्यों पिछड़ों का अधिकार छीना जा रहा है? यदि मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो सही पैरवी होनी चाहिए। यदि सवर्ण समाज यूजीसी का विरोध कर रहा है तो करता रहे। हम इसका समर्थन कर रहे हैं और करते रहेंगे। इसे लागू करवा कर रहेंगे।
क्या है मामला
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 13 जनवरी 2026 को नए नियमों को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया था। इसका नाम था ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026’। इस नियम के तहत इसके तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के प्रावधान किए गए थे। ये टीमें खासतौर पर अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी छात्रों की शिकायतों का निस्तारण करतीं। इन नियमों को सामान्य वर्ग के खिलाफ बताकर देश भर में विरोध सामने आने लगा था। सामान्य वर्ग के छात्रों का कहना था कि नए नियम कॉलेज या विश्वविद्यालय परिसरों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी थी रोक
29 जनवरी को यूजीसी के इन नये नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक रोक लगा दी थी।




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