यूपी में हर पांचवीं महिला बनी संपत्ति की मालकिन, इन तीन मामलों में फैसले लेने में भागीदारी घटी
उत्तर प्रदेश में हर पांचवीं महिला संपत्ति की मालकिन बन गई है। इस मामले में देश के औसत से भी यूपी आगे निकल गया है। हालांकि घर के तीन बड़े मामलों में फैसले लेने में यूपी की महिलाओं की भागीदारी घटी भी है।

यूपी में महिलाओं को संपत्ति का मालिकाना हक मिलने का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। दो सालों में इसमें करीब आठ फीसदी का उछाल आया है। पहले जहां करीब 12 फीसदी महिलाओं के पास मालिकाना हक था अब 20 फीसदी हो गया है। यानी हर पांचवीं महिला संपत्ति की मालकिन बन चुकी है। यह मालिकाना हक एकल या साझा है। इसके पीछे सरकारी योजनाओं और स्टांप ड्यूटी में मिलने वाली छूट को बड़ा कारण माना जा रहा है। महिलाओं को संपत्ति का मालिकाना हक यूपी में अब देश के औसत से भी ज्यादा हो गया है। हालांकि तीन मामलों अपना स्वास्थ्य, घर का बड़ा खर्च और रिश्तेदारों के यहां विजिट के मामले में फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी घटी है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के छठे संस्करण की हालिया रिपोर्ट पर नजर डालें तो पूरे देश में महिलाओं के नाम पर मकान या जमीन का मालिकाना हक होने का ग्राफ 14 से बढ़कर 18.8% पर पहुंच गया है, यानि देश की 18.8% परिवारों में महिलाओं के पास भूमि या मकान का एकल या संयुक्त मालिकाना हक है।
2021 से 2024 के बीच बढ़ा ग्राफ
उत्तर प्रदेश की बात करें तो वर्ष 2019 से 2021 के बीच महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व का आंकड़ा 12.2% था। यह 2023-24 में बढ़कर 20.1% पर पहुंच चुका है। इससे साफ है कि देश के साथ ही यूपी में महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व में शानदार सुधार हुआ है।
देश में ग्रामीण और यूपी में शहरी महिलाएं आगे
खास बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण इलाकों की महिलाओं का ग्राफ बेहतर है। ग्रामीण क्षेत्र में 19.1% महिलाओं के पास संपत्ति का मालिकाना हक है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 18.2% है। उत्तर प्रदेश में संपत्ति के मालिकाना हक मामले में शहरी महिलाएं आगे हैं। यहां 20.8% शहरी और 19.8% महिलाओं के पास एकल या संयुक्त मालिकाना हक है।
इन कारणों से चढ़ा ग्राफ
यूपी में ग्राफ बढ़ने की पहली वजह सरकार द्वारा महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री में छूट भी है। यूपी में एक करोड़ रुपये कीमत तक की संपत्ति की रजिस्ट्री पर महिलाओं को एक फीसदी स्टांप ड्यूटी की छूट मिलती है। इसने लोगों को महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीद के लिए प्रेरित किया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दिए जाने वाले घरों की रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से महिलाओं के नाम पर की जा रही है। यूपी सहित देश में कामकाजी महिलाएं बढ़ने के चलते भी संपत्ति के मालिकाना हक पाने के मामले बढ़े हैं।
तीन प्रमुख फैसलों में भागीदारी घटी
वहीं दूसरी ओर यूपी में परिवार से जुड़े तीन फैसले लेने के मामले में विवाहित महिलाओं के ग्राफ में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है। परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के ताजा आंकड़ों के अनुसार फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी 87.6% से घटकर 85.9% रह गई है। इनमें खुद के स्वास्थ्य, घर के किसी बड़े खर्च और रिश्तेदारों के यहां जाने-आने से जुड़े फैसले शामिल हैं। इन तीन फैसलों में यूपी की 90.1% शहरी और 84.7% ग्रामीण महिलाओं की भूमिका रहती है।




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