यूपी में विकसित होंगे 10 इंडस्ट्रियल टाउनशिप, इंफ्रास्ट्रचर के लिए केंद्र से मिलेगी मदद
देश में 100 इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित होंगे। पहले चरण में 50 पर काम शुरू हो गया है। 25 के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। इनमें से 10 यूपी में विकसित होंगे। प्रदेश में इन टाउनशिप के लिए मानक के मुताबिक भूमि उपलब्ध है। केंद्र सरकार से इंफ्रास्ट्रचर के लिए मदद मिलेगी।

भारत औद्योगिक विकास योजना के तहत देश में 100 औद्योगिक टाउनशिप विकसित किए जाएंगे। पहले चरण में 50 पर तुरंत काम शुरू हो गया है और 25 के लिए राज्यों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। इनमें यूपी में 10 इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित करने की तैयारी है। जन विश्वास एक्ट-3 पर उद्यमियों, औद्योगिक संघों से नीतिगत बदलावों पर सुझाव मांगे जा रहे हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के संयुक्त सचिव डॉ. जय प्रकाश शिवहरे ने इस बारे में बताया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सभी राज्यों में सुधार हो रहे हैं। देश में 2.23 लाख स्टार्टअप काम कर रहे हैं। दुनिया के लोग भी इनके साथ काम करना चाहते हैं।
कहा कि नए इंडस्ट्रियल फेज के तहत 100 इंस्स्ट्रियल टाउनशिप विकिसत की जाएंगी। इनमें से 50 पर तुरंत काम शुरू हो गया है। इस दौरान इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद ने कहा कि हम 10 टाउनशिप विकसित करेंगे। इसके प्रमुख शर्त 90 फीसदी भूमि उपलब्ध होना चाहिए। हमारे पास पर्याप्त भूमि बैंक है। आधारभूत संरचना के लिए केंद्र सरकार प्रति एकड़ के हिसाब से वित्तीय मदद देती है।
देश में विदेशी निवेश 18 फीसदी बढ़ा
डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव डॉ. जय प्रकाश शिवहरे ने बताया कि एफडीआई पॉलिसी में पहले हम दुनिया में 11वें स्थान पर थे, अब 9वें पर हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले देश में एफडीआई 18 फीसदी बढ़ा है। बहुत भारतीय कंपनियां दूसरे देशों में काम कर रही हैं। पहले विदेशी निवेश बढ़ गया था लेकिन अब लौट रहे हैं। उनका भी देश के विकास में सहयोग है। हमारे उद्योगों ने नए मार्केट तलाशे हैं।
आज 39 देशों के साथ मुक्त व्यापार
डॉ. शिवहरे ने बताया कि पांच वर्ष में 9 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) हुए हैं। आज हमारा 39 देशों के साथ मुक्त व्यापार हो रहा है। इसमें 27 यूरोपीय देश भी शामिल हैं। सेक्टर, प्रोडक्ट, मार्केट ट्रेंड का अध्ययन समय-समय पर कराया जाता है। ट्रेड फेयर, रोड शो के जरिए भी व्यापार को बढ़ाया जा रहा है। उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धी माहौल बनाया जा रहा है।
जन विश्वास एक्ट पर उद्यमियों से मांगे सुझाव
इससे पहले औद्योगिक संगठनों से संवाद के दौरान डॉ. जेपी शिवहरे ने जन विश्वास अधिनियम-3 के बारे में विस्तार से चर्चा की और सुझाव मांगे। इसका उद्देश्य उद्योग संगठनों और हितधारकों के बीच संवाद को मजबूत करना, सरकारी पहलों की जानकारी देना तथा सुझावों के आधार पर नीतियों में बदलाव करना है। संवाद में एसोचैम, फिक्की, पीएचडीसीसीआई, डिक्की (डीआईसीसीआई), लघु उद्योग भारती, आईआईए (आईआईए) और सीआईआई (सीआईआई) के प्रतिनिधियों हिस्सा लिया।
डॉ. शिवहरे ने कहा कि भारत सरकार ‘जन विश्वास सुधारों’ के माध्यम से कारोबारी वातावरण को अधिक सरल, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि जन विश्वास अधिनियम के तहत कई अप्रासंगिक एवं पुराने कानूनों को समाप्त किया गया है, जिससे अनुपालन संबंधी बोझ कम हुआ है और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिला है।
निर्यात के लिए नए बाजार तलाशे जा रहे
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न भू-राजनीतिक चुनौतियों तथा प्रमुख निर्यात बाजारों में शुल्क संबंधी बाधाओं के प्रभाव को कम करने के लिए भारत सरकार वैश्विक व्यापार साझेदारियों का विस्तार कर रही है। उन्होंने उद्योगों से मूल्य-सम्मत एवं निर्यातोन्मुख उत्पादों के विकास पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
प्रदेश में निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल
इस अवसर पर इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद ने कहा कि प्रदेश सरकार नियामकीय सरलीकरण और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से केंद्र सरकार के सुधार प्रयासों को मजबूत कर रही है। निवेश मित्र 3.0 के माध्यम से इज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत कर निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार किया जा रहा है।
सरकार ने निवेशकों की सुविधा के लिए विदेशी निवेश प्रकोष्ठ गठित किए हैं तथा यूपी में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए ट्रेड फेयर, रोड शो जैसे आयोजन किए जा रहे हैं। राज्य सरकार औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 तथा उत्तर प्रदेश एफडीआई/एफसीआई, फॉर्च्यून ग्लोबल 500 एवं फॉर्च्यून इंडिया 500 कंपनियों की निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 का व्यापक प्रचार-प्रसार कर रही है।




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